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जापान की मेयर बोलीं, सूमो रेसलिंग में महिलाओं को भी मिले बराबरी का दर्जा

Sun, 22 Apr 2018 11:43 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Updated Sun, 22 Apr 2018 11:43 AM IST
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japan mayor tomoko nakagawa want equal opportunity for women in sumo wrestling

महिलाओं के साथ यूं तो हर देश में भेदभाव किया जाता है। फिर चाहे बात हो पढ़ाई की, नौकरी की या किसी खेल क्षेत्र की। कई नौकरियों में तो यह तक कह दिया जाता कि उसके लिए केवल पुरुष ही आवेदन कर सकते हैं। ऐसी ही एक परंपरा जापान की भी है। यहां 400 साल पहले शुरू हुआ खेल सूमो रेसलिंग जापान का सबसे पुराना और पवित्र खेल माना जाता है। इसमें शुरू से ही ये परंपरा रही है कि रिंग (दोह्यो) में महिलाएं प्रवेश नहीं कर सकतीं। लेकिन इस परंपरा के खिलाफ अब जापान के तकाराजुका शहर की मेयर तमोको नाकागावा ने आवाज उठाई है। 

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उनके मुताबिक वह इस पुरुष प्रधान परंपरा को नहीं मानती हैं, महिलाओं को आखिर क्यों इस रिंग से दूर रखा जाता है। उनहोंने कहा कि महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए वह हर 6 महीने में याचिका दायर करती रहेंगी। तमोको ने आगे कहा कि वह चाहती हैं कि इस मामले पर स्थिति साफ हो जानी चाहिए। सूमो एसोसिएशन को अब महिलाओं की आवाज सुननी होगी और इस मामले में हर स्तर पर बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी ऐसी वजह नहीं है कि महिलाओं को रिंग में अभ्यास करने से रोका जाए। 
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तमोको के ऐसा कहने के बाद एसोसिएशन ने भी बयान दिया है। एसोसिएशन के मुताबिक यह परंपरा शुरू से रही है कि महिलाओं को रिंग में प्रवेश करने से रोका जाए। इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है। इसके बाद एसोसिएशन ने मेयर को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह इस विषय पर कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और इस समस्या का हल निकालेंगे। एसोसिएशन के जवाब को सुनने के बाद तमोको ने कहा कि अगर महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं दिया गया तो वह आंदोलन शुरू कर देंगी। 

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इस घटना के बाद बोलीं मेयर

japan mayor tomoko nakagawa want equal opportunity for women in sumo wrestling

गौरतलब है कि करीब 15 दिनों पहले सूमो टूर्नामेंट के दौरान एक घटना घटी थी जिसके बाद तमोको ने महिलाओं के लिए आवाज उठाई। हुआ ये कि 6 अप्रैल को क्योटो में एक टूर्नामेंट चल रहा था। तब मायजुरु के मेयर रिंग में खड़े होकर भाषण देते वक्त बेहोश हो गए। तो उनकी मदद के लिए कुछ महिलाएं रिंग के अंदर पहुंच गईं। जिसके बाद एसोसिएशन ने माइक पर अनाउंसमेंट कर महलाओं को रिंग से बाहर जाने को कहा और इसे अपवित्र मानते हुए रिंग में बहुत सारे नमक का छिड़काव किया। 

बता दें यह खेल जापान में 16वीं सदी में शुरू हुआ था। जिसका पहला मुकाबला 1684 में हुआ। तभी से वहां यह परंपरा चली आ रही है कि महिलाएं रिंग में प्रवेश नहीं कर सकतीं। इस रिंग का व्यास 4.55 मीटर का होता है और यह 6.7 मीटर के आयताकार प्लैटफॉर्म के अंदर ही रहता है।

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