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कर्ज के चलते इराक में फंसी भारतीय नर्सें

Wed, 18 Jun 2014 10:42 AM IST
Updated Wed, 18 Jun 2014 10:42 AM IST
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Indian nurses trapped by debt in Iraq

इराक के तिकरित शहर के टीचिंग अस्पताल के नए प्रबंधन ने भारतीय नर्सों को ये आश्वासन तो दिया है कि वे सुरक्षित हैं, लेकिन उन्होंने नर्सों का बकाया वेतन के भुगतान से इनकार किया है।

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इराक में फंसी भारतीय नर्स मरीना जोस ने बीबीसी हिंदी को बताया कि उन अधिकारियों ने खुद को 'नया प्रबंधन' बताया है। मरीना जोस ने ही तिकरित में नर्सों की मुसीबतों के बारे में सबसे पहले आवाज उठाई थी।
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उन्होंने कहा, "नए प्रबंधन ने हमें आश्वासन दिया है कि वे आज के बाद के वेतन का भुगतान करेंगे लेकिन बकाये वेतन के लिए हमें पुराने प्रबंधन और भारतीय दूतावास से बात करनी होगी।"

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बकाया वेतन देने से इंकार

Indian nurses trapped by debt in Iraq

तिकरित के अस्पताल में फंसी 46 नर्सों को पिछले कुछ महीनों से वेतन नहीं मिला है। इराक में सेना के साथ संघर्ष के बीच सुन्नी चरमपंथियों के संगठन आईएसआईएस ने अस्पताल पर कब्जा कर रखा है। अस्पताल में फंसी सभी 46 नर्सें दक्षिणी केरल की रहने वाली हैं। इनकी उम्र 24 से 40 साल के बीच है।

इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि इराक़ में फंसे भारतीयों के बारे में जानकारी देने के लिए 24 घंटे काम करने वाला एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है और वरिष्ठ राजनयिक सुरेश रेड्डी को इराक भेजा जा रहा है।

अस्पताल में काम करने वाली नर्सों के दो महीने से चार महीने तक का वेतन बकाया है। वेतन के रूप में उन्हें 600 अमेरिकी डॉलर से लेकर 850 अमेरिकी डॉलर के बीच में भुगतान किया जाता है।

भारत लौटने की चाहत

Indian nurses trapped by debt in Iraq

बकाया वेतन की समस्या के कारण ये नर्सें तिकरित अस्पताल में काम करने से परहेज करने लगी हैं।

मरीना ने बताया, "हम 14 नर्सें तुरंत भारत लौट जाना चाहती हैं। बाकी नर्सें इराक में दूसरे सुरक्षित जगहों पर काम करना चाहती हैं क्योंकि घर लौटने से पहले उन्हें अपने कर्ज चुकाने हैं।"

यह कर्ज उन्होंने नौकरी खोजने वाले एजेंटों को पैसे चुकाने के लिए ले रखा है। मरीना बताती हैं, "एजेंटों को देने के लिए ली गई कर्ज की रकम डेढ लाख से दो लाख रुपए तक की है।"

हालांकि नए प्रबंधन अधिकारियों ने नर्सों को जानकारी दी है कि अगर इराक में कहीं और नौकरी चाहिए तो इसके लिए भारतीय दूतावास से बात करनी होगी।

सामान्य भोजन

Indian nurses trapped by debt in Iraq

अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस संस्था के अधिकारियों से उन्होंने फोन पर बताया है कि जो भारत लौटना चाहते हैं उन्हें इराक की सड़कों पर फिर से शांति बहाल होने तक का इंतजार करना होगा।

मंगलवार को भी नर्सों ने कोई काम नहीं किया और अस्पताल परिसर के भीतर दिन भर अपने वार्ड में बनी रहीं। वे बताती हैं, "आज हमें सामान्य खाना दिया गया।"

यहां तक कि अस्पताल में काम करने वाले इराकी कर्मचारी भी अपने-अपने घरों में बने रहे। मंगलवार को अस्पताल के केवल आपातकालीन विभाग ने काम किया।

कर्ज चुकाना है

Indian nurses trapped by debt in Iraq

अस्पताल में फंसी दूसरी नर्स श्रुति की बहन कीर्ति ने दक्षिणी केरल के कोट्टयम से बीबीसी हिंदी को फ़ोन पर बताया, "आज मेरी बहन ने हम सबसे बात की। उन्होंने बताया कि आज उन्हें सामान्य खाना दिया गया।"

नर्सों ने केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी से बात की और बकाया वेतन के भुगतान का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने जानकारी दी। अधिकारी ने कहा, "कुछ नर्सों का कहना है कि वे इराक में दूसरे सुरक्षित ठिकानों पर नौकरी करना चाहती हैं क्योंकि उन्हें अपना कर्ज चुकाना है।"

पहचान छिपाए रखने के आश्वासन पर अधिकारी ने बताया, "लेकिन हमारी पहली चिंता उनकी सुरक्षा है। हां, कर्ज का मुद्दा सरकार के सामने है लेकिन अभी इस मामले में किसी तरह का कोई फैसला नहीं लिया गया है।"

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