रूसी नेता के संदिग्ध हत्यारे गिरफ्तार
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रूस के विपक्षी नेता बोरिस नेम्तसोव की हत्या के मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। रूस की फैडरल सिक्योरिटी सर्विस ने इसकी सूचना दी है। एफएसबी के डायरेक्टर एलेक्जेंडर बोर्तनिकोव के मुताबिक शनिवार को पकडे गए दोनों लोग अनजॉर गुबाशेव और जऊर दादायेव कॉकेशस इलाके के हैं।
रूसी जांच अधिकारियों ने कहा है कि उन पर इस हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का संदेह है। क्रैमलिन के सामने एक पुल पर नेम्तसोव की हत्या ने रूस को चौंका दिया है।
पूर्व उप प्रधानमंत्री और उदारवादी नेता नेम्तसोव को 27 फरवरी की रात चार बार पीछे से गोली मारी गई थी। वह उस वक्त अपनी महिला मित्र के साथ सडक पर टहल रहे थे। उन्हें मंगलवार को मॉस्को में दफना दिया गया।
बीबीसी संवाददाता सारा रेंसफोर्ड ने मॉस्को से बताया कि हत्या के संदिग्धों की गिरफ्तारी का ऐलान सरकारी टेलीविजन पर एफएसबी के डायरेक्टर ने खुद किया। संवाददाता का कहना है कि रूसी प्रशासन शायद ये संकेत देना चाहता है कि क्रैमलिन इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रहा है।
हत्या के पीछे कई थे कारण
बोर्तनिकोव ने रूस के सरकारी चैनल वन पर अपने छोटे से संदेश में इसका विवरण नहीं दिया कि संदिग्धों को कहां और कैसे पकडा गया। पर उनका कहना था कि इस मामले की तहकीकात जारी है।
अभी दोनों में से किसी को औपचारिक तौर पर गिरफ्तार नहीं किया है। जांच से जुडे एक सूत्र ने रूस की इंटरफैक्स समाचार सेवा को बताया कि संदिग्धों द्वारा इस्तेमाल की गई एक कार को बरामद किया गया है। इसके साथ ही कार में मिली चीजों की जांच हो रही है।
सूत्र ने बताया कि सिक्योरिटी कैमरों की फुटेज में संदिग्धों की ‘काफी साफ’ तस्वीरें मिली हैं। राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने जनता के सामने इस हत्या की कडी निंदा की थी और कहा था कि रूस में ‘शर्मनाक’ राजनीतिक हत्याएं बंद होनी चाहिए।
मगर प्रमुख विपक्षी नेता एलेक्सेई नवाल्नी ने कहा था कि इस हत्या के पीछे क्रैमलिन का हाथ है ताकि आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे देश में विपक्ष को खामोश किया जा सके। रूसी जांचकर्ताओं ने नेम्तसोव की हत्या के पीछे कई कारण गिनाए थे जिनमें उनकी कारोबारी लेनदेन से लेकर पेरिस के शार्ली एब्डो पर हमले की निंदा तक शामिल थे।
जब नेम्तसोव की हत्या हुई उससे कुछ दिन बाद वह यूक्रेन में चल रहे युद्ध को लेकर मार्च आयोजित करने वाले थे। वह इस युद्ध में रूसी सेना की भागीदारी पर एक रिपोर्ट भी तैयार कर रहे थे।
उनकी हत्या के बाद एक मार्च को क्रैमलिन के पास हुई रैली में करीब 50 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था।