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नेपाल में प्रधानमंत्री मोदी ने श्रद्धालुओं को पढ़ाया रामायण का पाठ, जानिए 10 बड़ी बातें

Fri, 11 May 2018 04:20 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 11 May 2018 04:20 PM IST
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narendra modi  teached ramayan in his two days visit of nepal

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों की यात्रा पर नेपाल में हैं। नेपाल पहुंचने पर प्रधानमंत्री का जोरदार स्वागत किया गया। वहीं प्रधानमंत्री सुबह जानकीधाम पहुंचे और वहां पूजा अर्चना की। पूजा के दौरान पीएम मोदी काफी तल्लीन दिखे वहीं उन्होंने इस दौरान मजीरा भी बजाया। जानकीधाम में उन्होंने इस मौके पर जनकपुर- अयोध्या के बीच चलने वाली बस को हरी झंडी दिखाई। यह बस गोरखपुर होकर गुजरेगी। इस बस में एक साथ 35 यात्री सफर कर सकते हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी नागरिक अभिनन्दन समारोह में पहुंचे, जहां पारंपरिक गाजे-बाजे के साथ उनका स्वागत किया गया।  प्रधानमंत्री नागरिक अभिनन्दन समारोह में नेपाल के लोगों को संबोधित करते हुए पीएम ने भारत-नेपाल की दोस्ती पर कई बातें कहीं- 

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 -अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा  'इतिहास साक्षी रहा है, जब-जब एक-दूसरे पर संकट आए, भारत और नेपाल दोनों मिलकर खड़े हुए हैं। हमने हर मुश्किल घड़ी में एक दूसरे का साथ दिया है, भारत और नेपाल की मित्रता कैसी रही है, इसको रामचरितमानस की इन चौपाइयों के माध्यम से समझा जा सकता है।'
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जे न मित्र दुख होहिं दुखारी।
तिन्हहि बिलोकत पातक भारी॥

निज दुख गिरि सम रज करि जाना।
मित्रक दुख रज मेरु समाना॥


- भारत और नेपाल के बीच व्यापार भी रिश्तों की एक अहम कड़ी है। नेपाल बिजली उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। आज भारत से लगभग 450 मेगावाट बिजली नेपाल को सप्लाई होती है। इसके लिए हमने नई ट्रांसमिशन लाइंस बिछाई हैं।
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-जीवन आसान हो, आम जन को व्यवस्थाओं से जूझना ना पड़े। भ्रष्टाचार और दुराचार से रहित समाज और सिस्टम हो। ऐसे 'न्यू इंडिया' की तरफ हम आगे बढ़ रहे हैं। हमने शासन और प्रशासन में कई सुधार किए हैं। प्रक्रियाओं को सरल बनाया है। आज दुनिया हमारे उठाए गए कदमों की तारीफ कर रही है। हम राष्ट्र निर्माण और जनभागीदारी का संबंध और मजबूत कर रहे हैं। 


-हम एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं, जहां गरीब-से-गरीब व्यक्ति को भी प्रगति के समान अवसर मिले। जहां भेदभाव-ऊंच-नीच ना हो, सबका सम्मान हो। जहां बच्चों को पढ़ाई, युवाओं को कमाई और बुजुर्गों को दवाई मिले। 


-जब “सबका साथ, सबका विकास” की बात करता हूं, तो सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, सभी पड़ोसी देशों के लिए भी मेरी यही कामना होती है। और जब नेपाल में “समृद्ध नेपाल, सुखी नेपाली” की बात होती है, तो मेरा मन भी हर्षित होता है। सवा सौ करोड़ भारतवासियों को भी खुशी होती है


-पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण, हर दिशा में विकास का रथ दौड़ रहा है। विशेष तौर पर हमारी सरकार का ध्यान उन क्षेत्रों में ज्यादा रहा है जहां तक विकास की रोशनी नहीं पहुंच पाई थी। इसमें पूर्वांचल यानि पूर्वी भारत जो नेपाल की सीमा तक सटा है, इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 

-नेपाल सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के लिए एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है जो सुशासन और समावेशी विकास पर आधारित है। दस साल पहले नेपाल के नौजवानों ने बुलेट छोड़कर बैलेट का रास्ता चुना। युद्ध से बुद्ध तक के इस सार्थक परिवर्तन के लिए भी मैं नेपाल के लोगों को बधाई देता हूं।

-लोकतांत्रिक मूल्य एक और कड़ी है जो भारत और नेपाल के प्राचीन संबंधों को मजबूती देती है। लोकतंत्र वो शक्ति है जो सामान्य से सामान्य जन को बेरोकटोक अपने सपने पूरे करने का अधिकार देता है। भारत ने इस शक्ति को महसूस किया है और आज भारत का हर नागरिक सपनों को पूरा करने में जुटा है:


-नेपाल सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के लिए एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है जो सुशासन और समावेशी विकास पर आधारित है। दस साल पहले नेपाल के नौजवानों ने बुलेट छोड़कर बैलेट का रास्ता चुना। युद्ध से बुद्ध तक के इस सार्थक परिवर्तन के लिए भी मैं नेपाल के लोगों को बधाई देता हूं


विकास की पहली शर्त होती है लोकतंत्र। मुझे खुशी है कि लोकतांत्रिक प्रणाली को आप मजबूती दे रहे हैं। हाल में ही आपके यहां चुनाव हुए। आपने एक नई सरकार चुनी है। अपनी आशांओं आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए आपने जनादेश दिया है। भारत दशकों से नेपाल का एक स्थाई विकास साझेदार है। नेपाल हमारी ' नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी में सबसे पहले आता है।  

-भारत और नेपाल दो देश हैं, लेकिन हमारी मित्रता आज की नहीं त्रेता युग की है। राजा जनक और राजा दशरथ ने सिर्फ जनकपुर और अयोध्या ही नहीं, भारत और नेपाल को भी मित्रता और साझेदारी के बंधन में बांध दिया था।


- हम एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं, जहां गरीब-से-गरीब व्यक्ति को भी प्रगति के समान अवसर मिले। जहां भेदभाव-ऊंच-नीच ना हो, सबका सम्मान हो। जहां बच्चों को पढ़ाई, युवाओं को कमाई और बुजुर्गों को दवाई मिले।  

 
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