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जब खाने में परोसा गया चूहे का गोश्त...

Mon, 13 May 2013 06:43 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 13 May 2013 06:43 PM IST
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meat of rat

चीन में शायद ही कोई ऐसा दिन होता हो जब वहाँ खाने की गुणवत्ता को लेकर पैदा हुआ विवाद मीडिया में सुर्खियां न बटोरता हो। ताज़ा मामला भेड़ के गोश्त की जगह चूहे का गोश्त परोस देने से जुड़ा है।

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इस मामले में अब तक सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया गया है।

खान-पान के सामान में इस तरह की धांधली को लेकर उपभोक्ताओं का भरोसा कुछ कम हुआ है और देश में खान-पान की गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

इस विवाद ने चूहे और गिलहरी जैसे जानवरों को भोजन के रूप में परोसे जाने से जुड़ी अफवाहों को हवा दी है।

मैंने सुना है कि दक्षिणी चीन में एक रेस्तरां है जो चूहे के मांस वाले व्यंजन परोसता है। लेकिन हकीकत यह है कि ऐसे कई ठिकाने चीन में मौजूद हैं।

गुणवत्ता को लेकर चिंता
जिस रेस्तरां में चूहे का गोश्त परोसे जाने की शिकायत मिली है, उसके मालिक ने अपने ग्राहकों को दिलासा देते हुए कहा कि उनके यहाँ जिन चूहों का गोश्त बनाया गया, वे गांवों से लाए गए थे न की किसी नाले से।
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यह बात भले ही सच हो या न हो। लेकिन इसने आम लोगों में खाने की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

जब आप किसी सस्ते रेस्तरां या सड़क किनारे के किसी दुकान पर खाते हैं तो, आपके मन में हमेशा या शंका बनी रहती है कि आपने ऐसा कुछ खाया है, जिसका आपने आर्डर नहीं दिया था।
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अभी हाल में मेरी पत्नी एक रेस्तरां में लंच करने गई। वहां उन्हें जो सूप परोसा गया, उसमें पत्थर के टुकड़े मिले। यही नहीं उनके मुख्य खाने में बर्तन धोने वाले ब्रश के टुकड़े मिले।

जब मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने इसकी शिकायत क्यों नहीं की, तो उन्होंने कहा कि वह अपने मित्रों के खाने को ख़राब नहीं करना चाहती थी।

हालांकि बिडंबना यह है कि चीन में लोग अब पहले की तुलना में ज्यादा खाने लगे हैं। लेकिन खाने की गुणवत्ता पहले जैसी ही है। पहले यहाँ मोटापे के बारे में कभी-कभार ही सुना जाता था। लेकिन अब वह एक मुद्दा बन गया है।

सबसे बड़ा पलायन
यहाँ मानव सभ्यता के इतिहास का सबसे बड़ा पलायन हो रहा है। चीन के उल्लेखनीय आर्थिक विकास को गति देने के लिए लाखों-करोड़ों लोग गांवों से शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।

खेतों से कारखानों की ओर हो रहे पलायन की वजह से पिछले कुछ दशकों में चीन की शहरी आबादी में खाने की आपूर्ति करने वाली चेन का विस्तार हुआ है। यहाँ खाद्य उद्योग की हालत बहुत ही ख़राब है।

सब्जियों की अधिक पैदावार के लिए किसान कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं, जानवरों से अधिक दूध निकालने के लिए उन्हें स्टेरॉयड दिया जा रहा है तो भ्रष्ट अधिकारी रिश्वत लेकर खराब खाद्य पदार्थ को सुरक्षित बता दे रहे हैं।

ऐसे में यह थोड़ा आश्चर्यचकित भी करता है कि लोग खाने की गुणवत्ता को लेकर लोग चिंतित हैं।

एक सप्तहांत मैं कुछ ऐसे शहरी युवाओं से मिला जो पार्ट टाइम किसान हैं। उनमें से कुछ पीआर का काम करते हैं, तो कुछ अध्यापक तो कुछ कंप्यूटर प्रोग्रामर।

वे राजधानी के बाहरी इलाक़े में स्थित एक खेत में जातें हैं, अपने आईफोन को किनारे रख कर कुदाल थाम लेते हैं। वे ऑर्गेनिक खेती करते हैं।

पसीने से लथपथ इन युवाओं ने बताया कि सप्ताहांत में वे उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए काम करते हैं। हालांकि सबके लिए अपने खेतों की ओर लौट पाना संभव नहीं है। इसलिए चीनी मध्यवर्ग और बहुत से विदेशी अपने खाने का गोश्त ऑस्ट्रेलिया और दूध न्यूजीलैंड से खरीदते हैं।

मिलावटी दूध
मिलावटी खाद्य पदार्थ का मामला 2008 के मिलावटी दूध के मामले से बड़ा मामला बनता जा रहा है। उस समय मिलावटी दूध पीने की वजह से हज़ारों बच्चे बीमार पड़ गए थे।

उस समय अधिकारियों ने इस मामले को दबा दिया था। वे नहीं चाहते थे कि बीजिंग ओलंपिक से पहले ख़राब ख़बरें सुर्खियाँ बनें।

इससे लोगों का आक्रोश फूट पड़ा था। उन्हें लगता था कि यह विश्वास का मामला है। अगर अधिकारी ही उनके बच्चों पर ध्यान नहीं देंगे, तो उनकी रक्षा कौन करेगा।

मिलावटी दूध के मामले के बाद अधिकारियों ने वादा किया था कि वे खाद्य आपूर्ति चेन की साफ-सफाई के लिए कड़े क़दम उठाएंगे। कुछ मामलों में मौत की सज़ा भी सुनाई गई।


लेकिन देश में फैले भ्रष्टाचार और शिथिल क़ानून व्यवस्था की वजह से लोग जब भी खाना खाते हैं वे अपनी थाली की ओर देखते जरूर हैं।

ऐसा नहीं है कि इस समस्या से देश के नेता चिंतित नहीं है। चीन के नेता अपने खान-पान को लेकर काफी सतर्क रहते हैं।

कुछ दिन पहले ही यहाँ के एक अख़बार में ऐसी खबर छपी थी कि यहाँ कुछ विशेष खेत हैं, जहाँ राष्ट्रीय नेताओं के लिए विशेषतौर पर मछलियां, सूअर और मुर्गे-मुर्गियां पैदा की जाती हैं। यह ख़बर बहुत देर तक ऑनलाइन नहीं रह पाई थी।

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