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इस कारण से उत्तर कोरियाई मैराथन में कम क्यों पहुंचे विदेशी एथलीट
बीबीसी, हिंदी
Updated Mon, 09 Apr 2018 04:40 PM IST
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उत्तर कोरिया के प्योंगयांग में होने वाली सालाना मैराथन में इस साल भी सैकड़ों विदेशी शामिल हुए, लेकिन विदेशी धावकों की संख्या पिछले साल की तुलना में आधी ही रही। माना जा रहा है कि अमरीका की ओर से लगाए गए ट्रैवल बैन और परमाणु युद्ध के खतरे के चलते इस बार पश्चिमी देशों के धावक कम पहुंचे। रविवार को संपन्न हुई इस मैराथन कुल 429 विदेशी धावकों ने हिस्सा लिया जबकि 2017 में विदेशी धावकों की संख्या 1000 थी। ये मैराथन किम द्वितीय सुंग स्टेडियम से शुरू हुई और किंम द्वितीय सुंग स्क्वायर पर खत्म हुई।
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इस मैराथन के विजेता उत्तर कोरियाई धावक री कांग बूम रहे, जिन्होंने दो घंटे, 12 मिनट और 53 सेकेंड में रेस को पूरा किया। री ने रेस जीतने के बाद कहा, "मुझे इस बात की खुशी है कि मैं लोगों की उम्मीद पर खरा उतरा।" पुरुषों के वर्ग में अफ्रीकी देशों के 13 एथलीट शामिल हुए। वहीं महिला वर्ग का खिताब उत्तर कोरिया की ही हेम ग्यांग ने जीता, जिन्होंने दो घंटे, 27 मिनट और 24 सेकेंड का समय निकाला। उनकी जुड़वां बहन किम हे सोंग इस रेस महज कुछ ही सकेंड उनसे पीछे रहीं।
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इस साल की रेस को एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल मैराथन्स एंड डिस्टेंस रेसेज के साथ साथ इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एथलेटिक फ़ेडरेशन एक्रीडिटेड से मान्यता मिली हुई थी। उत्तर कोरिया में ये समय विदेशी सैलानियों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस मौसम में आम तौर पर पश्चिमी देशों से करीब 5000 लोग उत्तर कोरिया पहुंचते हैं जिसमें 20 फीसदी हिस्सा अमेरिकी पर्यटकों का होता है। ये मैराथन हर साल उत्तर कोरिया के संस्थापक किम-द्वितीय सुंग के जन्मदिन के जश्न के तौर पर आयोजित की जाती है।
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