{"_id":"fe1eed4e-8308-11e2-9052-d4ae52bc57c2","slug":"know-about-jamaat-e-islami","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्या है बांग्लादेश जमात ए-इस्लामी","category":{"title":"Rest of World","title_hn":"बाकी दुनिया","slug":"rest-of-world"}}
क्या है बांग्लादेश जमात ए-इस्लामी
Updated Sat, 02 Mar 2013 12:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांग्लादेश जमात ए-इस्लामी को संक्षेप में जमात भी कहते हैं। भारत विभाजन से पहले सन् 1941 में बनी इस पार्टी के संस्थापक थे सैयद अबुल अला मौदूदी। विभाजन के बाद ये पाकिस्तान चले गए और फिर पार्टी के पूर्वी धड़े से बांग्लादेश जमात ए-इस्लामी का जन्म हुआ।
विज्ञापन
राजनीतिक पैठ
- देश की सबसे बड़ी इस्लामी राजनीतिक पार्टी।
- शुरुआत में पृथक बांग्लादेश का विरोध।
- रल अयूब खान के शासनकाल में पार्टी ने राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना शुरू किया।
- वर्ष 1978 में मुक्ति वाहिनी की जीत के बाद पार्टी को प्रतिबंधित कर दिया गया।
- पार्टी के कई बड़े नेताओं ने पाकिस्तान में जाकर शरण ली।
- पार्टी के नेता गुलाम आजम की नागरिकता तक रद्द कर दी गई।
- सत्ता परिवर्तन के बाद गुलाम आजम को बांग्लादेश आने की अनुमति मिल गई।
- पार्टी का छात्र संगठन बांग्लादेश इस्लामी छात्र शिविर काफी प्रभावशाली संगठन है।
- इस्लामी छात्र शिविर हालांकि वैध संगठन है, बावजूद इसके इस पर अक्सर हिंसा और चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं।
- वर्ष 1978 में जमात ने पहली बार आम चुनाव में हिस्सा लिया। वर्ष 1986 में देश की संसद में उसके दस उम्मीदवार विजयी रहे।
- साल 2001 में पार्टी ने संसद में 18 सीटें हासिल कीं और तीन अन्य दलों के साथ गठबंधन बनाया।
- इसी साल पार्टी बेगम खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेतृत्व में बनी सरकार में शामिल हुई।
- पार्टी के मौजूदा नेता मतीउर रहमान निजामी हैं।
आरोप
- वर्ष 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पार्टी के कई नेताओं पर लोगों पर अत्याचार के संगीन आरोप लगे।
- पार्टी पृथक बांग्लादेश का विरोध कर रही थी क्योंकि उसकी निगाह में ये इस्लाम विरोधी था।
- वर्ष 1990 में सैन्य शासन के समाप्त होने के बाद पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ युद्ध अपराध में शामिल होने के आरोप लगे और मुकदमे चले।
- पार्टी नेता आजम की नागरिकता को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
- मई 2008 में बांग्लादेश पुलिस ने जमात नेता और पूर्व मंत्री मतीउर रहमान को दो अन्य पूर्व मंत्रियों के साथ गिरफ्तार किया।
- गिरफ्तार किए गए दो अन्य पूर्व मंत्री थे- अब्दुल मन्नान भुइयां और शम्सुल इस्लाम।
- साल 2010 में अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने पार्टी के आठ नेताओं को युद्ध अपराध का दोषी पाया।
- भारत में बाबरी विध्वंस के बाद पार्टी के नेताओं और छात्र संगठन पर बांग्लादेश में हिन्दू विरोधी दंगे भड़काने का भी आरोप है।
मकसद
- जमात ए-इस्लामी पहले अल्लाह के शासन की बात करती थी।
- लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने के बाद पार्टी ने अपने इस नारे को बदल दिया।
- बावजूद इसके उस पर चरमपंथी ठप्पा लगा रहा।
- धार्मिक आधार पर ही पार्टी ने बांग्लादेश से पाकिस्तान के अलग होने का विरोध किया था।
- फिलहाल राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल और गठबंधन सरकार में भी रह चुकी है।