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बांग्लादेश में 'देशद्रोही' संपादक गिरफ्तार
Updated Fri, 12 Apr 2013 09:05 AM IST
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बांग्लादेश में विपक्षी दलों के समर्थक संपादक महमुदुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर 'देशद्रोह' का आरोप लगाया गया है। वो विपक्षी दलों का समर्थन करने वाले अखबार ‘अमर देश’ के संपादक हैं।
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महमुदुर रहमान को ढाका में पुलिस ने एक तलाशी अभियान के बाद गिरफ्तार किया है।
उन पर आरोप है कि उन्होंने अखबार में एक गैरकानूनी बातचीत प्रकाशित की थी जिसके बाद युद्ध अपराध के लिए बने ट्रिब्यूनल के प्रमुख जज को इस्तीफा देना पड़ा था।
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सरकार ने ‘अमर देश’ पर हिंसा भड़काने का भी आरोप लगाया है। उधर, उनकी गिरफ्तार के विरोध में इस्लामी संगठनों ने एक विरोध प्रदर्शन का भी आयोजन किया है। इस्लामी संगठनों ने उन्हें “इस्लाम का सच्चा और साहसी सिपाही” करार दिया है।
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ढाका की अदालत ने रहमान को 13 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। ढाका पुलिस के प्रवक्ता ने कहा, “हमने रहमान को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ दिसंबर में एक केस दर्ज किया गया था। और हमनें उन्हें उसी केस के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार किया है।”
हिंसा को बढ़ावा
पुलिस के मुताबिक संपादक के आरोप है कि उन्होंने “झूठी सामग्री प्रकाशित की जिससे धार्मिक तनाव फैला।”
आवामी लीग सरकार का आरोप है कि रहमान ने उनके अखबार में ऐसी सामग्री प्रकाशित की है जिससे युद्ध अपराधों की जांच के लिए बने ट्रिब्यूनल के खिलाफ राजनीतिक विरोध-पदर्शन को बढ़ावा मिला।
ट्रिब्यूनल का मकसद 1971 में हुए युद्ध अपराधों की जांच करना था। बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई के समय बहुत से लोगों ने पाकिस्तान का साथ दिया था और उन लोगों पर जुल्म ढाए थे जो आजादी के समर्थक थे। इसी की जांज करने के लिए ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था।
शेख हसीना के नेतृत्व वाली आवामी लीग सरकार के गृह राज्य मंत्री शमसुल हक ने स्थानीय मीडिया से कहा,“रहमान ने मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है जिसे किसी भी तरीके स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनकी गिरफ्तारी कानून स्थापित करने के लिए की गई है।”
पिछले साल दिसंबर में युद्ध अपराधों की जांच के लिए बने ट्रिब्यूनल के जज ने “निजी कारणों” का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। माना जाता है कि इसकी वजह उस जज की बेल्जियम में बसे एक बांग्लादेशी वकील से की गई निजी बातचीत का प्रकाशित हो जाना है।
विपक्ष का आरोप है कि उस जज ने बांग्लादेश की छवि खराब की है जबकि सरकार का कहना है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है। जानबूझकर उसकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।