सिर कलम करने वालों को 'माफी'

बीबीसी हिंदी Updated Fri, 25 Jan 2013 10:20 AM IST
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mother forgives saudi beheading

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एक मां ने उन लोगों को माफ कर दिया है जिनकी मांग पर उनकी बेटी का सिर कलम कर दिया गया।
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बतौर सजा सिर कलम करने की ये घटना सऊदी अरब की है जहां श्रीलंका की ये लड़की घरेलू कर्मचारी के तौर पर काम करती थी। उसे एक शिशु की हत्या का दोषी पाया गया था।

जिसे सजा मिली, उस लडकी का नाम रिजाना है और साल 2005 में जब शिशु की हत्या हुई थी, तब उसकी उम्र महज 17 साल थी। दस्तावेज उसकी उम्र की पुष्टि करते हैं। रिजाना की मां रफीना नफीक का कहना है कि उनकी बेटी निर्दोष थी और उसे बिना किसी जुर्म के सजा मिली।


वहीं सऊदी सरकार का कहना है कि रिजाना को माफ नहीं किया जा सकता था, क्योंकि बच्चे के माता-पिता उसके लिए सजा चाहते थे। इस पूरे मामले में एक पेंच ये रहा कि दस्तावेजों के मुताबिक रिजाना की उम्र शिशु की हत्या के समय केवल 17 वर्ष थी और उसे मौत की सज़ा देना बाल-अधिकारों का उल्लंघन है।

माफ कर दिया
श्रीलंका में रहने वाली रफीना कहती हैं कि उन्होंने बच्चे के माता-पिता को माफ कर दिया है जिन्होंने उनकी बेटी के लिए मौत की सजा मांगी थी। रफीना ने बीबीसी के आजम अमीन से कहा कि किसी को दोष देने का कोई मतलब नहीं है। रिजाना अब जा चुकी है।

वे कहती हैं कि रिजाना को मौत की सजा दिए जाने के बारे में हमें मीडिया के जरिए पता चला। सऊदी अधिकारियों को हमें कम से कम इस बारे में बताना तो चाहिए था। यहां तक कि उन्होंने रिजाना का शव श्रीलंका भेजने से भी इनकार कर दिया। रिजाना के परिवार ने अपनी बेटी की बारे में कोई खबर पाने के लिए आठ वर्ष तक इंतजार किया।

पासपोर्ट और उम्र का पेंच
रिजाना की मां नफीक ने अपने जैसे और परिवारों से अनुरोध किया है कि वे अपनी बच्चियों को घरेलू काम करने के लिए सऊदी अरब या कहीं भी ना भेजें। वे कहती हैं कि इसके बजाए बेहतर होगा कि अपने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया जाए।

कोलम्बो स्थित बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेवीलैंड के मुताबिक, ऐसा प्रतीत होता है कि रिजाना को जब काम के लिए सऊदी अरब भेजा गया था, तब पासपोर्ट पर उसकी गलत उम्र 23 वर्ष बताई गई। वे कहते हैं कि अन्य मौलिक दस्तावेजों में रिजाना की आयु 17 वर्ष बताई गई है और इस हिसाब से वो बच्ची थी।

सऊदी अरब में हुआ ये था कि रिजाना जिस शिशु की देखभाल करती थी, उसकी किसी दुर्घटना की वजह से मौत हो गई थी, लेकिन अदालत ने पाया कि उसकी मौत गला घोंटने से हुई थी।

वहीं मानवाधिकार समूहों का कहना है कि रिज़ाना पर चला मुक़दमा एक दिखावा भर था क्योंकि उसे किसी अनुवादक और वकील तक की सेवा मुहैया नहीं कराई गई थी।

मुआवजे से इनकार
रिजाना की मां नफीक ने अपनी बेटी की मौत के बदले सऊदी अरब की ओर से मुआवजे की पेशकश को ये कहते हुए सार्वजनिक रूप से ठुकरा दिया कि वे उस मुल्क से कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगी जिसने उनकी बच्ची को मार डाला।

बहरहाल, श्रीलंका के राष्ट्रपति ने पीड़ित परिवार को फॉरेन एम्प्लॉयमेंट ब्यूरो के जरिए 7,800 डॉलर की मदद प्रदान की है। बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक, रिजाना की मां नफीक चाहती हैं कि लड़कियां काम करने के लिए विदेश नहीं जाएं और वे ये जानती हैं कि ये बदलाव एकदम से नहीं होगा।

अभी इसी हफ्ते दो लड़कियों को उस समय तब पकड़ा गया था जब वे सऊदी अरब जाने की कोशिश कर रही थीं। वहीं सरकार का कहना है कि वह विदेश जाकर काम करने के मामले में आयु सीमा बढ़ाकर 25 वर्ष करने के लिए एक नया कानून लाना चाहती है।

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