दूसरे देश में शादी करना मुसीबत का सबब?
- ब्रिटानी कानून ने पति-पत्नी को किया दूर
- नागरिकता की परेशानी से नौकरी भी नहीं देता कोई
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कहते हैं जोड़ियां आसमान में बनती हैं। शादी का पवित्र बंधन ऊपरवाला तय करता है। लोग खुशी-खुशी शादी करते हैं। फिर क्या वजह है कि उनके साथ रहने में हजार मुसीबतें आड़े आती हैं। ये दिक्कत उन लोगों को खास तौर से होती है जो दूसरे देश के लोगों से शादी करते हैं।
आज ग्लोबलाइजेशन का दौर है। बहुत से लोग अपना वतन छोड़कर दूसरे देश जाकर काम कर रहे हैं। वहां बहुत से लोगों को अपने जीवनसाथी मिल जाते हैं। शादी होने तक तो लगता है कि कोई दिक्कत नहीं। लेकिन, शादी होते ही साथ रहने की राह में रोड़े खड़े होने लगते हैं। आज के दौर में जब दुनिया इंटरनेट के जरिए एक दूसरे के करीब आती जा रही है। तो, बहुत से लोग ऐसे हैं जो दूसरे देश के नागरिकों से शादी कर रहे हैं।
अब ऐसी शादियां, सरकारों के लिए परेशानी खड़ी कर रही हैं। वो लोगों की आमद बढ़ने के डर से सख्त कानून बना रहे हैं। ताकि लोग शादी की आड़ में उनके देश में न घुस आएं। क्योंकि फिर उन्हें नागरिकता देनी होगी। उनके लिए बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम करना होगा। 2010 में तीस देशों के जो आंकड़े जुटाए गए थे उनके मुताबिक यूरोप में हर बारहवीं शादी ऐसी हो रही है जिसमें दो अलग मुल्कों के नागरिक इस बंधन में बंध रहे हैं।
स्विटजरलैंड में ये आंकड़ा पांच में से एक शादी का है। वहीं ब्रिटेन में हर ग्यारह में से एक शादी ऐसी हो रही है। ऑस्ट्रेलिया में तो हर तीसरी शादी ऐसी हो रही है। सिंगापुर में 2014 में दो अलग देशों के नागरिकों के बीच शादी का आंकड़ा 37 फीसद पहुंच चुका है। 2003 में ये आंकड़ा 23 फीसद था। इसके अलावा अमेरिका में 21 फीसद शादियां ऐसी होती हैं जिनमें जोड़े का एक सदस्य अमेरिका के बाहर का होता है।
ब्रिटानी कानून ने पति-पत्नी को किया दूर
सिंगापुर की पत्रकार किर्स्टेन हान अपने पति कैलम स्टुअर्ट से ब्रिटेन में पढ़ाई के दौरान मिली थीं। उन्होंने 2014 में शादी कर ली और स्कॉटलैंड में बस गए। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि क्या मुसीबत आने वाली है। उन्हें आज पति से दूर अपने देश सिंगापुर में रहना पड़ रहा है। वो बताती हैं कि शादी से पहले सब लोग कहते थे कि कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन ब्रिटेन के साल 2012 के एक कानून की वजह से आज पति-पत्नी को अलग रहना पड़ रहा है।
इस कानून के मुताबिक, गैर मुल्की से शादी करने वाले ब्रिटिश नागरिक को अपने साथी की गारंटी देनी होगी कि उसकी सालाना आमदनी कम से कम 18 हजार छह सौ पाउंड होगी। अगर बच्चे होंगे तो आमदनी की ये गारंटी मनी और बढ़ जाएगी। आज इस कानून की वजह से बहुत से शादी-शुदा जोड़े साथ रहने के बजाय स्काइप पर रिश्ते निभा रहे हैं। ब्रिटेन में परेशानी हुई तो हैन और स्टुअर्ट ने सिंगापुर में बसने की सोची। वहां गैरमुल्की जीवन साथी को एक साल साथ काम करने की इजाजत आसानी से मिल जाती है। मगर इससे भी हैन की मुश्किल हल नहीं हुई। वो सवाल करती हैं कि मुझे अपने पति के साथ रहने में क्यों इतनी दिक्कत है।
ब्रिटेन की ब्रिस्टॉल यूनिवर्सिटी की कैथरीन चार्सले कहती हैं कि आज सरकारें इन गैर मुल्की शादियों से फायदा उठाने की सोचती हैं। वो चाहती हैं कि लोग बाहर से आकर बसें तो देश का भला हो। वो देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ न बनें। वहीं जो लोग अपने लिए दूसरे देश के जीवनसाथी चुनते हैं वो दिल का फैसला होता है। सरकारों का नजरिया इससे अलग है। यूरोपीय देश हॉलैंड ने बाहर से आकर बसने वालों के लिए एक इम्तिहान तय किया है। जिसमें बाहरी लोगों को डच भाषा जानने का टेस्ट पास करना होता है। इसी तरह का अंग्रेजी का इम्तिहान ब्रिटेन भी लेता है। डेनमार्क में बाहर से आकर बसने वालों को डेनमार्क के प्रति अपना लगाव साबित करना होता है।
नागरिकता की परेशानी से नौकरी भी नहीं देता कोई
अमेरिका में तो अभी बाहर से आकर लोगों के बसने का मामला बड़ा चुनावी मुद्दा बना हुआ है। यहां पर गैरमुल्की से शादी करने पर बाहरी शख्स को तमाम तरह के कागजात जमा करने होते हैं। ताकि वो ये साबित कर सकें कि उनकी शादी जायज है। फिर उन्हें अस्थायी रूप से रहने का ग्रीन कार्ड मिलता है। कुछ साल बिताने के बाद उन्हें अमेरिका की नागरिकता मिलती है। दूसरे देशों में शुरू में तो रहने में कोई परेशानी नहीं होती।
मगर, शादी के बाद नागरिकता हासिल करने में बरसों लग जाते हैं। जैसे कि सिंगापुर की तरह मलेशिया भी एक साल रहने की इजाजत देता है। इस दौरान डॉक्टरी और दूसरे पेशों से जुड़े लोग कारोबार शुरू करने के लिए कर्ज ले सकते हैं। रहने के लिए घर खरीद सकते हैं। लेकिन उन्हें इस बात की कोई गारंटी नहीं दी जाती कि नागरिकता मिल ही जाएगी।
भारत की बीना रामानंद, 1992 में अपने पति के साथ रहने के लिए मलेशिया गई थीं। उन्हें राजधानी क्वाला लम्पुर में नौकरी भी मिल गई। लेकिन उन्हें नागरिकता की अर्जी देने की इजाजत हासिल करने में पंद्रह साल लग गए। नागरिकता उन्हें मिली जाकर साल 2013 में। अमेरिका के रॉबर्ट पेड्रिन, 2012 में मलेशिया आए थे। वो फेसबुक पर दोस्त बनी कैरी से मिलना चाहते थे। दोनों में प्यार हो गया था। करीब छह साल के प्यार के बाद दोनों ने 2014 में शादी कर ली। लेकिन आज भी वो साल-साल भर की परमिशन की मदद से पत्नी के साथ रह रहे हैं।
नागरिकता तो बहुत दूर की कौड़ी है। फिर उन्हें नौकरी मिलने भी बड़ी दिक्कत हो रही है। नागरिकता की परेशानी देखते हुए कोई रॉबर्ट को नौकरी नहीं देना चाहता। हालांकि रॉबर्ट को अपना प्यार हासिल हो गया। इसलिए उन्हें कोई अफसोस नहीं। वो ब्लॉगिंग से अपना काम चला रहे हैं। वो कहते हैं कि प्यार को पाने के लिए उन्हें फिर ऐसी मुसीबत उठानी पड़ी तो उठाएंगे।