नेपाल में विपक्षी दलों के भारी हंगामे के चलते संसद ठप
नेपाल में सोमवार को जबरदस्त हंगामे के चलते संसद की कार्यवाही को बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। नेपाली संसद की कार्यसूची में संविधान संशोधन विधेयक रखने के बावजूद सोमवार को विपक्षी दलों ने संसद को नहीं चलने दी। संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों की ओर से नेपा पार्टी के लक्ष्मण राजवंशी ने सरकार से संशोधन वापस लेने की मांग की।
भारी हंगामे के चलते स्पीकर ओनसरी घर्ती ने संसद की कार्यवाही को बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले सोमवार सुबह ही नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) समेत आठ विपक्षी दलों ने संविधान संशोधन विधेयक के विरोध में संसद में जारी अवरोध कायम रखने का फैसला कर लिया था।
एमाले नेता और पूर्व स्पीकर सुवास नेवाङ्ग ने बताया कि संविधान संशोधन के खिलाफ हो रहे आंदोलन के समर्थन में दो सप्ताह बाद राजधानी में विरोध सभा करने का निर्णय भी लिया गया है।
भारत को उम्मीद, मधेसियों को मिलेगा समान अधिकार
संविधान में खासतौर पर मधेसियों को समान भागीदारी दिलाने के लिए नेपाल की संसद में पेश संविधान संशोधन विधेयक पर भारत की निगाहें टिकी हैं। विपक्षी दलों के विरोध के कारण भले ही सोमवार को नेपाल की संसद ठप हो गई, मगर भारत को उम्मीद है कि भविष्य में इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। प्रचंड के सकारात्मक रुख से भी भारत की उम्मीदें बढ़ी हैं।
दरअसल, नेपाल के नए संविधान में मधेसियों को समान भागीदारी नहीं मिलने पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनातनी ज्यादा बढ़ गई थी। नेपाल ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध का आरोप लगाते हुए पहली बार संयुक्त राष्ट्र में शिकायत भी दर्ज कराई थी। सूत्रों के मुताबिक संविधान संशोधन बिल से भारत संतुष्ट है।
क्योंकि इसमें भारत की भावनाओं के अनुरूप मधेसियों को पहाड़ के नागरिक की तरह ही समान अधिकार दिए जाने का प्रावधान है। हालांकि इस मुद्दे पर नेपाल के राजनीतिक दलों में उभरे मतभेद ने चिंता जरूर पैदा की है, मगर ऐसा लगता है कि देर-सबेर सभी दल इसके लिए सहमत हो जाएंगे।
भारत के लिए राहत की बात यह है कि कभी भारत विरोधी रुख अपनाने और मधेसियों केे अधिकार दिलाने की मांग का जबर्दस्त विरोध करने वाले नेपाली पीएम प्रचंड इसके समर्थन में हैं। हालांकि मुख्य विपक्षी दल सीपीएन-यूएमएल इसके विरोध में है। इस मुद्दे पर बातचीत की प्रक्रिया जब आगे बढ़ेगी, तब विवाद का हल निकलने की पूरी संभावना है। मालूम हो कि भारत ने पहले ही संविधान संशोधन बिल का समर्थन करते हुए कहा था कि वह नेपाल में स्थायी शांति और विकास चाहता है।