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लापता विमान की खोज में भारत भी जुटा

Fri, 14 Mar 2014 03:13 PM IST
Updated Fri, 14 Mar 2014 03:13 PM IST
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india searchs missing aircraft in indian ociean

अमेरिका का कहना है कि मलेशियन एयरलाइंस के लापता विमान की खोज का दायरा अब पश्चिम में हिंद महासागर की तरफ़ बढ़ गया है। विमान की खोज के लिए अमेरिकी नौसेना अपना एक विध्वंसक पोत, यूएसएस किड, मलेशिया के पश्चिमी तट की ओर भेज रही है।

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एक अमेरिकी अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि लापता विमान की खोज का दायरा हिंद महासागर में बढ़ाने का मतलब यह नहीं है कि इस बारे में जांचकर्ताओं को कोई ख़ास सुराग मिले हैं।
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खोज का दायरा बढ़ाने का क़दम ऐेसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी मीडिया में ख़बरें आ रही हैं कि रडार से ग़ायब होने के कुछ घंटे बाद तक विमान एक सेटेलाइट को जानकारी भेज रहा था। लेकिन इस बात की अभी तक आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है।
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व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्नी ने कहा, "नई जानकारी मिलने से जांच का दायरा बढ़ाने के लिए हम हिंद महासागर में खोज का हिस्सा बन सकते हैं। हम मलेशिया को खोज में मदद कर रहे हैं ताकि हमें ये पता चल सके कि विमान के साथ क्या हुआ था। हम मलेशिया सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिल कर काम रहे हैं।"

कुआलालंपुर से बीजिंग जा रहा ये विमान बीते शनिवार को उड़ान भरने के कुछ घंटे के भीतर ही लापता हो गया था। इसमें 239 लोग सवार थे।

खोज में भारत शामिल
विमान को खोजने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है लेकिन अभी तक इसमें कामयाबी नहीं मिल पाई है। इस बीच मलेशिया सरकार के अनुरोध के बाद भारतीय नौसेना, वायु सेना और तट रक्षक बल भी अब विमान की खोज में जुट गए हैं।

भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि खोज का केंद्र, पश्चिम में अंडमान सागर की ओर बढ़ने की वजह से मलेशियाई सरकार ने उससे मदद मांगी है। अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विमान के लापता होने के कई घंटे बाद भी यह इंजन डेटा भेज रहा था।

अमेरिकी अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि विमान में लगे बोइंग सिस्टम ने रडार से लापता होने के बाद भी चार घंटे तक एक उपग्रह को सिगनल भेजे थे।

एक अनाम अधिकारी ने बताया कि बोइंग 777-200 सैटेलाइट को डेटा नहीं भेज रहा था बल्कि एक स्थापित संपर्क को सिगनल भेज रहा था। अगर यह बात सही है तो इससे साबित होता है कि विमान रडार से लापता होने के बाद भी उड़ रहा था।

अधिकारी ने कहा कि बोइंग एक ऐसी सेटेलाइट सेवा देती है जिससे उड़ान के दौरान विमान के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। मलेशियन एयरलाइंस ने यह सेवा नहीं ले रखी है लेकिन विमान अपने आप ही उपग्रह को संदेश भेज रहा था।

चार घंटे की उड़ान
अधिकारी ने कहा कि इस नई जानकारी से जांचकर्ताओं को लगता है कि संभव है कि रडार से लापता होने के बाद विमान ने 1600 किमी से अधिक का सफ़र तय किया था। विमान में चार घंटे तक उड़ने के लिए ईंधन था।

इस बीच दो अमेरिकी अधिकारियों ने एबीसी न्यूज से कहा कि विमान में मौजूद दो संचार प्रणालियों ने अलग-अलग समय पर आंकड़े भेजना बंद किया था। इससे इस बात के संकेत मिलते हैं कि विमान के साथ कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ था।

अधिकारियों ने बताया कि डेटा रिपोर्टिंग सिस्टम ने अंतर्राष्ट्रीय समय के मुताबिक़ शाम पाँच बजकर सात मिनट पर काम करना बंद किया था जबकि ट्रांसपोंडर इसके 14 मिनट बाद बंद हुआ था। ट्रांसपोंडर विमान की जगह, ऊंचाई और पहचान के बारे में जानकारी भेजता है।


इससे पहले गुरुवार को मलेशिया के कार्यवाहक परिवहन मंत्री हिशामुद्दीन हुसैन ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के दावे को ख़ारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इंजन निर्माता रॉल्स रॉयस और मलेशियाई एयरलाइंस ने इसे ग़लत बताया है।

हुसैन ने कहा, "विमान से जो अंतिम सिग्नल मिला था उसमें कहा गया था कि सब कुछ ठीक है।"

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