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इसराइल: सत्ता में वापस आएंगे नेतन्याहू?

Wed, 23 Jan 2013 09:58 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Wed, 23 Jan 2013 09:58 AM IST
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israel elections netanyahu predicted to win

इसराइल में चुनाव बाद जारी सर्वेक्षणों का कहना है कि प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गठबंधन सत्ता में लौट रहा है लेकिन उसका बहुमत घट जाएगा। मंगलवार को इसराइल में आम चुनाव हुए जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

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चुनावी सर्वेक्षणों में सत्ताधारी लिकुड-बेतेन्यू गठबंधन को सबसे आगे बताया जा रहा है, लेकिन भारी मतदान के कारण लेबर और मध्यमार्गी पार्टियों को फायदा होने की बात भी कही जा रही है।
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चुनावी अनुमानों के अनुसार येश अतिद (यही भविष्य है) नाम की मध्यमार्गी पार्टी दूसरे स्थान पर रह सकती है जबकि तीसरे पायदान पर लेबर पार्टी रहेगी।

माना जा रहा है कि नेतन्याहू एक नई राष्ट्रवादी पार्टी हबायित हायेहुदी (यहूदी घर) के साथ गठबंधन करने का प्रयास करेंगे।

राजनीतिक समीकरण
मतदान खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने फेसबुक पन्ने पर लिखा कि चुनाव नतीजों से साफ है कि इसराइली लोग चाहते हैं कि मैं प्रधानमंत्री पद पर बना रहूं और जितना संभव हो एक व्यापक गठबंधन बनाऊं।
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इसराइली संसद क्नेसेट की 120 सीटों के लिए कुल 32 पार्टियां चुनाव मैदान में थी। इसराइल में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत चुनाव होते हैं। किसी भी पार्टी को संसद में जगह पाने के लिए कम से कम 2 प्रतिशत वोट जरूर हासिल करने होते हैं।

निवर्तमान संसद में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और अति राष्ट्रवादी इसराइल बेतेन्यू पार्टी के गठबंधन के पास 42 सीटें हैं। मतदान पश्चात जारी सर्वे बताते हैं कि लिकुड-बेतेन्यू गठबंधन को अब 31 सीटें मिल सकती हैं और हबायित हायेहुदी के खाते में 12 सीटें जा सकती हैं।

वहीं पत्रकार से राजनेता बने याइर लापिद की पार्टी येश अतिद को 18 या 19 सीटें मिल सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि पहली बार चुनावों में उतरी इस पार्टी के लिए ये शानदार कामयाबी है।

लेबर पार्टी का प्रदर्शन भी अच्छा रहने की उम्मीद जताई जा रही है। उसे 17 सीटें मिल सकती हैं। फिलहाल संसद में उसके सात सदस्य हैं।

लेबर पार्टी की नेता शेली याचिमोविच का कहना है कि उथल पुथल होने और नेतन्याहू की सरकार जाने की बहुत अधिक संभावना है।

क्या रहे मुद्दे
अगर वास्तविक चुनाव नतीजे चुनावी सर्वेक्षणों के अनुरूप ही रहे तो नेतन्याहू तीसरी बार प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता संभालेंगे। लेकिन उनका बहुमत घट जाएगा।

इसराइल में दक्षिणपंथी विचारधारा पर लिकुड और बेतेन्यू पार्टी के दबदबे को हबायित हायेहुदी ने चुनौती दी है जिसका नेतृत्व एक अमीर कारोबारी नेफ्ताली बेनेट कर रहे हैं। बेनेट नेतन्याहू के चीफ ऑफ स्टाफ भी रह चुके हैं।

वो अधिकृत पश्चिम तट के एक बड़े हिस्से को इसराइल में मिलाने की वकालत करते हैं और इसराइल व फलस्तीन के संकट के लिए दो राष्ट्रों के समाधान के विचार को भी खारिज करते हैं।

चुनाव के सभी परिमाण बुधवार दोपहर तक आने की उम्मीद है जबकि नई सरकार के गठन में हफ्तों का समय लग सकता है। 63 वर्षीय नेतन्याहू 2009 से प्रधानमंत्री पद पर हैं। इससे पहले वो 1996 से 1999 के बीच भी इसराइल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

हाल के वर्षों में नेतन्याहू ने पश्चिमी तट और पूर्वी येरुशलम में इसराइली बस्तियों के निर्माण का काम तेज किया है जिसके लिए उन्हें न सिर्फ फलस्तीनी नेताओं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना झेलनी पड़ी है।


हालांकि इस बार इसराइल में चुनावों में सामाजिक और आर्थिक मुद्दे खास तौर से छाए रहे और फलस्तीनियों के साथ स्थाई शांति की संभावनाओं पर उतना जोर नहीं दिखाई दिया।

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