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ग्राउंड रिपोर्ट: रोहिंग्या हिंदुओं की हत्या किसने की?
बीबीसी,हिंदी
Updated Tue, 21 Nov 2017 03:20 PM IST
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रोहिंग्या हिंदू
- फोटो : File Photo
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दोपहर हो चली है और सितवे हवाई अड्डे पर आधे घंटे से पुलिस वालों की पूछताछ जारी है। मैं रखाइन क्यों जाना चाहता हूं? कैमरे में क्या लेने आया हूं? मेरे पासपोर्ट में बांग्लादेश का वीजा क्यों लिया गया था ? मेरा ध्यान घड़ी पर ज्यादा है क्योंकि रखाइन की राजधानी सितवे के बाहर रोहिंग्या हिंदुओं के रेफ्यूजी कैंप पहुंचने की जल्दी है। पहुंचते-पहुंचते साढे चार बज चुके हैं, हल्की बारिश शुरू हो चुकी है और एक पुराने मंदिर के बगल में कुछ टेंट गड़े हुए हैं।
खौफ में हैं हिंदू
लेकिन नजर एक महिला पर टिक जाती है जिसकी आंखों में नमी है और जो हमें उम्मीद से देख रही है। 40 वर्ष की कुकू बाला हाल ही में मां बनी हैं और उनका बेटा सिर्फ ग्यारह दिन का है। ये रोहिंग्या हिंदू हैं और रखाइन प्रांत में इनकी आबादी दस हजार के करीब है।
कुकू बाला बात करते हुए बिलख-बिलख कर रो पड़ीं। उन्होंने कहा, "मेरे पति और मेरी आठ साल की बेटी काम के लिए दूसरे गांव गए थे। शाम को मेरी बहन के पास बंगाली आतंकवादियों का फोन आया कि दोनों की कुर्बानी दे दी गई है और हमारे साथ भी यही होगा। मुझे समझ में नहीं आया क्या करूं। घर के अंदर छिपी रही और तीन दिन बाद फौज हमें यहां लेकर आई"।
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ये भी पढ़ेंः बांग्लादेश: नसबंदी से रोहिंग्याओं की बढ़ती जनसंख्या पर लगाम लगाएगी सरकार
म्यांमार सरकार का कहना है कि मुस्लिम आतंकवादियों ने 25 अगस्त के हमले में कई हिंदुओं को मार दिया था। देश की फौज ने इसी तरह की दर्दनाक कहानियों को आधार बनाते हुए रखाइन में जारी 'कार्रवाई' को जायज ठहराने की कोशिश की है।
इस राज्य से छह लाख से भी ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान भाग कर पडोसी बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं। उन्होंने म्यांमार सरकार पर हत्याएं और बलात्कार के आरोप लगाए हैं। हिंसा की शुरुआत अगस्त में हुई थी जब मुस्लिम आतंकवादियों ने 30 पुलिस थानों पर हमला किया था। इसके जवाब में म्यांमार सरकार की कड़ी कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र ने 'नस्ली जनसंहार' बताया है।
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खौफ में हैं हिंदू
लेकिन नजर एक महिला पर टिक जाती है जिसकी आंखों में नमी है और जो हमें उम्मीद से देख रही है। 40 वर्ष की कुकू बाला हाल ही में मां बनी हैं और उनका बेटा सिर्फ ग्यारह दिन का है। ये रोहिंग्या हिंदू हैं और रखाइन प्रांत में इनकी आबादी दस हजार के करीब है।
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कुकू बाला बात करते हुए बिलख-बिलख कर रो पड़ीं। उन्होंने कहा, "मेरे पति और मेरी आठ साल की बेटी काम के लिए दूसरे गांव गए थे। शाम को मेरी बहन के पास बंगाली आतंकवादियों का फोन आया कि दोनों की कुर्बानी दे दी गई है और हमारे साथ भी यही होगा। मुझे समझ में नहीं आया क्या करूं। घर के अंदर छिपी रही और तीन दिन बाद फौज हमें यहां लेकर आई"।
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म्यांमार सरकार का कहना है कि मुस्लिम आतंकवादियों ने 25 अगस्त के हमले में कई हिंदुओं को मार दिया था। देश की फौज ने इसी तरह की दर्दनाक कहानियों को आधार बनाते हुए रखाइन में जारी 'कार्रवाई' को जायज ठहराने की कोशिश की है।
इस राज्य से छह लाख से भी ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान भाग कर पडोसी बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं। उन्होंने म्यांमार सरकार पर हत्याएं और बलात्कार के आरोप लगाए हैं। हिंसा की शुरुआत अगस्त में हुई थी जब मुस्लिम आतंकवादियों ने 30 पुलिस थानों पर हमला किया था। इसके जवाब में म्यांमार सरकार की कड़ी कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र ने 'नस्ली जनसंहार' बताया है।
सुरक्षित ठिकाने की तलाश
रोहिंग्या हिंदू
- फोटो : File Photo
महीनों से जारी हिंसा में कुकू बाला और उनके बच्चे हाशिए पर आ चुके हैं। उन्होंने कहा, "अगर मेरे पति जिंदा होते तो इस बच्चे का नाम वही रखते। मैं क्या करूं? कहां जाऊं? मेरी बेटी और पति की लाश तक नहीं मिली है। क्या उन्हें ढूंढने में आप मेरी मदद करेंगे?"
रखाइन राज्य की राजधानी सितवे में करीब सात सौ हिंदू परिवारों को एक सरकारी रेफ्यूजी कैंप में रखा गया है। मुआंग्डो और रखाइन में हिंसा भड़कने पर रोहिंग्या हिंदू कई दिशाओं में भागे थे।
सितंबर में बांग्लादेश के कुतुपालोंग इलाके में मेरी मुलाकात अनिका धर से हुई थी जो म्यांमार के फकीरा बाजार की रहने वाली हैं। पति की हत्या के बाद भागीं अनिका ने मुझे बताया था कि ये हत्या काले नकाब पहने हमलावरों ने की थी। उन्होंने हमलावरों की पहचान न होने की बात कई दफा दोहराई थी।
काफी ढूंढने के बाद यहां सितवे में मुझे अनिका के जीजा मिले जिन्होंने परिवार की हत्याओं के लिए 'बंगाली चरमपंथियों' को जिम्मेदार ठहराया।
आशीष कुमार ने बताया, "मेरी बेटी की तबीयत खराब थी इसलिए मैं उसे फकीराबाजार इलाके में अपने ससुराल छोड़ मुआंग्डो आ गया था। अनिका के पति और सास-ससुर के साथ हत्यारे मेरी बेटी को जंगल ले गए और मार डाला। जब बांग्लादेश में अनिका से संपर्क हुआ तब पता चला कि उनकी हत्या किस जगह हुई थी।"
आशीष की बेटी आठ वर्ष की थी। उन्होंने मुझे वो वीडियो दिखाए जिसको म्यांमार सरकार हिंदुओं की सामूहिक कब्र बता रही है। इसी वर्ष अगस्त में हुई इन हत्याओं के महीने भर बाद आशीष उन लोगों में शामिल थे जिन्हे फौज अंतिम संस्कार करवाने के लिए ले गई थी। अधिकारियों का कहना है कि यहां से 28 शव बरामद हुए थे।
आशीष ने कहा, "पूरे इलाके में बदबू फैली हुई थी और हमने घंटों खुदाई की। हाथ के कड़े और गले में पहनने वाले काले-लाल रेशम के धागे की वजह से मैं उसे पहचान सका।" म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची ने हाल ही में रखाइन प्रांत का दौरा कर हालात का जायजा लिया था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने रोहिंग्या संकट मामले पर उनकी लंबी चुप्पी की कड़ी निंदा की है।'
रखाइन राज्य की राजधानी सितवे में करीब सात सौ हिंदू परिवारों को एक सरकारी रेफ्यूजी कैंप में रखा गया है। मुआंग्डो और रखाइन में हिंसा भड़कने पर रोहिंग्या हिंदू कई दिशाओं में भागे थे।
सितंबर में बांग्लादेश के कुतुपालोंग इलाके में मेरी मुलाकात अनिका धर से हुई थी जो म्यांमार के फकीरा बाजार की रहने वाली हैं। पति की हत्या के बाद भागीं अनिका ने मुझे बताया था कि ये हत्या काले नकाब पहने हमलावरों ने की थी। उन्होंने हमलावरों की पहचान न होने की बात कई दफा दोहराई थी।
काफी ढूंढने के बाद यहां सितवे में मुझे अनिका के जीजा मिले जिन्होंने परिवार की हत्याओं के लिए 'बंगाली चरमपंथियों' को जिम्मेदार ठहराया।
आशीष कुमार ने बताया, "मेरी बेटी की तबीयत खराब थी इसलिए मैं उसे फकीराबाजार इलाके में अपने ससुराल छोड़ मुआंग्डो आ गया था। अनिका के पति और सास-ससुर के साथ हत्यारे मेरी बेटी को जंगल ले गए और मार डाला। जब बांग्लादेश में अनिका से संपर्क हुआ तब पता चला कि उनकी हत्या किस जगह हुई थी।"
आशीष की बेटी आठ वर्ष की थी। उन्होंने मुझे वो वीडियो दिखाए जिसको म्यांमार सरकार हिंदुओं की सामूहिक कब्र बता रही है। इसी वर्ष अगस्त में हुई इन हत्याओं के महीने भर बाद आशीष उन लोगों में शामिल थे जिन्हे फौज अंतिम संस्कार करवाने के लिए ले गई थी। अधिकारियों का कहना है कि यहां से 28 शव बरामद हुए थे।
आशीष ने कहा, "पूरे इलाके में बदबू फैली हुई थी और हमने घंटों खुदाई की। हाथ के कड़े और गले में पहनने वाले काले-लाल रेशम के धागे की वजह से मैं उसे पहचान सका।" म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची ने हाल ही में रखाइन प्रांत का दौरा कर हालात का जायजा लिया था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने रोहिंग्या संकट मामले पर उनकी लंबी चुप्पी की कड़ी निंदा की है।'
सामूहिक कब्रें
रोहिंग्या हिंदू
- फोटो : File Photo
इस बात को साबित करना बहुत मुश्किल है कि सामूहिक कब्र में मिले लोगों की हत्या किसने की थी। इस बात को भी साबित करना नामुमकिन-सा है कि इस पूरे प्रकरण में सरकार की भूमिका कितनी सही रही है।
मुश्किल से रखाइन पहुंचने के बाद उत्तरी हिस्से में जाने की हमारी तमाम गुजारिशों को सरकार ने साफ मना कर दिया। लेकिन एक बात साफ है। रोहिंग्या मुस्लिमों की तरह अपने घर और करीबी रिश्तेदार गंवाने वाले इस प्रांत के हिंदू नागरिक एकाएक बढ़ी हिंसा में पिस कर रह गए हैं।'
इसमें शक नहीं कि सरकार से मिलती मदद के चलते रोहिंग्या हिंदुओं को उनसे जोड़ कर देखा जाता है। अधिकारियों की नजरों के बीच रोहिंग्या हिंदू भी सरकारी मदद की तारीफ करते हैं। एक दोपहर, मैं अपने ऊपर नजर रखने वालों से बचते हुए कुछ रोहिंग्या हिंदुओं से मिलने गया। उन्हें खुल कर बात करने में देर नहीं लगी।
मुआंग्डो से भाग कर आए नेहरू धर ने बताया, "हम लोग डरे हुए हैं क्योंकि जो मुस्लिमों के साथ हो रहा है वो हमारे साथ भी हो सकता है। सरकार ने हमें पहचान वाले कार्ड तो दिए हैं, लेकिन वो हमें नागरिकता नहीं देती। न हमें सरकारी नौकरी मिलती हैं और न ही हम देश के सभी हिस्सों में जा सकते हैं। अगर हमने मांगें रखीं तो मुझे डर है, अगला नंबर हमारा होगा"।
खौफ हर जगह दिखता है। च्या विन रोहिंग्या मुसलमानों के हित की बात करने वाले लीडर हैं और सांसद भी रह चुके हैं। उन्हें म्यांमार सरकार के दावों पर शक है जिसमें कहा गया कि सामूहिक कब्र में मिले लोगों की हत्या मुस्लिम चरमपंथियों ने की है।
उन्होंने कहा, "रखाइन में आरसा ग्रुप से संबंधित मुस्लिम चरमपंथी अवैध हैं और गलत गतिविधियों में भाग लेते हैं। लेकिन अगर इन जघन्य हत्याओं के पीछे उनका हाथ है भी, तब भी उनके पास इतना समय कहां होगा कि वारदात के बाद कब्रें खोदें और फिर उन्हें ढकें। ये लोग हमेशा भाग रहे होते हैं और छिप रहे होते हैं।"
सरकार का पक्ष
उधर म्यांमार की सरकार इन दावों को खारिज करती है कि रखाइन में रहने वाले रोहिंग्या हिंदू, सरकार और चरमपंथियों- दोनों के खौफ में जी रहे हैं। सरकार उन्हें बचाने के साथ-साथ सही पहचान होने पर उन्हें नागरिकता देने की भी बात करती रही है।
म्यांमार के केंद्रीय समाज कल्याण मंत्री विन म्यात आए ने बताया, "रखाइन में हिंसा से बहुत लोग प्रभावित हुए हैं और चरमपंथियों ने हिंदुओं को भी मारा। मुझे नहीं पता कुछ बांग्लादेश क्यों भागे? शायद डर के चलते इधर-उधर भाग गए थे, लेकिन अब वे वापस आ गए हैं।"
उधर अनिका धर अब म्यांमार लौट आईं हैं। हालांकि अभी सरकार ने उन्हें मीडिया से दूर रखा है। अनिका का बच्चा अब अस्पताल में पैदा हो सकेगा। लेकिन कुकू बाला और उनके तीन बच्चों के लिए मुश्किलें कम नहीं।
हमारी मुलाकात के कुछ दिन बाद उन्हें उनके गांव वापस भेज दिया गया। रखाइन में हालात चिंताजनक हैं। जो वापस भेजे दिए गए, उन्हें भी नहीं पता, उन पर अगला हमला कौन करेगा।
मुश्किल से रखाइन पहुंचने के बाद उत्तरी हिस्से में जाने की हमारी तमाम गुजारिशों को सरकार ने साफ मना कर दिया। लेकिन एक बात साफ है। रोहिंग्या मुस्लिमों की तरह अपने घर और करीबी रिश्तेदार गंवाने वाले इस प्रांत के हिंदू नागरिक एकाएक बढ़ी हिंसा में पिस कर रह गए हैं।'
इसमें शक नहीं कि सरकार से मिलती मदद के चलते रोहिंग्या हिंदुओं को उनसे जोड़ कर देखा जाता है। अधिकारियों की नजरों के बीच रोहिंग्या हिंदू भी सरकारी मदद की तारीफ करते हैं। एक दोपहर, मैं अपने ऊपर नजर रखने वालों से बचते हुए कुछ रोहिंग्या हिंदुओं से मिलने गया। उन्हें खुल कर बात करने में देर नहीं लगी।
मुआंग्डो से भाग कर आए नेहरू धर ने बताया, "हम लोग डरे हुए हैं क्योंकि जो मुस्लिमों के साथ हो रहा है वो हमारे साथ भी हो सकता है। सरकार ने हमें पहचान वाले कार्ड तो दिए हैं, लेकिन वो हमें नागरिकता नहीं देती। न हमें सरकारी नौकरी मिलती हैं और न ही हम देश के सभी हिस्सों में जा सकते हैं। अगर हमने मांगें रखीं तो मुझे डर है, अगला नंबर हमारा होगा"।
खौफ हर जगह दिखता है। च्या विन रोहिंग्या मुसलमानों के हित की बात करने वाले लीडर हैं और सांसद भी रह चुके हैं। उन्हें म्यांमार सरकार के दावों पर शक है जिसमें कहा गया कि सामूहिक कब्र में मिले लोगों की हत्या मुस्लिम चरमपंथियों ने की है।
उन्होंने कहा, "रखाइन में आरसा ग्रुप से संबंधित मुस्लिम चरमपंथी अवैध हैं और गलत गतिविधियों में भाग लेते हैं। लेकिन अगर इन जघन्य हत्याओं के पीछे उनका हाथ है भी, तब भी उनके पास इतना समय कहां होगा कि वारदात के बाद कब्रें खोदें और फिर उन्हें ढकें। ये लोग हमेशा भाग रहे होते हैं और छिप रहे होते हैं।"
सरकार का पक्ष
उधर म्यांमार की सरकार इन दावों को खारिज करती है कि रखाइन में रहने वाले रोहिंग्या हिंदू, सरकार और चरमपंथियों- दोनों के खौफ में जी रहे हैं। सरकार उन्हें बचाने के साथ-साथ सही पहचान होने पर उन्हें नागरिकता देने की भी बात करती रही है।
म्यांमार के केंद्रीय समाज कल्याण मंत्री विन म्यात आए ने बताया, "रखाइन में हिंसा से बहुत लोग प्रभावित हुए हैं और चरमपंथियों ने हिंदुओं को भी मारा। मुझे नहीं पता कुछ बांग्लादेश क्यों भागे? शायद डर के चलते इधर-उधर भाग गए थे, लेकिन अब वे वापस आ गए हैं।"
उधर अनिका धर अब म्यांमार लौट आईं हैं। हालांकि अभी सरकार ने उन्हें मीडिया से दूर रखा है। अनिका का बच्चा अब अस्पताल में पैदा हो सकेगा। लेकिन कुकू बाला और उनके तीन बच्चों के लिए मुश्किलें कम नहीं।
हमारी मुलाकात के कुछ दिन बाद उन्हें उनके गांव वापस भेज दिया गया। रखाइन में हालात चिंताजनक हैं। जो वापस भेजे दिए गए, उन्हें भी नहीं पता, उन पर अगला हमला कौन करेगा।