इराक-सीरिया में आईएस का हुआ बुरा हाल, भागने लगे लड़ाके
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अनुयायियों को इस्लाम और जिहाद का सपना दिखाने वाले आईएस नेता अब उत्तर सीरिया और इराक में अपने नियंत्रण वाले कुछ गांवों तक सिकुड़ते जा रहे हैं। इराक के मोसुल में इस्लामिक स्टेट के आतंकी अमेरिकी समर्थक मित्र देशों की सेना से घिरते जा रहे हैं।
दोनों ही देशों के भीतर आतंकी समूह अब खुद को बचाने की अंतिम मोर्चाबंदी में जुटे हैं, कई ने भागना भी शुरू कर दिया है। आईएस का इलाका भी पहले से सिकुड़कर आधा रह गया है। उसके आर्थिक स्रोत भी खत्म होने लगे हैं, जिसके चलते लड़ाके अपहरण और फिरौती जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
सीरिया के आईएस लड़ाकों ने अब भाषणबाजी शुरू कर दी है कि दबिक में वास्तविक युद्ध अब बाद में लड़ा जाएगा। हाल ही के दिनों में सैकड़ों लड़ाके अपने परिवार के साथ उत्तरी सीरिया में रक्का के पास दी-फैक्टो की तरफ भाग चुके हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक ये लोग इराक के मोसुल और सीरिया के दबिक से भागकर यहां आए हैं, और अब घरों के इंतजार में आईएस आकाओं की तरफ देख रहे हैं। उधर, युद्ध क्षेत्र से प्रभावित लड़ाकों ने यह संकेत देना शुरू कर दिया है कि जबरदस्त दबाव या उनके इलाकों का सिकुड़ने को उनकी हार नहीं माना जाना चाहिए।
आर्थिक रूप से कमर टूटी, अपहरण और फिरौती पर उतरे आतंकी
इस बीच इराक और सीरिया में छिड़ी जंग के कारण आर्थिक स्रोत सूखने के चलते आईएस के लड़ाके फिरौती और आपराधिक मामलों में लिप्त होने लगे हैं। आर्थिक टूटन के चलते अल कायदा की तरह आईएस के लड़ाके भी विदेशों से चंदा लेना चाहते हैं। इन दिनों इराक में आईएस के सबसे बड़े शहर मोसुल में इराक और कुर्द सेना अभियान चला रही है।
इस कारण 2014 में तेल व गैस के जिन भंडारों से आईएस को एक अरब डॉलर की आमदनी हुई थी वहां तक उनकी पहुंच नहीं हो पा रही है। अमेरिका के वित्त मंत्रालय में सहायक मंत्री डेनियल ग्लासर ने इसकी पुष्टि की।
आर्थिक रूप से आईएस की कमर टूटते देख मंगलवार देर रात से मोसुल में कुर्द सेना ने आईएस की घेराबंदी और तेज कर दी है जिसे देखकर मित्र देश इस लड़ाई को रक्का तक ले जाने की फिराक में हैं। टर्की के राष्ट्रपति ने यहां तक कह दिया कि रक्का की तरफ मित्र देशों की सेना का कूच न करना सबसे बड़ी गलती होगी।
इस तरह सिमट रही आईएस की अर्थव्यवस्था
तेल-गैस बिक्री के अलावा आईएस ने पिछले साल इराक में टैक्स व फिरौती के जरिए हर महीने तीन करोड़ डॉलर हासिल किए थे। जबकि इराक सरकार के सलाहकार हिशाम अल-हाशिमी के मुताबिक इस समय अकेले मोसुल में आईएस को हर महीने टैक्स लगाकर 40 लाख डॉलर मिल रहे हैं। 2014 में मोसुल पर कब्जा करते हुए आईएस ने बैंक डकैती से करोड़ों डॉलर कमाए थे। लेकिन अब उसे आर्थिक किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
नहीं हो पा रही आमदनी की भरपाई
पेरिस स्थित ‘सेंटर ऑफ द एनालिसिस ऑफ टेररिज्म’ नाम की संस्था का कहना है कि आमदनी में हो रही कमी की भरपाई करने के लिए आईएस फिरौती जैसी आपराधिक गतिविधियों से पैसा बनाने में जुट गया है। संस्था के मुताबिक 2015 में आईएस की आमदनी में फिरौती से मिलने वाली रकम की हिस्सेदारी 33 फीसदी थी जबकि 2014 ये 12 प्रतिशत रही।
लड़ाकों को नहीं मिलता अमेरिकी डॉलर में वेतन
सीरिया में इस्लामिक स्टेट का कामकाज पैसे की वजह से प्रभावित हो रहा है। वहां पहले लड़ाकों को अमेरिकी डॉलर में वेतन दिया जाता था लेकिन अब उन्हें सीरियाई पाउंड में तन्ख्वाहें मिल रही हैं। पत्रकार जायद अवद के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा तक उनकी पहुंच सिमट रही है। अमेरिकी मंत्री डेनियल ग्लासर ने भी कहा कि लड़ाकों के वेतनों में कटौती हो रही है।