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चीन को साधने के लिए नेपाल को रेलवे लाइन का तोहफा देगा भारत
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 14 Sep 2016 06:53 PM IST
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प्रचंड
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नेपाल के नवनियुक्त प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड गुरुवार को चार दिवसीय यात्रा पर भारत आने वाले हैं। भारत उनकी इस यात्रा को बड़े मौके के रूप में देख रहा है। नेपाल में चीन के बढ़ते दखल और दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय में आई खटास को कम करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत-नेपाल के बीच के रिश्तों को एक नया आयाम देने के लिए भारत नेपाल को प्रचंड की यात्रा के दौरान नेपाल में ईस्ट-वेस्ट रेलवे लाइन डेवलप करने में मदद करने का प्रस्ताव दे सकता है। भारत का यह कदम कूटनीतिक रूप से बेहद अहम साबित हो सकता है।
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मोदी और प्रचंड
प्रचंड भारत के साथ रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद प्रचंड ने अपने पहले विदेश दौरे के लिए भारत को चुना है। उनके पहले के पीएम केपी शर्मा ओली को चीन का समर्थक माना जाता था। इस वजह से उन्होंन चीन के साथ कुछ ऐसे समझौते किए जिससे नेपाल की भारत पर निर्भरता कम हो। ओली के शासन काल में लंबे समय पर नेपाल-भारत सीमा पर गतिरोध बना रहा। ओली ने भारत सरकार पर ईंधन और कारोबार संबंधी रोक लगाने के आरोप लगाए थे।
मंगलवार को प्रचंड ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वे भारत-नेपाल के बीच आई रिश्तों की कड़वाहट को कम करना चाहते हैं , हालांकि दोनों देशों के बीच कुछ दिनों के लिए रिश्ते नर्म पड़ गए थे लेकिन भारत नेपाल की मदद करना चाहता है जो फिलहाल मुश्किलों में है। भारत जिस रेलवे लाइन के निर्माण का प्रस्ताव देगा उसका निर्माण ईस्ट-वेस्ट हाइवे के समानांतर होगा। इसकी लंबाई तकरीबन 1030 किमी होगी। फिलहाल नेपाल में भारतीय सीमा पर केवल एक रेलवे लाइन है जो जयनगर से जनकपुर तक जाती है।
मंगलवार को प्रचंड ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वे भारत-नेपाल के बीच आई रिश्तों की कड़वाहट को कम करना चाहते हैं , हालांकि दोनों देशों के बीच कुछ दिनों के लिए रिश्ते नर्म पड़ गए थे लेकिन भारत नेपाल की मदद करना चाहता है जो फिलहाल मुश्किलों में है। भारत जिस रेलवे लाइन के निर्माण का प्रस्ताव देगा उसका निर्माण ईस्ट-वेस्ट हाइवे के समानांतर होगा। इसकी लंबाई तकरीबन 1030 किमी होगी। फिलहाल नेपाल में भारतीय सीमा पर केवल एक रेलवे लाइन है जो जयनगर से जनकपुर तक जाती है।