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दक्षिण सूडान में जातीय हिंसा, सैकड़ों लोगों की हत्या

Tue, 22 Apr 2014 02:59 PM IST
Updated Tue, 22 Apr 2014 02:59 PM IST
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Hundreds were killed in ethnic violence in southern Sudan

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दक्षिण सूडान के बेन्टियू में पिछले हफ़्ते विद्रोहियों के क़ब्ज़े के बाद एक जातीय समूह के सैकड़ों लोगों को मार दिया गया है। बेन्टियू प्राकृतिक तेल से सम्पन्न क्षेत्र है।

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दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र के मिशन ने एक बयान में कहा है कि इन लोगों को एक मस्जिद, एक चर्च और एक अस्पताल में निशाना बनाया गया है।

इस बयान में कहा गया है कि स्थानीय रेडियो स्टेशन से नफ़रत भरे भाषण प्रसारित किए गए जिनमें कहा गया कि कुछ समूहों को बेन्टियू से चले जाना चाहिए। इसमें पुरुषों से कहा गया कि वे महिलाओं के साथ बलात्कार करें।

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बड़ी संख्या में पलायन

Hundreds were killed in ethnic violence in southern Sudan

नुएर समुदाय को विद्रोही नेता रिएक मशार के समर्थक के तौर पर देखा जाता है। वहीं राष्ट्रपति सल्वा कीर देश के सबसे बड़े समूह डिंका के सदस्य हैं।

हालांकि इन दोनों ही नेताओं के विभिन्न समुदायों में बड़ी संख्या में समर्थक हैं, लेकिन ऐसी कई ख़बरें हैं जिनमें कहा गया है कि विद्रोही, डिंका समूह के लोगों को मार रहे हैं और सेना नुएर समुदाय के लोगों को निशाना बना रही है।

देश में दिसंबर 2013 में इस टकराव की शुरुआत हुई थी। उसके बाद से अब तक दस लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़कर भाग गए हैं। दक्षिण सूडान दुनिया के सबसे ग़रीब देशों में से एक है।

200 से अधिक नागरिकों की हत्या

Hundreds were killed in ethnic violence in southern Sudan

दक्षिण सूडान के जानकार जेम्स कॉपनेल का कहना है कि देश में गृह-युद्ध की स्थिति है जहां बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का हनन हुआ है। बेन्टियू शहर में इस तरह के मामले सबसे अधिक चौंकाने वाले हैं।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दक्षिण सूडान में ग़ैर-नुएर समुदाय के लोगों और विदेशियों को चुन-चुनकर मारा गया है।

कुछ ख़बरों में कहा गया है कि एक मस्जिद में पनाह लिए 200 से अधिक नागरिकों की हत्या की गई है। इनमें कहा गया है कि अस्पताल में नुएर समुदाय के स्त्री-पुरुष और बच्चों को भी मारा गया है।

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'लाशों के ढेर'

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संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी टोबी लेंज़र रविवार और सोमवार को बेन्टियू में मौजूद थे। लेंज़र ने बीबीसी के 'फोकस ऑन अफ्रीका' कार्यक्रम में बताया कि उन्होंने शहर में लाशों के ढेर देखे हैं। इन लोगों को बीते हफ़्ते मारा गया था और ये सभी लोग आम नागरिक लग रहे थे।

लेंज़र ने ये भी कहा कि मारे गए अधिकतर लोग सूडान के क़ारोबारी थे और ज़्यादातर का संबंध दारफ़ूर से था।

दक्षिण सूडान के जानकार जेम्स कॉपनेल का कहना है कि इन लोगों को निशाना बनाने की वजह शायद ये रही होगी कि उन्हें राष्ट्रपति सल्वा कीर का समर्थक माना जाता है।

वहीं एक विद्रोही सूत्र का कहना है कि मस्जिद में मारे गए अधिकतर लोग दरअसल सैनिक थे जो वर्दी में नहीं थे।  संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी लेंज़र का कहना है कि दक्षिण सूडान में हालात बहुत गंभीर हैं।

बदले की हिंसा की बढ़ी घटनाएं

Hundreds were killed in ethnic violence in southern Sudan

उनका कहना है कि सूडान की सीमा पर संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों के ठिकाने पर 22,000 से अधिक लोगों ने शरण ले रखी है जिनमें बहुसंख्यक समुदाय के परिवार भी शामिल हैं।

लेंज़र के मुताबिक इन लोगों का कहना है, ''बदले और हिंसा की घटनाएं इतनी बढ़ गई हैं कि आप कह नहीं सकते कि आगे क्या होगा।''

उनका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के इस ठिकाने को इतने अधिक लोगों की ज़रूरतों के हिसाब से नहीं बनाया गया था और मौजूदा हालात ये हैं कि एक व्यक्ति को पीने के लिए बस एक लीटर पानी मिल रहा है और एक शौचालय का इस्तेमाल 350 लोग कर रहे हैं।

बेन्टियू, यूनिटी स्टेट की राजधानी है जो प्राकृतिक तेल संपदा से संपन्न है। यहां क़ब्ज़ा करना महत्वपूर्ण है क्योंकि दक्षिण सूडान तेल से मिलने वाले राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा बेन्टियू से ही मिलता है।

हाल के दिनों बढ़ी घटनाएं

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संघर्ष-विराम के लिए इस वर्ष जनवरी में एक समझौते पर दस्तख़त किए गए थे लेकिन हाल के दिनों में हिंसा की घटनाओं में इज़ाफ़ा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पिछले हफ़्ते ही बोर कस्बे पर हमले में कम से कम 58 लोग मारे गए थे जो युद्ध अपराध का मामला हो सकता है।

यहां पिछले साल लड़ाई तब शुरू हुई थी जब राष्ट्रपति सल्वा कीर ने रिएक मशार पर तख़्ता पलट की साज़िश रचने का आरोप लगाया था। मशार तब उप-राष्ट्रपति थे और उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया गया था। उन्होंने आरोपों से इनकार किया लेकिन बाद में ख़ुद विद्रोही गुट बना लिया था।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दक्षिण सूडान में करीब 8,500 शांतिरक्षक हैं। दक्षिण सूडान वर्ष 2011 में सूडान से अलग होकर नया देश बना था।

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