फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   gay afghan defies tradition to expose identity

अफगान, समलैंगिक और सजा-ए-मौत

Wed, 20 Feb 2013 12:06 PM IST
Updated Wed, 20 Feb 2013 12:06 PM IST
विज्ञापन
gay afghan defies tradition to expose identity

हामिद जाहेर अफगानिस्तान के रहने वाले हैं और पेशे से एक दवा विक्रेता है।

विज्ञापन


पहली नजर में उनकी जिंदगी एक आम आदमी की तरह है, लेकिन सच ये है कि वो अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर कनाडा के टोरंटो शहर में रहने को मजबूर हैं।

उनका अपराध है कि उन्होंने अफगानिस्तान में एक नियम तोड़ा और दुनिया को ये जाहिर किया कि वो एक समलैंगिक हैं।

अफगानिस्तान एक ऐसा देश है जहां समलैंगिकता अपराध है और समलैंगिक होने का मलतब है सजा ए मौत। अपने समलैंगिक होने के अनुभव पर उन्होंने एक किताब लिखी जो अफगानिस्तान में कभी नहीं छपी।

दूसरों से अलग हैं
हामिद कहते हैं कि उन्हें शुरू से इस बात का एहसास था कि वो दूसरों से कुछ अलग हैं। अफगानिस्तान के एक गांव में 1980 के दशक में उनका बचपन बीता। उन दिनों को याद कर हामिद कहते हैं कि मौत और यातनाओं के डर से उन्होंने हमेशा अपनी भावनाओं को दूसरों से छिपाया।
विज्ञापन


बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं कि जब मैं बड़ा हो रहा था मैं कई बार पुरुषों की तरफ आकर्षित हुआ, लेकिन मैं 15 की उम्र से पहले कभी ये जान नहीं पाया कि मेरी यौन इच्छाएं दूसरे लड़कों से अलग है।
विज्ञापन
विज्ञापन


समय के साथ मेरे भीतर कुछ बदलाव हुए और मेरे आस-पास लोगों को लगने लगा कि मेरा व्यवहार औरतों जैसा है और उन्होंने मुझे छेड़ना शुरू कर दिया।

सजा-ए-मौत
अपने छात्र जीवन के दौरान यह जानने के बावजूद कि वो समलैंगिक हैं उन्होंने मौत की सज़ा सुनाए जाने के डर से इस बात को हर किसी से छिपाए रखा।

मुश्किलें तब खड़ी हुईं जब 25 साल की उम्र में उन पर शादी के लिए दबाव बनाया जाने लगा। वो कहते हैं कि अफगानिस्तान में समलैंगिक होने का मतलब है मौत। सरकार को छोड़िए मेरे अपने रिश्तेदार मुझे मार डालते।

उनकी रोजमर्रा जिंदगी जब बेहद मुश्किल हो गई तो वो भागकर पाकिस्तान चले गए और उसके बाद कनाडा में शरण ली। वो कहते हैं कि मैंने अफगानिस्तान में समलैंगिक होने के अपने अनुभवों पर किताब लिखी ताकि लोग ये जानें कि अफगानिस्तान में समलैंगिक किस त्रासदी से गुज़रते हैं और उस देश में अपनी यौन इच्छाओं को जाहिर करना कितना बड़ा अपराध है।

गुमनाम समलैंगिक
काबुल विश्वविद्दालय के एक प्रोफेसर दाउद रवीश कहते हैं कि कोई भी कभी भी यह जान नहीं सकता कि अफगानिस्तान में कितने समलैंगिक हैं क्योंकि लोग रही नहीं कानून भी ये कहता है कि समलैंगिक व्यक्ति एक असमान्य व्यक्ति है।


हामिद ने दुनिया को अपनी पहचान जाहिर की लेकिन इसकी एक बड़ी कीमत भी चुकाई है। उनके परिवार ने उन्हें तिरस्कृत कर दिया है और उनके अपने देश में लोग उनकी ज़िंदगी को खत्म करना चाहते हैं।

लेकिन हामिद के लिए अपनी आवाज अफगानिस्तान के दूसरे गुमनाम समलैंगिकों तक पहुंचाना वो मकसद है जिसके लिए वो ये दुख उठाने को तैयार हुए।

ताहिर कादरी (बीबीसी न्यूज, काबुल)

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed