फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   Ground report: Jaffna where thousands still missing

ग्राउंड रिपोर्ट: जाफना, जहां हजारों आज भी लापता

Thu, 12 Oct 2017 06:36 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Thu, 12 Oct 2017 06:36 PM IST
विज्ञापन
Ground report: Jaffna where thousands still missing
एलटीटीई का गढ़ जाफना कभी गोलियों और बमों की आवाज से गूंजता रहता था। साल 2009 में एलटीटीई और श्रीलंका की सेना के बीच गृहयुद्ध खत्म हुआ जिससे यहां शांति आई। लोगों का गायब होना बंद हो गया। सड़कों पर गोलियों से छलनी शरीर मिलना बंद हुआ। लोगों के घरों के पास या ऊपर बम नहीं फटते। आज जाफना में अच्छी सड़कें हैं।
विज्ञापन


होटल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स नए हैं, लेकिन जिंदगी में अजीब सा ठहराव है। विदेशी पर्यटकों के अलावा यहां सड़कों पर हाथों में बंदूक लिए श्रीलंका के सैनिक भी दिखते हैं। लेकिन एलटीटीई और श्रीलंका के बीच दशकों चले युद्ध में करीब एक लाख लोगों के मारे जाने के बाद आज जाफना कहां है?
विज्ञापन


'गायब लोग'
जिस जमीन पर सीमेंट और नमक की फैक्ट्रियां थीं, जहां के तटीय इलाकों में मछली का व्यापार फल-फूल रहा था, वहां व्यापारिक गतिविधियां ठप्प क्यों हैं? जाफना से करीब 60 किलोमीटर पर किलिनोची है। एलटीटीई कभी इसे अपनी राजधानी बताती थी। यहीं सड़क के किनारे, एक भव्य हिंदू मंदिर के सामने एक टेंट में सिमी हडसन 207 दिनों से प्रदर्शन कर रही थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि गृहयुद्ध खत्म होने के बाद से उनका बेटा लापता है। वो एलटीटीई के सी-टाइगर्स (समुद्री टाइगर्स) का सदस्य था। सिमी ने जोर से अपने बेटे की तस्वीर को पकड़ा हुआ था। बोलते बोलते वो रोने लगतीं।

अपनों का इंतजार

Ground report: Jaffna where thousands still missing

सिमी कहती हैं, "युद्ध खत्म होने के बाद मेरे बेटे को ओमथाई चेक प्वॉइंट पर गिरफ्तार किया गया। उसे लड़ाई के बाद क्यों गिरफ्तार किया गया? उसे अदालत में पेश किया जाना चाहिए था और सजा दी जानी चाहिए थी।"

टेंट की दीवारें गायब लोगों की तस्वीरों से पटी पड़ी थीं। तस्वीरों से बच्चे, बूढ़े, जवान, सभी हमारी ओर एकटक देख रहे थे। पास ही जयशंकर परमेश्वरी बैठी हुई थीं। उनके हाथ में एक बोर्ड था जिस पर तीन तस्वीरें थीं, भाई पी नाथन, पति जयशंकर और बहन के बेटे सत्य सीलन की।

तीनों सालों से 'लापता' हैं। रेड क्रॉस से लेकर श्रीलंका सरकार तक, वो अपनी फरियाद लेकर सभी के पास जा चुकी थीं लेकिन उन्हें अभी भी अपने अपनों का इंतजार है। हडसन को विश्वास है कि उनका बेटा जिंदा है और उसे किसी गुप्त सरकारी कैंप में रखा गया है।

जमीन पर कब्जा

यहां से कुछ दूर एक बड़े सैनिक कैंप के बगल में केपैपिलो गांव के कई परिवार सेना से मांग कर रहे हैं कि वो युद्ध के दौरान कब्जा की गई उनकी जमीन वापस कर दें। कुछ साल पहले तक सैनिक कैंप के सामने इस तरह का प्रदर्शन करना भी सोच से परे था।

जाफना विश्वविद्यालय में मनोचिकित्सा के प्रोफेसर और किताब 'ब्रोकेन पल्मायरा' के सहलेखक दया सोमसुंदरम कहते हैं कि लोगों के दिलों पर जो चोट लगी है, वो उससे उबर नहीं पाए हैं। 'ब्रोकेन पल्मायरा' में उन्होंने लोगों के सामने आई चुनौतियों का जिक्र किया है।

अपनों की मौत पर शोक नहीं मनाने दिया

Ground report: Jaffna where thousands still missing
vcvc

वो कहते हैं, "यहां शांति नहीं है। जो लोग विदेश गए वो वापस नहीं आए। जिनके अपने लोग गायब हैं, वो सवाल पूछ रहे हैं। जब मैं अपने मरीजों से मिलता हूं, मुझे उनके दर्द का एहसास होता है। लोगों को सिस्टम, सरकार पर भरोसा नहीं है। पिछली सरकार ने उन्हें अपनों की मौत पर शोक नहीं मनाने दिया।"

सरकार का कहना है कि वो जमीन लौटाने के लिए तैयार है और वो कोई गुप्त कैंप नहीं चला रही है। सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर रजीता सेनरत्ने आश्वास्त करते हैं, "नहीं, सरकार कोई गुप्त कैंप नहीं चलाती। सभी को हटा लिया गया है। परिवारों को लगता है कि उनके लोग जिंदा है। हम जमीन भी छोड़ रहे हैं लेकिन प्रक्रिया धीमी है।"

जब हम जाफना विश्वविद्यालय पहुंचे तो वहां स्थानीय कर्मचारी विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे। मांग का विषय सैलरी जैसे मुद्दों से जुड़ा था। एक छात्रा ने कहा, "मुझे युद्ध के बारे में कुछ याद नहीं। मैं वही जिंदगी जी रही हूं जो पहले जी रही थी।" एक दूसरे छात्र ने करियर के सीमित अवसरों की शिकायत की।

ज्यादा अधिकारों की मांग

भारत की तरह श्रीलंका में राज्य तो हैं लेकिन यहां हुकूमत केंद्र की ही चलती है। स्थानीय प्रशासन के नाम पर यहां प्रोविंशियल काउंसिल हैं लेकिन पुलिस की नियुक्ति और जमीन के रजिस्ट्रेशन जैसे अधिकार केंद्र सरकार के पास हैं। काउंसिल राजनीतिक सुधार की बात करता है और उसकी मांग है कि उसे और अधिकार दिए जाएं।

डॉक्टर के सर्वेश्वरन उत्तरी प्रोविंशियल काउंसिल के सदस्य हैं। वो कहते हैं, "अगर केंद्र सरकार चाहे तो वो प्रोविंशियल काउंसिल को शक्तिहीन कर सकती है। चाहे गवर्नर हो या फिर मुख्य सचिव, उनकी नियुक्तियों पर निर्णय राष्ट्रपति के हाथ में होता है। उनके सहारे राष्ट्रपति यहां राज्य कर सकता है।"

भारत का नमक

Ground report: Jaffna where thousands still missing

इन सभी मुद्दों के कारण जाफना के लिए अतीत को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना आसान नहीं रहा है। लेकिन अर्थव्यवस्था को लेकर की जा रही सरकारी कोशिशों का क्यों असर नहीं हो रहा है?

जाफना चेंबर ऑफ कॉमर्स उपाध्यक्ष आर जेयासेगरन कहते हैं, "उद्योग तहस-नहस हो गए हैं। समुद्री तट की एकड़ों निजी और उपजाऊ जमीन पर सेना का कब्जा है। हम भारत से नमक आयात कर रहे हैं। सीमेंट फैक्ट्रियां खत्म हो गई हैं। सभी समस्याओं का हल स्थायी राजनीतिक हल है।"

वो कहते हैं, "हमें आजादी नहीं है। हमें और शक्तियां चाहिए।" उधर उत्तरी प्रोविंस के गवर्नर रेजिनाल्ड कुरे मानते हैं कि काउंसिल के पास जो शक्तियां है वो उसका इस्तेमाल करे।

वायदे कब पूरे करेगी सरकार
के गुरुपरन जाफना विश्वविद्याल में वरिष्ट लेक्चरर और कानून विभाग के प्रमुख हैं। उन्होंने बताया, "लोग इस सवाल के मायने ढूंढ रहे हैं कि हमारे जिंदा रहने का क्या मतलब है, क्योंकि लोग सोच रहे हैं कि हम राजनातिक और सामाजिक तौर पर किस दिशा में जा रहे हैं।"

केंद्र सरकार को नहीं लगता कि श्रीलंका में तमिल चरमपंथ एक बार फिर सिर उठाएगा, उधर जाफना में लोग पूछ रहे हैं कि सरकार उनसे किए वायदे कब पूरे करेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed