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'बदले की कार्रवाई में 16 को एक साथ फांसी'
Updated Sat, 26 Oct 2013 05:22 PM IST
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दक्षिण-पूर्वी ईरान में 16 विद्रोहियों को फांसी पर लटका दिया गया है। ये कार्रवाई उस हिंसा के जवाब में की गई है जिसमें 17 सीमा सुरक्षा गार्ड मारे गए थे।
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सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मर्ज़िया के हवाले से कहा गया है कि, “विद्रोही सत्ता के लिए ख़तरा माने जानेवाले गुट से जुड़े हुए थे।”
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विद्रोहियों को सरावान के उत्तर-पश्चिम में स्थित ज़ेहेदान की जेल में फांसी पर लटकाया गया। ये वही जगह है जहां पिछली रात सीमा पर हत्याएं हुई थीं।
ये साफ नहीं है कि फांसी पर लटकाए गए विद्रोही सीमा पर हुई हत्याओं से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे या नहीं।
सरावान इलाक़े से सांसद हियातउल्लाह मीरमुरादज़ेही ने हमलों के लिए क्रांति विरोधी गुरिल्ला को दोषी ठहराया है। हालांकि उन्होंने एक स्थानीय एजेंसी से ये भी कहा है कि ये बात पुष्ट नहीं है कि जैश अल अलद नाम के गुट ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है।
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'भेदभाव'
हाल के वर्षों में एक सुन्नी हथियारबंद गुट जुन्दल्लाह ने सरकार के खिलाफ़ कई हमलों को अंजाम दिया है। सिस्तान-बलूचिस्तान की सुन्नी मुस्लिम आबादी ईरान की शिया नेतृत्व वाली सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाती रही है।
ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज़ एजेंसी (इस्ना) ने भी फांसी की ख़बर दी है।
शुक्रवार को सीमा पर हुई हिंसा के बारे में फार्स न्यूज एजेंसी ने प्रांत के डिप्टी गवर्नर जनरल राजाबली शेखज़ादा के हवाले से खबर दी है कि सीमा पर हमले के दोषी पाकिस्तान भाग गए।
हाल के वर्षों में इस इलाके में कई घातक संघर्ष हुए हैं। ईरान, अफ़गानिस्तान और यूरोप के बीच मादक द्रव्यों की तस्करी के मुख्य रास्ते में पड़ता है।
एएफ़पी न्यूज एजेंसी ने अधिकारियों के हवाले से खबर दी है कि पिछले तीन दशक में तस्करों से हुई लड़ाई में 4,000 से ज़्यादा पुलिस अधिकारी और सैनिक मारे गए हैं।