फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   mass evacuation as cyclone nears bangladesh

बांग्लादेश, बर्मा, भारत में तूफान का खतरा

Thu, 16 May 2013 02:15 AM IST
Updated Thu, 16 May 2013 02:15 AM IST
विज्ञापन
mass evacuation as cyclone nears bangladesh

चक्रवाती तूफान महासेन की आशंका को देखते हुए बांग्लादेश के तटीय इलाकों से लाखों लोगों को हटाया जा रहा है। 10 लाख से ज़्यादा लोग अपने घर छोड़कर जा रहे हैं।

विज्ञापन


संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय के मुताबिक तूफान कमज़ोर पड़ रहा है लेकिन फिर भी इसे बांग्लादेश, बर्मा और पूर्वोत्तर भारत के 82 लाख लोगों के लिए खतरा माना जा रहा है।
विज्ञापन


पांच साल पहले आए तूफान नर्गिस में बर्मा में एक लाख से ज़्यादा लोग मारे गए थे।

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक असम, मिज़ोरम, मणिपुर, त्रिपुराऔर नागालैंड में आज और कल बारिश होगी। ये भी कहा गया है कि आंध्रप्रदेश, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में तेज़ी हवाएं चलेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन राज्यों में मछुआरों को आगाह रहने की सलाह दी गई है।

माना जा रहा है कि गुरुवार सुबह ये तूफान बांग्लादेश के तटीय इलाकों में आकर टकराएगा। स्वंयसेवी कार्यकर्ता लोगों की अस्थाई शिविरों में मदद कर रहे हैं।लेकिन चिंता जताई जा रही है कि सभी लोगों को इनमें जगह नहीं मिल पाएगी।

बांग्लादेश में अधिकारियों ने चटगांव और कॉक्स बाज़ार के निचले इलाकों में खतरे का स्तर बढ़ा कर सात कर दिया है। ये तूफान बंगाल की खाड़ी से होता हुआ उत्तर पूर्व की ओर बढ़ रहा है।

बांग्लादेश के मौसम विभाग के मुताबिक तूफान से तटीय इलाकों में दो मीटर लंबी लहरें उठ सकती हैं। खतरा कम होने तक चटगांव और कॉक्स बाज़ार के हवाईअड्डे बंद कर दिए गए हैं।

बर्मा में भी खतरा
बर्मा भी इस तूफान की चपेट में आ सकता है और बड़ी संख्या में लोग इलाके खाली कर रहे हैं। पहले से ही विस्थापित हज़ारों रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर खासतौर पर चिंता जताई जा रही है।

इनमें बहुत से लोग अपने शिविरों को छोड़कर नहीं जाना चाहते और कह रहे हैं कि उन्हें स्थानीय अधिकारियों पर भरोसा नहीं है।

पिछले साल हुई जातीय हिंसा के बाद रोहिंग्या मुसलमानों को अपना घर छोड़ना पड़ा था।

बर्मा में मंगलवार को 50 रोहिंग्या मुसलमानों के डूब कर मर जाने की आशंका है। इन लोगों को नाव के ज़रिए सुरक्षित इलाके में ले जाया जा रहा था लेकिन नाव डूब गई।

मला माउंग कहते हैं कि मुस्लमानों और बौद्धों के बीच हुई झड़पों में मैने अपनी मां और दोनों बेटियों को खो दिया। मैं अब कहीं और नहीं जाना चाहता। अगर मैं मरूंगा तो मैं यहीं मरना चाहता है।


बर्मा के राष्ट्रीय योजना विभाग के मंत्री टिन नियांग श्वेन ने कहा है कि एक लाख पचास हज़ार लोगों को ऊंचाई वाले इलाकों में ले जाया गया है। सरकार के मुताबिक इनमें रोहिंग्या भी शामिल हैं।

श्रीलंका में ये तूफान नहीं पहुंचा है लेकिन बारिश के कारण वहां बाढ़ से सात लोग मारे जा चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed