लादेन का असली वारिस है अल-बगदादी!
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इराक़ के दो शहरों पर क़ब्ज़ा कर चुके इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक़ एंड लीवैंट (आईएसआईएल) के मुखिया अबू बकर अल-बगदादी अपनी पहचान सार्वजनिक करने और अपने रहने की जगह बताने में काफ़ी सतर्क रहे हैं।
उनकी केवल दो सत्यापित तस्वीरें ही मौजूद हैं और अल-क़ायदा के दिवंगत मुखिया ओसामा बिन लादेन और अल-जवाहिरी की तरह वो वीडियो संदेशों में नहीं दिखते।
यहां तक कहा जाता है कि उनके लड़ाके भी उनसे आमने-सामने बात नहीं करते। आईएसआईएल मुखिया अपने कमांडरों को संबोधित करते समय भी मास्क पहने रहते हैं और यही वजह है कि उनका उपनाम 'अदृश्य शेख' पड़ गया।
बगदादी एक रहस्यमयी शख्सियत!
बीबीसी के रक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर कहते हैं कि बग़दादी के पास ख़ुद को रहस्य बनाए रखने के लिए कई पर्याप्त कारण हैं। बग़दादी उनका असली नाम नहीं है लेकिन दुनिया उन्हें इसी नाम से जानती है।
उनके पूर्ववर्तियों में से एक अबू मुसाब अल-ज़रकावी की गोपनीय रिहाइश को आख़िरकार खोज निकाला गया था। ज़रकावी जाने पहचाने नाम थे और अपनी मृत्यु तक इराक़ के सबसे हिंसक जिहादी समूह का संचालन करते रहे थे। वह 2006 में अमेरिकी बमबारी में मारे गए।
हमारे संवाददाताओं के मुताबिक़ इराक़ में अल क़ायदा के मौजूदा अवतार आईएसआईएस का मुखिया एक रहस्यमयी शख्सियत हो सकता है, लेकिन उनका संगठन हज़ारों नए रंगरूटों को आकर्षित कर रहा है और मध्यपूर्व के सबसे सशक्त लड़ाकू संगठनों में एक बन गया है।
बेहतरीन संगठन
माना जाता है कि बगदादी का जन्म बगदाद के उत्तर में स्थित समारा में 1971 में हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के नेतृत्व में साल 2003 में इराक़ पर हुए हमले के दौरान वो इसी शहर की एक मस्जिद में मौलवी थे।
कुछ लोग मानते हैं कि सद्दाम हुसैन के शासनकाल से ही वो एक चरमपंथी जिहादी थे। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि चरमपंथ की ओर उनका झुकाव दक्षिणी इराक़ में स्थित कैंप बक्का में चार साल अमेरिकी हिरासत में रहने के दौरान हुआ। इस कैंप में अधिकांश अल-क़ायदा कमांडरों को रखा गया था।
वो इराक़ में अल-क़ायदा के नेता के रूप में उभरे। साल 2010 में इसके कई समूहों में से एक बाद में आईएसआईएस बन गया। यह उस समय सुर्खियों में आया जब इसने सीरिया के अल-नसरा के साथ विलय की कोशिश की।
वो अल-क़ायदा नेटवर्क के नेता जवाहिरी के वफ़ादार नहीं हैं। जवाहिरी ने आईएसआईएस को सिर्फ़ इराक़ पर ध्यान केंद्रित और सीरिया को अल-नसरा के हवाले छोड़ने को कहा था। बग़दादी और उनके लड़ाकों ने अल-क़ायदा मुख़िया की अपील का खुलेआम उल्लंघन किया, जिसके कारण कुछ विश्लेषक मानते हैं कि इस्लामी चरमपंथियों में उनकी रुतबा अब बढ़ गया है।
'लादेन का सच्चा वारिस'
वाशिंगटन पोस्ट में डेविड इग्नाशियस लिखते हैं, ''ओसामा बिन लादेन के सच्चे वारिस आईएसआईएस नेता अबू बकर अल-बगदादी हो सकते हैं।''
हालांकि पाकिस्तान, अरब प्रायद्वीप और उत्तरी अफ़्रीका में अल-क़ायदा की मौजूदगी के कारण जवाहिरी के पास अभी भी बड़ी ताक़त है।
लेकिन बग़दादी को सबसे संगठित और युद्ध के सबसे निर्मम रणनीतिकार के रूप में शोहरत हासिल है। विश्लेषकों का कहना है कि युवा जिहादियों में धार्मिक गुरु की छवि रखने वाले जवाहिरी की अपेक्षा आईएसआईएस के प्रति ज़्यादा आकर्षण का यह प्रमुख कारण है।
बगदादी पर एक करोड़ डॉलर का ईनाम
अक्टूबर 2011 में अमेरिकी अधिकारियों ने बगदादी को 'आतंकी' घोषित कर दिया था और उनके जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए पर एक करोड़ डॉलर (क़रीब 60 करोड़ रुपए) का ईनाम घोषित कर दिया था।
इसमें बगदादी के उपनामों- अबू दुआ और डॉक्टर इब्राहिम अवाद इब्राहिम अली अल-बद्री अल-समाराई का भी ज़िक्र है।
उनकी वास्तविक पहचान को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है इसलिए उनके रहने वाली जगह भी अस्पष्ट है। हालांकि कहा जाता है कि वो सीरिया के रक्का में थे। इसलिए दुनिया के सबसे दुर्दांत जिहादी संगठनों में से एक के मुखिया के बारे में जवाबों से ज़्यादा सवाल बरकरार हैं।