इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू पहुंचे पेरिस, यहूदियों को किया याद
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1942 में नाजियों के कब्जे वाले फ्रांस में यहूदियों की सामूहिक गिरफ्तारी की याद में आयोजित एक समारोह में हिस्सा लेने इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू पेरिस पहुंचे हैं। उस दौरान 13,000 से अधिक यहूदियों को घेर कर वेलोड्रोम डीवायर स्टेडियम में रखा गया था, जहां से बाद में उन्हें नाजियों के यातना शिविरों में ले जाया गया था। ये पहला मौका है जब नेतन्याहू ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी बात की। वो पहले इसराइली प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने वेलोड्रोम डीवायर में आयोजित इस समारोह में हिस्सा लिया है।
पेरिस में इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "मैं यहां नरसंहार में जान गंवानेवाले लोगों के लिए शोक प्रकट करने आया हूं।" उन्हें सुननेवालों में यहूदी समुदाय और नरसंहार में जीवित बचे लोग शामिल थे। उन्होंने कहा "75 साल पहले इस शहर पर गहरा अंधकार छा गया था। ऐसा लगने लगा था कि फ्रांसीसी क्रांति के मूल्यों, समानता, भाईचारा, आजादी को स्वतंत्रता-विरोधी ताकतों ने अपने जूतों के नीचे कुचल दिया है।"
उन्होंने उन "महान और महानतम इंसानों" को याद किया जिन्होंने नाजी कब्जे के दौरान फ्रांस में यहूदियों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली और आधुनिक समाज में सिर उठाती "अलगाववादी ताकतों" को चेतावनी दी।
1942 की 16 और 17 जुलाई को फ्रांस की पुलिस ने 13,000 से अधिक यहूदियों को गिरफ्तार किया था। इनमें करीब 4,000 बच्चे शामिल थे। इस परिवारों को आइफिल टावर के नजदीक वेलोड्रोम डीवायर साइक्लिंग स्टेडियम या फिर राजधानी के बाहर मौजूद एक नजरबंदी शिविर में ले जाया गया था। बाद में इनमें से अधिकतर लोगों को ट्रेनों में भर ऑत्स्विज यातना शाविर में ले जाया गया। इस सफर के बाद 100 से भी कम लोग जिंदा बचे थे।
फ्रांस में इस घटना को लो कर हमेशा से विवाद रहा है। मैक्रों के विरोध में राष्ट्रपति चुनाव लड़ चुकी दक्षिणपंथी नेता मेरी ल पेन ने अप्रैल 9 को कहा था कि इस त्रासदी के लिए फ्रांस जिम्मेदार नहीं था। लेकिन शनिवार को इस आयोजन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि "फ्रांस ने ही" वो सामूहिक गिरफ्तारियां की थीं और कैदियों को दूसरी जगह ले जाया गया था जिस दौरान "13,152 यहूदियों की मौत हो गई थी"।
उन्होंने कहा, "इसमें एक भी जर्मन व्यक्ति ने हिस्सा नहीं लिया था।" इस आयोजन के बाद नेतन्याहू और मैकों सीधी वार्ता के लिए मिले और उन्होंने सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
इससे पहले नेतन्याहू जनवरी 2015 में फ्रांस के दौरे पर आए थे। वो व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो, पुलिस अधिकारियों और कोषर सुपरमार्केट पर हुए हमले के बाद आयोजित किए गए एकता मार्च में शामिल होने पहुंचे थे। रविवार को नेतन्याहू ने कहा कि वह दोनों देशों के बीच अधिक सहयोग देखना चाहेंगे और उन्होंने "ईरानी शासन के बारे में चिंता" व्यक्त की।
एक संयुक्त प्रेस सम्मेलन में मैक्रों ने आश्वासन दिया कि उन्हें पश्चिमी देशों और ईरान के बीच साल 2015 में हुए परमाणु करार के बारे में जानकारी है और इसके प्रति वो "सतर्क" हैं। मैक्रों ने इसराइल और फलस्तीनी क्षेत्र के बीच शांतिवार्ता की बहाली के लिए अपील की और कहा कि फ्रांस 'दो राष्ट्र सिद्धांत' का समर्थन करता है और फलस्तीन के कब्जे वाले इलाके में इसराइल बस्तियों के निर्माण का विरोध करता है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने इस महीने की शुरुआत में पेरिस में फलस्तीनी नेता महमूद अब्बास से भी मुलाकात की थी। नेतन्याहू के साथ ये मुलाकात एक ऐसे वक्त हो रही है जब हिंसा बढ़ने को ले कर चिंता जताई जा रही है। इसी सप्ताह यरुशलम में पवित्र माने जाने वाले टेम्पल माउँट के नजदीक हुए हमले में दो इसराइली पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी और एक व्यक्ति घायल हो गए थे।
इस जगह को मुसलमान हरम-अल-शरीफ कहते हैं। गोलीबारी की इस घटना को तीन इसराइली-अरब लोगों ने अंजाम दिया था जिन्हें बाद में सुरक्षा बलों ने मार दिया था। गोलीबारी की घटना के बाद इस पवित्र स्थल को बंद कर दिया गया था जिसके बाद रविवार को इसे फिर से खोला गया। इसराइल और और फलस्तीन के बीच चल रही शांतिवार्ता बीते तीन सालों से रुकी हुई है।