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विपक्षी नेताओं से मिलेंगे मोर्सी, तनाव जारी

Fri, 07 Dec 2012 05:15 PM IST
Updated Fri, 07 Dec 2012 05:15 PM IST
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Morsi meet with opposition leaders
मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी ने कहा है कि वो अपने देश में जारी राजनीतिक गतिरोध को खत्म करने के लिए शनिवार को विपक्षी नेताओं से मिलेंगे।
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मिस्र में संविधान के मसौदे और राष्ट्रपति मोर्सी के नए अधिकार ग्रहण करने का व्यापक विरोध हो रहा है।

राष्ट्र के नाम संबोधन में मोर्सी ने कहा कि उनकी जिन नई शक्तियों से संबंधित घोषणा को लेकर विरोध हो रहा है, उसमें विपक्षी नेताओं से बातचीत करने के बाद बदलाव किए जा सकते हैं।

गुरुवार को भी देश के अलग अलग हिस्सों में मोर्सी के समर्थकों और विरोधियों ने प्रदर्शन किए।

तनाव बरकरार


इस बीच काहिरा में मुस्लिम ब्रदरहुड के मुख्यालय पर हमला होने की खबर है। मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रवक्ता ने बताया कि गुस्साए लोगों ने मुख्यालय की इमारत को आग लगा दी।
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इससे पहले बुधवार को दोनों पक्षों की झड़पों में पांच लोग मारे गए थे और 644 घायल हो गए। मुर्सी ने हालिया हिंसा में हुई मौतों पर दुख जताया है।

उधर गुरुवार को सेना ने राष्ट्रपति भवन के आसपास टैंक और हथियारबंद सैन्य वाहनों के तैनात कर दिया।

काहिरा में तनाव बढ़ा

मिस्र में सुरक्षा बलों ने राष्ट्रपति भवन के बाहर वाले इलाके को कांटेदार तारों से सील कर दिया है। प्रदर्शनकारियों से वहां से चले जाने के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं।
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मोर्सी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने का अधिकार है, लेकिन ये आरोप भी लगाया कि भाड़े के कुछ हिंसा फैला रहे हैं।

मोर्सी ने अपने संबोधन में सरकार विरोधियों पर बल प्रयोग को उचित ठहराया।

'मोर्सी पर दबाव'


मोर्सी ने कहा कि संविधान के मसौदे पर इस महीने की 15 तारीख को जनमतसंग्रह होने के बाद उनकी नई शक्तियों को खत्म कर दिया जाएगा, भले ही जनमत संग्रह का नतीजा कुछ भी हो।

राष्ट्रपति ने कहा कि अगर संविधान के मसौदे के लिए जनमत संग्रह में मंजूरी नहीं मिली तो दूसरा संविधान सभा का गठन किया जाएगा।

इस बीच मिस्र की सर्वोच्च इस्लामी संस्था ने राष्ट्रपति मोर्सी से अपील की है कि वो अपने नए असीमित अधिकारों को निलंबित कर दें।

काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन लिन का कहना है कि सुन्नी इस्लामी जगत के सबसे सम्मानित संस्थानों में से एक अल-अजहर के बयान के बाद मुर्सी पर दवाब आया है। लेकिन ये अब भी साफ नहीं है कि मुर्सी और उनके विरोधियों के बीच किस तरह का समझौता हो सकता है।

मोर्सी कट्टरपंथी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य रहे हैं और माना जाता है कि इस संगठन की वजह से उन्हें राष्ट्रपति पद मिला है।

राष्ट्रपति मोर्सी ने 22 नवंबर को नई शक्तियां ग्रहण की जिनके बाद न्यायापालिक भी उनके फैसलों को चुनौती नहीं दे पाएगी।

टकराव


सेना राजधानी काहिरा में टैंक तैनात कर रही है

जून में बेहद कम अंतर से राष्ट्रपति चुनाव जीतने वाले मोर्सी का कहना है कि एक बार देश के नए संविधान का अनुमोदन होने के बाद वो अपनी नई शक्तियों को त्याग देंगे।

लेकिन नए प्रस्तावित संविधान को लेकर भी विवाद हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि संविधान के मसौदे को तुरत फुरत संसद से पास करा लिया गया और इसके लिए जरूरी सलाह मशविरा नहीं किया गया है।


उनके अनुसार इस मसौदे में राजनीतिक और धार्मिक स्वतंत्रता और महिला अधिकारों के संरक्षण लिए आवश्यक उपाय नहीं किए दिए हैं।

वहीं सरकार का कहना है कि विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद इस मसौदे पर इस महीने जनमत संग्रह होगा। मसौदे को ऐसी समिति ने तैयार किया है जिसमें मोर्सी समर्थकों का दबदबा है।

वैसे अब तक खुद मोर्सी के चार सलाहकार इस्तीफा दे चुके हैं।

उधर संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लै ने कहा है कि शांतिपूर्वक विरोध जताने के प्रदर्शनकारियों के अधिकार का सम्मान होना चाहिए।

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