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काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं, पैसेवाले हैं

Sat, 26 Jan 2013 05:09 PM IST
Updated Sat, 26 Jan 2013 05:09 PM IST
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ghanaian woman who made millions fighting skin bleaching

कुछ समय पहले एक अध्ययन आया था कि हर तीन में एक दक्षिण अफ़्रीकी महिला अपनी त्वचा को ब्लीच करा रही है क्योंकि वे गोरी दिखना चाहती हैं।

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अफ्रीकी लोगों में गोरा होने की चाहत लगातार बढ़ रही है। लेकिन घाना में एक महिला उद्यमी ऐसी भी है जो सौंदर्य प्रसाधन के उत्पाद बेचकर लाखों कमा रही हैं। लेकिन ग्रेस एमे-ओबेंग गोरे होने के उत्पाद नहीं बल्कि लोगों को अपनी काली त्वचा की सुंदरता का सम्मान करना सीखाती हैं और ब्लीच के बुरे असर के बारे में बताती हैं।
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ब्रिटेन से पढ़ाई करके 80 के दशक में घाना लौटी ग्रेस ने देखा कि अफ्रीकी महिलाओं में गोरे होने के लिए त्वचा को ब्लीच करने का बहुत चलन है जो उन्हें चिंताजनक लगा।
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वे बताती हैं, “कई महिलाओं ने सौंदर्य प्रसाधन उत्पाद और ब्लीच लगा-लगा कर अपनी त्वचा खराब कर ली थीं।  यहाँ के मौसम में बार-बार ब्लीच करने से जो नुकसान होता है उसे ठीक करना कभी-कभी मुमकिन भी नहीं होता।  मुझे लगा कि त्वचा को हुए नुकसान को ठीक करने के लिए मुझे इनकी मदद करनी चाहिए वरना ये सामाजिक समस्या बन जाएगी।”

ब्लीच से त्वचा बर्बाद
बस उन्होंने एक थैला पकड़ा, घर-घर जाकर लोगों को त्वचा रक्षा पर समझाना शुरु कर दिया और परिवार की मदद से पहली ब्यूटी क्लिनिक खोली।

क्लिनिक खोलने के बाद ग्रेस को एहसास हुआ कि विदेशों से आने वाले उत्पाद ग्राहकों के लिए काफी महंगे पड़ रहे हैं। तब 1998 में उन्होंने अपने स्तर पर सौंदर्य उत्पाद बनाने शुरु किए।


वे त्वचा को ब्लीच किए जाने के खिलाफ हैं और उनके ब्रैंड का नाम है फॉरएवर क्लेयर। (यानी जो हमेशा साफ रखे)। ये नाम विवादों के घेरे में रहा है लेकिन ग्रेस सफाई देते हुए कहती हैं कि क्लेयर का मतलब यहाँ क्लियर या त्वचा का रंग नहीं बल्कि उम्मीद और रोशनी से है।

उन्होंने करीब 25 साल पहले 100 डॉलर से अपना बिज़नस शुरु किया था और आज सालाना 80 से 100 लाख डॉलर का कारोबार है।

कंपनी का नाम है एफसी ग्रुप ऑफ कंपनिज़ जिसके घाना, नाइजीरिया, टोगो, स्विट्ज़रलैंड और यूनाइटेड किंगडम में ब्रांच है। उनके एफसी ब्यूटी कॉलेज में पाँच हज़ार लोग प्रशिक्षण ले चुके हैं जिसमें ज़्यादातर महिलाएँ हैं।

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