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चीन के OBOR प्रोजेक्ट को लगेगा झटका, भारत के साथ जापान उठाएगा बड़ा कदम

Fri, 27 Oct 2017 08:35 AM IST
एजेंसी/ टोक्यो
एजेंसी/ टोक्यो Updated Fri, 27 Oct 2017 08:35 AM IST
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Japan with India build ports and high speed road networks to counter china OBOR

चीन की बढ़ती ताकत पर अंकुश लगाने के लिए जापान नई रणनीति तैयार करने में लगा हुआ है जिसमें वह भारत के साथ अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की भी मदद लेगा। जापान का मानना है कि वन बेल्ट-वन रोड (ओबीओआर) का समाधान निकालने के लिए चारों देशों को साथ में आना ही होगा।

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जापान के विदेश मंत्री तारो कोनो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 6 नवंबर को होने वाली जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शिंजो अबे यह प्रस्ताव पेश करेंगे। इस प्रस्ताव का उद्देश्य है कि चारों देश जमीन और समुद्र के रास्ते होने वाले अपने व्यापार और सुरक्षा मामलों में सहयोग को बढ़ाकर दक्षिणपूर्व, दक्षिण और मध्य एशिया के अलावा मध्य पूर्व और अफ्रीका तक फैलाएं। 
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तारो कोनो ने कहा कि हम ऐसे युग में हैं जिसमें जापान को कूटनीतिक तौर पर जोर लगाते हुए एक बड़ी रणनीतिक भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद है कि अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के मसले का ध्यान रखते हुए समुद्र को स्वतंत्र एवं मुफ्त रखा जाए। उन्होंने कहा कि जापान, एशिया से अफ्रीका तक उच्च स्तरीय आधारभूत ढांचा तैयार करना चाहता है।
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पढ़ें- चीन ने फिर दिखाए तेवर, कहा-OBOR का हिस्सा नहीं बना भारत तो दक्षिण एशिया में पड़ जाएगा अलग-थलग

दरअसल हाल ही में समाप्त हुए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के महाधिवेशन में मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग को दोबारा सत्ता सौंप दी गई जिसके बाद उन्होंने इस अति महत्वपूर्ण ओबीओआर योजना को मंजूरी प्रदान कर दी। 60 से अधिक देशों को जोड़ने वाली इस योजना के माध्यम से चीन पूरी दुनिया पर अपना दबदबा बनाना चाहता है इसलिए इसका महत्व भी बढ़ गया है। 

दरअसल चीन ग्लोबल ट्रांसपोर्ट और व्यापार के रास्ते तैयार करने के लिए अपना माल और फंड मुहैया कराएगा। भारत ने अपनी संप्रभुता के उल्लंघन का हवाला देते हुए चीन की इस महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था।

संदेह छोड़ BRI में शामिल हो भारत

Japan with India build ports and high speed road networks to counter china OBOR

इस बीच चीन ने कहा कि भारत को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एवं रोड मुहिम’ पर संदेह छोड़कर इसमें शामिल हो जाना चाहिए। उसने कहा कि इससे कश्मीर मुद्दे पर चीन के रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा।

दरअसल बीआरआई में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) भी शामिल है। वहीं बीआरआई को पांच साल में एक बार होने वाले सत्ताधारी चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के संविधान में भी शामिल कर दिया गया है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि स्वैच्छिक तौर पर बीआरआई में शामिल होने के लिए भारत सहित अन्य देशों को आमंत्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीआरआई का उद्देश्य क्षेत्रीय देशों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने का है।

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