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जापानी 'भालू' कुमामोन कमाता है लाखों!
नील स्टेनबर्ग/ बीबीसी
Updated Thu, 28 Jul 2016 12:59 PM IST
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- फोटो : getty images
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जापान में इन दिनों एक 'भालू' बड़ी चर्चा में है। इसका नाम है कुमामोन। ये 'भालू' इतना मशहूर, इतना लोकप्रिय हो गया है कि दूसरे देशों से लोग कुमामोन से मिलने के लिए जापान आते हैं। असल में ये कुमामोन कोई असली भालू नहीं, ये जापानी सूबे कुमामोटो की नुमाइंदगी करने वाला एक शुभंकर है।
शुभंकर अक्सर खेलों से जोड़ दिए जाते हैं, जैसे कि ओलंपिक खेलों या एशियाई खेलों के मैस्कट। मगर कुमामोन इन सबसे बढ़कर है। जापानी भाषा में कहें तो वो एक युरू-कियारा या अलग ही तरह का किरदार है। उसकी जिम्मेदारी है जापान के कुमामोटो सूबे के बारे में अच्छी बातों का प्रचार करना।
जापान में तमाम राज्यों में युरू-कियारा या कुमामोन जैसे मैस्कट के जरिए अपने-अपने इलाकों के प्रचार का चलन है। इनके बीच बाकायदा मुकाबला भी कराया जाता है। जिससे कि साल का सबसे कामयाब युरू-कियारा चुना जाए और उसको सम्मान किया जाए। आज की तारीख में कुमामोन को लेकर लोगों में जबरदस्त दीवानगी देखने को मिल रही है।
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हाल ही में जब 14 अप्रैल 2016 को जापान में 6।2 तीव्रता का भूकंप आया तो लोगों को इंसानों से ज्यादा कुमामोन की फिक्र दिखी। जब काफी दिनों तक कुमामोन के ट्विटर अकाउंट से कोई ट्वीट नहीं किया गया तो, उसके दीवाने उसे तलाशने निकल पड़े थे। उसकी सलामती के लिए ढेरों फोन कॉल आए। लोगों ने कुमामोन के लिए दुआएं मांगीं।
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शुभंकर अक्सर खेलों से जोड़ दिए जाते हैं, जैसे कि ओलंपिक खेलों या एशियाई खेलों के मैस्कट। मगर कुमामोन इन सबसे बढ़कर है। जापानी भाषा में कहें तो वो एक युरू-कियारा या अलग ही तरह का किरदार है। उसकी जिम्मेदारी है जापान के कुमामोटो सूबे के बारे में अच्छी बातों का प्रचार करना।
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जापान में तमाम राज्यों में युरू-कियारा या कुमामोन जैसे मैस्कट के जरिए अपने-अपने इलाकों के प्रचार का चलन है। इनके बीच बाकायदा मुकाबला भी कराया जाता है। जिससे कि साल का सबसे कामयाब युरू-कियारा चुना जाए और उसको सम्मान किया जाए। आज की तारीख में कुमामोन को लेकर लोगों में जबरदस्त दीवानगी देखने को मिल रही है।
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हाल ही में जब 14 अप्रैल 2016 को जापान में 6।2 तीव्रता का भूकंप आया तो लोगों को इंसानों से ज्यादा कुमामोन की फिक्र दिखी। जब काफी दिनों तक कुमामोन के ट्विटर अकाउंट से कोई ट्वीट नहीं किया गया तो, उसके दीवाने उसे तलाशने निकल पड़े थे। उसकी सलामती के लिए ढेरों फोन कॉल आए। लोगों ने कुमामोन के लिए दुआएं मांगीं।
अपने इलाके को पूरी दुनिया में मशहुर करने चाहता है कुमामोन
कुमामोन, जिस जापानी सूबे का शुभंकर है वो बहुत सामान्य सा इलाका है। वहां पर तरबूज और स्ट्रॉबेरी होती हैं। करीब सात लाख की आबादी वाले इस सूबे में ज्यादातर लोग खेती करते हैं। कुमामोन की जिम्मेदारी, अपने इलाके की शोहरत पूरी दुनिया में फैलाने की है। मगर आज से छह साल पहले तक कुमामोन को कोई जानता ही नहीं था।
साल 2010 में जापान रेलवे ने देश के मेट्रो नेटवर्क शिन्कासेन से कुमामोटो को भी जोड़ दिया। स्थानीय लोगों को इसमें अपने इलाके के प्रचार का मौका दिखा। इसीलिए उन्होंने एक लोगो डिजाइन कराया जो कुमामोन के तौर पर दुनिया के सामने आया। इसका मकसद था कुमामोटो सूबे में सैलानियों की आमद बढ़ाना।
तो जब जापान की मशहूर मेट्रो ट्रेन शिन्कासेन, पहली बार कुमामोटो पहुंची तो स्टेशन पर उसके स्वागत के लिए खुद कुमामोन मौजूद थे। उसके बाद तो कुमामोन ने कामयाबी का जो सफर शुरू किया तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक बार प्रचार के लिए कुमामोन के बारे में अफवाह फैला दी गई कि वो लापता हो गया है।
बाद में मीडिया के जरिए लोगों को बताया गया कि कुमामोन तो असल में जापान के बड़े शहर ओसाका गया है। वहां से वो लोगों को अपने इलाके यानी कुमामोटो की सैर के लिए भेज रहा है। ये स्टंट काम आया। कुमामोन की शोहरत दूर-दूर तक फैल गई। आज वो जापान के तमाम युरु-कियारा में सबसे ज्यादा कामयाब माना जाता है।
साल 2010 में जापान रेलवे ने देश के मेट्रो नेटवर्क शिन्कासेन से कुमामोटो को भी जोड़ दिया। स्थानीय लोगों को इसमें अपने इलाके के प्रचार का मौका दिखा। इसीलिए उन्होंने एक लोगो डिजाइन कराया जो कुमामोन के तौर पर दुनिया के सामने आया। इसका मकसद था कुमामोटो सूबे में सैलानियों की आमद बढ़ाना।
तो जब जापान की मशहूर मेट्रो ट्रेन शिन्कासेन, पहली बार कुमामोटो पहुंची तो स्टेशन पर उसके स्वागत के लिए खुद कुमामोन मौजूद थे। उसके बाद तो कुमामोन ने कामयाबी का जो सफर शुरू किया तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक बार प्रचार के लिए कुमामोन के बारे में अफवाह फैला दी गई कि वो लापता हो गया है।
बाद में मीडिया के जरिए लोगों को बताया गया कि कुमामोन तो असल में जापान के बड़े शहर ओसाका गया है। वहां से वो लोगों को अपने इलाके यानी कुमामोटो की सैर के लिए भेज रहा है। ये स्टंट काम आया। कुमामोन की शोहरत दूर-दूर तक फैल गई। आज वो जापान के तमाम युरु-कियारा में सबसे ज्यादा कामयाब माना जाता है।
जापान की महारानी ने कुमामोन को राजमहल बुला की मुलाकात
जापान में तमाम मैस्कट के बीच होने वाले मुकाबले में कई बार कुमामोन अव्वल आ चुका है। कुमामोटो सूबे के अधिकारियों ने कुमामोन के लोगो को इस्तेमाल करने की आजादी तमाम कंपनियों को दे रखी है। इसके बदले में इन कंपनियों को कुमामोटो की किसी चीज या किसी इलाके का प्रचार करना होता है।
आज कुमामोन को लेकर लोग इतने दीवाने हैं कि इसके नाम से बोतलों से लेकर, छाते, साइकिलें, मोटर बाइक तक बेची जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन हर साल 12 मार्च को इसका जन्मदिन मनाता है। ये वही दिन है जब शिन्कासेन मेट्रो ट्रेन पहली बार कुमामोटो पहुंची थी। कुमामोन के जन्मदिन पर बड़ी तादाद में लोग जमा होते हैं, केक कटता है और उसे तोहफे दिए जाते हैं।
इसका नाम कुमामोटो के हर गली-कूचे में दिख जाता है। एक बार उसका कटआउट शहर के मेट्रो स्टेशन पर भी लगाया गया था। वहां इसके लिए बाकायदा स्टेशन मास्टर का दफ्तर तक बनाया गया था। एक बार कुमामोटो के प्रशासन ने इसके प्रचार के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुलाई थी।
कुमामोन की तरफ से उसके मातहत ने पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए थे। जापान की महारानी भी कुमामोन को अपने राजमहल बुलाकर मिल चुकी हैं। जापान के अलावा हॉन्गकांग, थाईलैंड जैसे देशों में कुमामोन से जुड़ी तमाम चीजें बेची जा रही हैं। इसके नाम पर सालाना अरबों रुपयों का कारोबार हो रहा है।
आज कुमामोन को लेकर लोग इतने दीवाने हैं कि इसके नाम से बोतलों से लेकर, छाते, साइकिलें, मोटर बाइक तक बेची जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन हर साल 12 मार्च को इसका जन्मदिन मनाता है। ये वही दिन है जब शिन्कासेन मेट्रो ट्रेन पहली बार कुमामोटो पहुंची थी। कुमामोन के जन्मदिन पर बड़ी तादाद में लोग जमा होते हैं, केक कटता है और उसे तोहफे दिए जाते हैं।
इसका नाम कुमामोटो के हर गली-कूचे में दिख जाता है। एक बार उसका कटआउट शहर के मेट्रो स्टेशन पर भी लगाया गया था। वहां इसके लिए बाकायदा स्टेशन मास्टर का दफ्तर तक बनाया गया था। एक बार कुमामोटो के प्रशासन ने इसके प्रचार के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुलाई थी।
कुमामोन की तरफ से उसके मातहत ने पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए थे। जापान की महारानी भी कुमामोन को अपने राजमहल बुलाकर मिल चुकी हैं। जापान के अलावा हॉन्गकांग, थाईलैंड जैसे देशों में कुमामोन से जुड़ी तमाम चीजें बेची जा रही हैं। इसके नाम पर सालाना अरबों रुपयों का कारोबार हो रहा है।
भूकंप के बाद जब गायब हो गया कुमामोन
कई लोग सवाल उठाते हैं कि आखिर कुमामोन लोगो की कामयाबी का राज क्या है? इसके जवाब में कुमामोन के तमाम मुरीद कहते हैं कि वो क्यूट और शरारती है। अब नया सवाल खड़ा होता है कि आखिर क्यूट क्या होता है? असल में क्यूट ऐसा शब्द है जो लोगों के लिए अलग-अलग मायने रखता है। किसी को टेडी बीयर क्यूट लगता है तो किसी को गोल-मटोल बच्चे। महिलाएं अक्सर क्यूट चीजों पर फिदा हो जाती हैं।
ज्यादातर क्यूट शब्द को गोल-मटोल बच्चों से जोड़ा जाता है। जिनके मोटे गाल, नन्ही सी नाक और ऐंठे हुए गोल-मटोल हाथ पैर लोगों को लुभाते हैं। आखिर ये क्यूट किरदार लोगों को इतना पसंद क्यों आते हैं? इसकी वजह समाज में हमदर्दी की कमी है। बहुत से लोग होते हैं जो अकेलापन महसूस करते हैं। रात के अंधेरों में जब वो अकेले होते हैं, तो उन्हें हमदर्दी की जरूरत महसूस होती है।
इसी जज्बाती जरूरत को कुमामोन जैसे मैस्कट की मदद से पूरा करने की कोशिश की जाती है। फिर आपके जज्बातों का कारोबार शुरू हो जाता है। जैसे कि जापान में हर इलाके का अपना युरु-कियारा है। तमाम कंपनियां अपने प्रचार के लिए ऐसे ही लोगो बनवाती हैं। जैसे कि जापान में ही हैलो किटी नाम का एक टेडी बीयर खूब मशहूर हुआ। जिसके नाम का कारोबार अरबों का है।
आज की तारीख में कमोबेश वैसी ही शोहरत कुमामोन को हासिल है। मुसीबतों में घिरे लोग हमदर्दी के लिए उसे याद करते हैं। इसी तरह, 14 अप्रैल के भूकंप के बाद जब कुमामोन कई दिन गायब रहा था, तो उसके ट्विटर हैंडल पर सवालों की बौछार हो गई थी।
उसके करीब पांच लाख फॉलोवर हैं। सबका एक ही सवाल था कि कुमामोन कहां गया? उसकी सलामती के लिए दुआएं मांगी गईं। कई दिनों तक गायब रहने के बाद कुमामोन ने एक स्थानीय अस्पताल का दौरा किया। उसे देखने और उसके साथ फोटो खिंचवाने की लोगों में होड़ लग गई। लोगों के बीच उनका सच्चा हमदर्द जो आ गया था।
ज्यादातर क्यूट शब्द को गोल-मटोल बच्चों से जोड़ा जाता है। जिनके मोटे गाल, नन्ही सी नाक और ऐंठे हुए गोल-मटोल हाथ पैर लोगों को लुभाते हैं। आखिर ये क्यूट किरदार लोगों को इतना पसंद क्यों आते हैं? इसकी वजह समाज में हमदर्दी की कमी है। बहुत से लोग होते हैं जो अकेलापन महसूस करते हैं। रात के अंधेरों में जब वो अकेले होते हैं, तो उन्हें हमदर्दी की जरूरत महसूस होती है।
इसी जज्बाती जरूरत को कुमामोन जैसे मैस्कट की मदद से पूरा करने की कोशिश की जाती है। फिर आपके जज्बातों का कारोबार शुरू हो जाता है। जैसे कि जापान में हर इलाके का अपना युरु-कियारा है। तमाम कंपनियां अपने प्रचार के लिए ऐसे ही लोगो बनवाती हैं। जैसे कि जापान में ही हैलो किटी नाम का एक टेडी बीयर खूब मशहूर हुआ। जिसके नाम का कारोबार अरबों का है।
आज की तारीख में कमोबेश वैसी ही शोहरत कुमामोन को हासिल है। मुसीबतों में घिरे लोग हमदर्दी के लिए उसे याद करते हैं। इसी तरह, 14 अप्रैल के भूकंप के बाद जब कुमामोन कई दिन गायब रहा था, तो उसके ट्विटर हैंडल पर सवालों की बौछार हो गई थी।
उसके करीब पांच लाख फॉलोवर हैं। सबका एक ही सवाल था कि कुमामोन कहां गया? उसकी सलामती के लिए दुआएं मांगी गईं। कई दिनों तक गायब रहने के बाद कुमामोन ने एक स्थानीय अस्पताल का दौरा किया। उसे देखने और उसके साथ फोटो खिंचवाने की लोगों में होड़ लग गई। लोगों के बीच उनका सच्चा हमदर्द जो आ गया था।