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बांग्लादेश में हिंदू पुजारी की हत्या, आईएस ने ली जिम्मेदारी
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 07 Jun 2016 05:30 PM IST
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बांग्लादेश में संदिग्ध इस्लामी चरमपंथियों के ताजा हमले में एक हिंदू पुजारी की मौत हो गई है। 70 वर्षीय आनंद गोपाल गांगुली का लगभग सिरकटा शव पश्चिमी झेनाइदाह जिले में उनके मंदिर के नजदीक पाया गया है। उधर, पुलिस ने कथित हत्यारों के खिलाफ कार्रवाई में तीन संदिग्ध इस्लामी चरमपंथियों को मार गिराया है। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ली है।
आनंद गोपाल गांगुली ऐसे तीसरे व्यक्ति हैं जिनकी पिछले दो दिन में ऐसी हत्या की गई है। उप पुलिस प्रमुख गोपीनाथ कांजीलाल ने बताया, "वो सुबह एक हिंदू के घर पूजा करवाने की बात कहकर घर से निकले थे। बाद में किसानों को उनका शव एक धान के खेत में मिला।" रविवार को एक ईसाई कारोबारी की हत्या और ऐसे ही हमलों की जांच कर रहे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की पत्नी की हत्या हो गई थी।
पुलिस का कहना है कि पिछले साल जनवरी से अब तक 40 से ज्यादा ऐसे लोगों की हत्या हो चुकी है जिन्होंने चरमपंथी के मुताबिक इस्लाम का अपमान किया था। अब उदारवादी इस बात से भयभीत हैं कि ऐसे हमलों का अगला निशाना कौन बन सकता है?
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आलोचकों का आरोप है कि बांग्लादेश की सरकार देश में हिंसा की समस्या से निपटने में असफल रही है। पिछले महीनों में इस्लामी चरमपंथियों ने भिन्न पृष्ठभूमि के लोगों की हत्याएं की हैं जिनमें धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगर, शिक्षाविद्, समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता, शिया, सूफी, अहमदी मुसलमान, ईसाई, और हिंदू धार्मिक अल्पसंख्यक शामिल रहे हैं।
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आनंद गोपाल गांगुली ऐसे तीसरे व्यक्ति हैं जिनकी पिछले दो दिन में ऐसी हत्या की गई है। उप पुलिस प्रमुख गोपीनाथ कांजीलाल ने बताया, "वो सुबह एक हिंदू के घर पूजा करवाने की बात कहकर घर से निकले थे। बाद में किसानों को उनका शव एक धान के खेत में मिला।" रविवार को एक ईसाई कारोबारी की हत्या और ऐसे ही हमलों की जांच कर रहे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की पत्नी की हत्या हो गई थी।
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पुलिस का कहना है कि पिछले साल जनवरी से अब तक 40 से ज्यादा ऐसे लोगों की हत्या हो चुकी है जिन्होंने चरमपंथी के मुताबिक इस्लाम का अपमान किया था। अब उदारवादी इस बात से भयभीत हैं कि ऐसे हमलों का अगला निशाना कौन बन सकता है?
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आलोचकों का आरोप है कि बांग्लादेश की सरकार देश में हिंसा की समस्या से निपटने में असफल रही है। पिछले महीनों में इस्लामी चरमपंथियों ने भिन्न पृष्ठभूमि के लोगों की हत्याएं की हैं जिनमें धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगर, शिक्षाविद्, समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता, शिया, सूफी, अहमदी मुसलमान, ईसाई, और हिंदू धार्मिक अल्पसंख्यक शामिल रहे हैं।