फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   maldives hopes scrapped gmr deal will not impact ties

भारतीय कंपनी को मालदीव सरकार का झटका

Wed, 28 Nov 2012 06:40 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Wed, 28 Nov 2012 06:40 PM IST
विज्ञापन
maldives hopes scrapped gmr deal will not impact ties

मालदीव सरकार ने अपने सबसे बड़े विदेशी निवेश क़रार को रद्द करते हुए भारतीय कारोबारी समूह जीएमआर को सात दिन के अंदर मालदीव से अपना काम समेटने को कहा है।

विज्ञापन


जीएमआर ने मालदीव की राजधानी में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने का अनुबंध हासिल किया था और जिसके तहत कंपनी मालदीव में करीब 2555 करोड़ रुपए का निवेश कर रही थी।
विज्ञापन


जीएमआर समूह ने यह अनुबंध विश्व बैंक की निगरानी में जारी टेंडर के दौरान 2010 में हासिल किया था। इस अनुबंध के समय मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद थे। इस प्रोजेक्ट में जीएमआर समूह और मलेशियाई एयरपोर्ट्स होल्डिंग बराबरी के साझीदार हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन मौजूदा राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद ने कहा है कि यह अनुबंध ठीक नहीं था क्योंकि इसमें प्रत्येक नागरिक से एयरपोर्ट विकास शुल्क के नाम पर 25 डॉलर वसूले जा रहे थे, जिसकी इजाजत संसद ने नहीं दी है।

मालदीव सरकार ने अब जीएमआर समूह को सात दिन के अंदर देश के भीतर अपनी गतिविधियों को बंद करने का आदेश देते हुए कंपनी के साथ समझौता रद्द कर दिया है। मालदीव के एटॉर्नी जनरल अजिमा शुकूर का कहना है कि समझौते के तहत जीएमआर को देश छोड़ने के लिए 30 दिनों का नोटिस देना जरूरी थी, लेकिन अब समझौता ही रद्द हो गया तो उसकी कोई बाध्यता नहीं है।

भारत- मालदीव रिश्तों पर असर
जीएमआर समूह ने मालदीव सरकार के इस फैसले को एकतरफा और तर्कहीन बताया है। जीएमआर समूह ने एक प्रेस रिलीजजारी करके कहा है कि हम अपने कर्मचारियों और अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठा रहे हैं।

मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने समाचार एजेंसी रायटर को बताया है कि यह राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद की नाकामी है। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति के प्रवक्ता इमाद मसूद ने समाचार एजेंसी रायटर को बताया कि राष्ट्रपति के निर्देश के मुताबिक कैबिनेट ने यह अनुबंध रद्द कर दिया है क्योंकि वह अनुबंध वैध नहीं था।

मालदीव सरकार के इस कदम से देश के अंदर विदेशी निवेश के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मालदीव में विदेश निवेशकों के हितों को लेकर भी आशंका बढ़ गई है। बीते साल राजनीतिक उठापठक झेलने के बाद मालदीव को अभी कई पर्यटन योजानाओं में विदेशी निवेश की जरूरत है।

मालदीव सरकार के इस फ़ैसले से भारत और मालदीव के आपसी रिश्तों पर भी असर पड़ने की आशंका है। भारत सरकार ने इस मामले में कहा है कि वह मालदीव में रह रहे भारतीय परिवारों की सुरक्षा और हितों के जरूरी कदम उठाएगा।


भारत सरकार ने ये उम्मीद भी जताई है कि मालदीव इस अनुबंध के सिलसिले में सभी जरूरी और कानूनी प्रक्रिया को पूरा करेगा। भारत ने मालदीव सरकार को यह संदेश भी भेजा है कि उनके इस कदम से अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर गलत असर जाएगा।

भूतपूर्व राष्ट्रपति नशीद ने इस अनुबंध के रद्द किए जाने पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि मोहम्मद वहीद देश को आर्थिक बर्बादी की ओर ले जा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed