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सरकार तय कर रही है बौद्ध भिक्षु क्या खाएं

Wed, 28 Nov 2012 09:32 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Wed, 28 Nov 2012 09:32 AM IST
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government is deciding what to eat buddhist monk
श्रीलंका में बौद्ध भक्तों से भिक्षुओं को ऐसा भोजन दान में दिलाने की तैयारी की जा रही है, जिसे खाकर भिक्षु बीमार न हो सकें। इसके लिए दान में दिए जाने वाले परंपरागत भोजन से हटकर एक विशेष प्रकार के भोजन की सूची बनाई जा रही है।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसे बौद्ध भिक्षुओं की तादाद बढ़ती जा रही है जो पेट और पाचन से जुड़ी मुश्किलें झेल रहे हैं। ये बौद्ध भिक्षु चर्बी बढ़ाने वाले भोजन की वजह से मधुमेह और मोटापे जैसे रोगों से पीड़ित हैं। परंपरागत रूप से भिक्षु अपने लिए खाना नहीं पकाते हैं और भक्तों द्वारा दिए गए दान पर ही निर्भर रहते हैं।
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दान का खाना
कोलंबो में बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहना है कि कुछ मौकों पर भिक्षुओं को पांच वक्त का भोजन दान में मिलता है। हालांकि इन भिक्षुओं को मिलने वाला अधिकांश भोजन शाकाहारी होता है लेकिन अधिकारियों को चिंता इस बात की है कि ये भोजन हमेशा सेहतमंद नही होता।
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श्रीलंका के समाचार पत्र डेली मिरर के हवाले से स्वास्थ्य मंत्री मैथ्रीपाला श्रीसेना का कहना है, "धार्मिक आस्था और विश्वास के चलते अधिकांश श्रद्धालु इन बौद्ध भिक्षुओं को ऐसा भोजन देते हैं, जिसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा काफी ज्यादा होती है। बौद्ध भिक्षुओं के पास इसे स्वीकार करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होता। ये दौर साल भर लगातार चलता है।"

मंत्री बताते हैं कि स्थिति इसलिए और बिगड़ जाती है क्योंकि ये भिक्षु वजन बढ़ने से रोकने के लिए किसी शारीरिक गतिविधि या व्यायाम में हिस्सा नहीं लेते। डेली मिरर के अनुसार भोज्य पदार्थों की नई सूची को स्वास्थ्य और पोषण विशेषज्ञ के निर्देश पर तैयार किया जा रहा है।

सेहतमंद भोजन की सलाह
इन भिक्षुओं को सलाह दी गई है कि वो खाने में फल, सब्ज़ी और चावल का अधिक सेवन करें। ज्यादा पानी पिएं और गेहूं जैसे अनाज पर आधारित खाद्य पदार्थों में कटौती करें। स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को ये भी निर्देश दिया है कि वो सभी अस्पतालों में भिक्षुओं के लिए एक विशेष वार्ड बना दें।


हालांकि, देश के एक प्रमुख बौद्ध भिक्षु माडुलावे सोबिथा ने सरकार की इस पहल को खारिज कर दिया है।उन्होंने बीबीसी की सिंहला सेवा को बताया," हजारों साल से भक्त बौद्ध भिक्षुओं को परंपरागत रुप से इन्हीं भोजन की पेशकश करते आए हैं। लेकिन ये तय करना भिक्षुओं का काम है कि उनके लिए क्या उपयुक्त है।" वो कहते हैं कि "हमें उसी से संतोष करना चाहिए जो कुछ भी हमें दिया जाता है, हमें किसी से भी कुछ पाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।”

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