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मालदीव ने चीन को दिया झटका, खत्म करेगा मुक्त व्यापार करार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 20 Nov 2018 05:38 AM IST
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india china
- फोटो : PTI
मालदीव की नई सरकार ने चीन के साथ मुक्त व्यापार करार (एफटीए) को ‘बड़ी गलती’ बताते हुए इससे बाहर निकलने का फैसला किया है। इसे मालदीव में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है। इस घोषणा के साथ भारत अपने पड़ोसी देश में कूटनीतिक और रणनीतिक तौर पर मजबूत पकड़ बनाता दिख रहा है।
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सत्ताधारी गठबंधन का नेतृत्व करने वाली मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) के मुखिया मोहम्मद नशीद ने सोमवार को कहा, ‘चीन और मालदीव में व्यापार असंतुलन काफी ज्यादा है। चीन हमसे कुछ भी नहीं खरीदता है, यह एकतरफा करार है। ऐसे में कोई भी मुक्त व्यापार के बारे में नहीं सोच सकता है।’
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गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने पिछले साल दिसंबर में बीजिंग दौरे के दौरान चीन के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर किए थे। उसी महीने सरकार ने विपक्ष के विरोध के बावजूद इस प्रस्ताव का संसद से पारित करा लिया था।
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इस साल चुनावों में मिली हार के बाद चीन समर्थक यामीन सत्ता से बाहर हो गए थे। नशीद ने कहा कि भले ही प्रस्ताव को संसद से अनुमोदित किया गया था, लेकिन इसमें कई संशोधन होने बाकी हैं और हम इसे पारित नहीं होने देंगे। एफटीए से बाहर निकलने पर चीन की फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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चीन से व्यापार घाटे का सौदा
मालदीव के सीमा शुल्क विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अगस्त के बीच मालदीव ने चीन से 34.2 करोड़ डॉलर का आयात किया है, जबकि महज 2 लाख 65 हजार डॉलर का निर्यात किया है। जो दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को दर्शाता है। अगर भारत के साथ व्यापार की बात करें तो इस अवधि के दौरान मालदीव ने 19.4 करोड़ डॉलर का आयात किया, जबकि 18 लाख डॉलर का निर्यात किया।
भारी कर्ज से संकट में देश: सालेह
नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सालेह ने शनिवार को कार्यभार संभालने पर पिछली सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि यामीन सरकार ने देश के खजाने को लूटा है। देश चीन से भारी कर्ज लेने के कारण ही संकट के दौर से गुजर रहा है।