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अमेरिकी हवाई हमले में तालिबान नेता मुल्ला मंसूर ढेर

Mon, 23 May 2016 01:50 AM IST
एजेंसी/ वाशिंगटन
एजेंसी/ वाशिंगटन Updated Mon, 23 May 2016 01:50 AM IST
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Mulla Masood died in American air strike
अफगानिस्तान में हवाई हमला - फोटो : Getty
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। अमेरिकी अधिकारियों ने संभावना जताई है कि अफगानिस्तान की सीमा से सटे पश्चिमी पाकिस्तान के दूरदराज इलाके में हवाई हमले करके उन्होंने तालिबान नेता मुल्ला मंसूर को मार गिराया है। पेंटागन ने भी मंसूर पर हवाई हमले की पुष्टि की है, हालांकि अभी वह ऑपरेशन के नतीजों का आंकलन कर रहा है।
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अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र के दूरदराज के इलाके में मंसूर को निशाना बनाकर हवाई हमला किया गया। अभियान की मंजूरी अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दी थी। हमले में मंसूर के साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति के भी मारे जाने की संभावना है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अहमद वाल शहर के पास के इलाके में एक वाहन पर कई ड्रोन हमले किए गए। हमलों को स्थानीय समयानुसार सुबह करीब छह बजे अंजाम दिया गया। 
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पेंटागन के प्रेस सचिव पीटर कुक ने बताया कि रक्षा मंत्रालय अभी भी पाकिस्तान में अपने इस हमले के नतीजों का आकलन कर रहा है। वहीं अफगान तालिबान के वरिष्ठ कमांडर मुल्ला अब्दुल रऊफ ने भी घटना की पुष्टि की और कहा कि मुल्ला मंसूर अमेरिकी ड्रोन हमलों में मारे गए हैं। रऊफ ने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि अमेरिकी ड्रोन ने इन हमलों को शुक्रवार की देर रात को अंजाम दिया था जिसमें तालिबान नेता की मौत हुई। हालांकि अफगानिस्तान की सरकार ने मुल्ला मंसूर की मौत की पुष्टि नहीं की है। 
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तालिबान के बीच सुलह में बाधक था मंसूर

Mulla Masood died in American air strike
तालिबान को बनाया निशाना - फोटो : Getty
अमेरिका के कई शीर्ष सांसदों ने मंसूर को मार गिराए जाने के अभियान की तारीफ की है। सीनेटर एवं शक्तिशाली सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष जॉन मैक्केन ने कहा कि मैं इस खबर का स्वागत करता हूं कि मुल्ला मंसूर मारा गया। इस कार्रवाई ने अमेरिका एवं अफगानिस्तान को और सुरक्षित बनाया है। वहीं सीनेटर एवं सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमेटी के अध्यक्ष बॉब कॉर्कर ने कहा कि यदि मंसूर के मारे जाने की खबर में सच्चाई है तो यह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक अहम जीत है। वहीं अफगान सीईओ अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने कहा कि यदि मंसूर के मौत बात सही है तो इससे तालिबान नेतृत्व में बड़े बदलाव होंगे। इससे शांति प्रक्रिया में नए तालिबान नेताओं के शामिल होने की संभावना बढ़ जाएगी।

पेंटागन के प्रेस सचिव पीटर कुक के मुताबिक तालिबान नेता मंसूर काबुल सहित समूचे अफगानिस्तान की संस्थाओं के खिलाफ हमले की योजनाओं में शामिल था। वह अफगान नागरिकों, सुरक्षा बलों, अमेरिकी कर्मचारियों और गठबंधन सहयोगियों के लिए खतरा था। मंसूर अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच सुलह कायम करने में बाधा था। वह तालिबान नेताओं को अफगानिस्तान सरकार के साथ शांति वार्ताओं में हिस्सा लेने से रोकता था।

अफगानिस्तान में जन्मा मंसूर 1990 में समूह के शुरू होने के समय से ही तालिबान का सदस्य था। वह उन पहले तालिबान लड़ाकों के दस्ते में शामिल था जिन्होंने 90 के दशक में कंधार पर और फिर काबुल में मुजाहिद्दीन पर हमला किया था। उसने बीते साल जुलाई में मुल्ला मोहम्मद उमर की जगह अफगान तालिबान की कमान संभाली थी। मुल्ला उमर की मौत और मंसूर के कमान संभालने के बाद तालिबान ने कई हमले अंजाम दिए, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई।
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