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गूगल के गुब्बारे गांवों तक पहुंचाएंगे इंटरनेट

Sun, 16 Jun 2013 06:55 PM IST
विलिंगटन
विलिंगटन Updated Sun, 16 Jun 2013 06:55 PM IST
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इंटरनेट जायंट गूगल ने दुर्गम इलाकों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए एक नई तकनीक ईजाद की है। इसके तहत गूगल ने आकाश में ऐसे प्रायोगिक गुब्बारे छोड़े हैं जो अपने आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।

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कंपनी ने न्यूजीलैंड में 30 अत्यधिक दबाव वाले गुब्बारे छोडे़ हैं, जहां से वो दुनिया भर में एक नियंत्रित रास्ते पर उड़ते हुए जाएंगे।

इन गुब्बारों में लगे उपकरण रेंज में आने वाले इलाके के बड़े हिस्से में '3जी' जैसी स्पीड वाली इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराएंगे। हालांकि शुरुआत में यह सेवा थोड़ी अबाध नहीं मिल पाएगी।
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लेकिन कंपनी को उम्मीद है कि समय के साथ वह पर्याप्त बेड़ा तैयार कर लेगी ताकि दुर्गम इलाकों में रह रहे लोगों को भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेगी।

बचाव कार्यों में मदद
कंपनी ने बताया है कि इन गुब्बारों को किसी दिन किसी आपदा प्रभावित इलाके की ओर भेजा जा सकता है ताकि बचाव कार्यों में मदद की जा सके।

लेकिन एक विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर हवाओं के रुझानों को देखते हुए अत्यधिक ऊंचाई पर हजारों की संख्या में ऐसे गुब्बारों को नियंत्रित करना एक मुश्किल काम है।
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गूगल ने इस परियोजना को 'प्रोजेक्ट लून' का नाम दिया है और उसने माना है कि अभी यह 'अत्यधिक प्रयोगात्मक' स्तर पर है। प्रत्येक गुब्बारे का व्यास 15 मीटर है और इसमें उड़ने वाली गैस भरी हुई है।

गुब्बारे के नीचे कुछ इलेक्ट्रानिक उपकरण लटके हैं, जिसमें रेडियो एंटीना, एक फ्लाइट कंप्यूटर, एक ऊंचाई नियंत्रक प्रणाली और ऊर्जा के लिए एक सोलर पैनल शामिल हैं।

गूगल ने बताया कि प्रत्येक गुब्बारा हवा में 100 दिन तक रहेगा और पश्चिम से पूर्व की ओर उड़ते हुए अपने आसपास 40 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट कनेक्टविटी उपलब्ध कराएगा।

सबके लिए इंटरनेट
कंपनी ने बताया कि इस परियोजना के जरिए दुनिया की दो-तिहाई आबादी को जोड़ा जाएगा, जिनके पास वाजिव कीमत पर इंटरनेट उपलब्ध नहीं है।

कंपनी ने न्यूजीलैंड में परीक्षण के लिए कुछ घरों पर विशेष एंटीने भी लगवाएं हैं।

इस योजना पर काम कर रहे विभाग गूगल (एक्स) के मुख्य तकनीकी आर्किटेक्ट रिचर्ड डेवाल ने बताया, "लून के पीछे विचार यह है कि दुनिया को उस चीज के जरिए जोड़ना आसान होगा, जो सभी के पास समान तरीके से उपलब्ध है, यानी आकाश।"

उन्मुक्त रूप से उड़ने वाले गुब्बारों के साथ एक दिक्कत यह है कि वो सही जगह पर हैं, यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।

डेवाल बताते हैं, "हम यह नहीं चाहते हैं कि वो हवा से साथ बहते जाएं। हम चाहते हैं कि वो वहां जाएं जहां जमीन पर इंटरनेट की ज़रूरत है।"

इसलिए उन्हें गूगल के 'मिशन कंट्रोल' के जरिए नियंत्रित किया जाएगा।

जब इन गुब्बारों की उम्र खत्म होने वाली होगी, साफ्टवेयर की मदद से उन्हें उतार लिया जाएगा ताकि स्थानीय कर्मचारी किट वापस ले लें।

जोखिम
गूगल के लिए गुब्बारों के इन बेड़ों को संभालना मुश्किल भी हो सकता है। सरेय विश्वविद्यालय के गणना विभाग के विजिटिंग प्रोफेसर एलेन वुडवार्ड ने बताया, "मौसम की मार को देखते हुए हवा से हल्की मशीनों को नियंत्रित करने की व्यावहारिकता जगजाहिर है।"


उन्होंने बताया, "एक स्वतंत्र मार्ग पर ऐसी चीजों को संचालित करने के लिए काफी प्रयासों की जरूरत है और मैं सोचता हूं कि जैसा वो सोच रहे हैं, उसके मुकाबले सफल होने में उन्हें थोड़ा अधिक समय लगेगा।"

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