ये जेल क्या वाकई होटल है...

बीबीसी हिंदी Published by: Updated Mon, 28 Jan 2013 10:32 AM IST
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चंद रोज पहले ईरान के सांसदों के एक दल ने कुख्यात इविन जेल का दौरा किया और इसे राजनीतिक बंदियों के लिए एक 'होटल' करार दिया।
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राजधानी तेहरान स्थित इस जेल का छह घंटे मुआयना करने के बाद इन सांसदों में से एक सफर नईमी कहते हैं कि अब मैं इसे इविन जेल की बजाए इविन होटल ही कहूंगा।

लेकिन हैरानी की बात ये है कि इस जेल में बंद रहने वाले कई कैदी यहां अपनी खराब हालत की शिकायत करते हैं। इनमें ज्यादातर वो कैदी हैं जिन्हें ईरान में साल 2009 में चुनाव के बाद हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया गया था।


अभी पिछले ही महीने की बात है जब 20 कैदियों ने जेल प्रमुख ने नाम एक पत्र लिखकर उनकी यह कहते हुए आलोचना की थी कि बीमार कैदियों को दवा-दारु नहीं मिल रही है और उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित बताया था।

'घर की रसोई से बेहतर खाना'
ऐसा प्रतीत होता है कि सांसदों का जेल का यह दौरा इस तरह की शिक़ायतों को दूर करने का प्रयास है। मोहम्मदरेजा मोहसिनी सानी नामक एक सांसद कहते हैं कि कैदियों को सुरक्षा, स्वास्थ्य, खान-पान और जेल में मिल रही सुविधाओं को लेकर कोई शिकायत नहीं है।

सफर नईमी कहते हैं कि जेल का अस्पताल बड़ा अच्छा है और रसोई में मिलने वाला खाना भी तरह-तरह का है। सफर नईमी कहते हैं कि उन्होंने जेल में पूर्व राष्ट्रपति अकबर हाशमी रफसनजानी की बिटिया फाजिया के अलावा अन्य राजनीतिक कैदियों से भी मुलाकात की है।

वो कहते हैं कि फाजिया उन क़ैदियों में से एक हैं जिन्होंने इविन जेल में खाने के बारे में शिक़ायत की थी। फाजिया सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए छह महीने जेल की सजा काट रही हैं।

सफर नईमी कहते हैं कि इविन का खाना मेरे घर के खाने से बेहतर है। फाजिया शिकायत इसलिए करती हैं कि क्योंकि वो अलग-अलग तरह का खाना खाकर बिगड़ गई हैं, ऐसा खाना जो आम लोगों को नहीं मिलता।

मोहम्मदरेजा एक सुधारवादी राजनीतिक कार्यकर्ता हैं जिन्हें विपक्षी नेती मीर-हुसैन मौसावी के समर्थन के बदले इविन में पांच महीने एकांत में बिताने की सजा मिली थी।

उन्होंने बीबीसी को बताया कि इविन जेल में मुख्य समस्या सुविधाओं को लेकर नहीं है, क़ैदियों को जिस तरह अकेले रखकर सज़ा दी जाती है, परिवार वालों से मिलने या फ़ोन पर बात नहीं करने दिया जाता, दिक्कत इससे होती है।

वो कहते हैं कि एकांत में कैदी का दम घुटता है। वह दुनिया से कट जाता है और उस पर जांचकर्ताओं का दबाव रहता है। ये खाने की बाद नहीं है, दबाव शरीर से ज्यादा मन पर रहता है।

तबीयत बिगड़ने का खतरा
अबुल फजल गडियानी, ईरान के सबसे पुराने राजनीतिक बंदियों में से एक हैं। उनकी पत्नी जाहरा रहीमी ने बीबीसी को बताया कि उन्हें अपने पति की तबीयत बिगड़ने का डर लगा रहता है।

वो बताती हैं कि गडियानी को बीते साल लगा दिल का दौरा पड़ा है और उन्हें गलत दवा दे दी गई जिससे उनकी तबीयत और गड़बड़ा गई।

वो ईरान के वरिष्ठ पत्रकार होडा साबेर का उदाहरण देती हैं जिनकी सात महीने पहले भूख हड़ताल के बाद इविन जेल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। वो कहती हैं कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए पर्याप्त कोशिश नहीं की।

वो आशंका जताती हैं कि ऐसा उनके पति के साथ भी हो सकता है। अबुल फजल गडियानी को छह वर्ष कारावास की सजा इसलिए मिली क्योंकि उन्होंने देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनई और राष्ट्रपति मेहमूद अहमदीनेजाद का अपमान किया था।

चंद रोज पहले उन्हें तेहरान के बाहरी इलाके में बनी गीजल हसन जेल में भेज दिया गया जहां जाहरा रहीमी के मुताबिक उन्हें हत्या और मादक पदार्थों की तस्करी के दोषियों के साथ एक ही वार्ड में रखा गया है।

इविन जेल की शिकायत करने वालों को सजा देने का एक तरीका यह भी है कि उन्हें इस तरह दूसरी जेलों में भेज दिया जाता है।

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