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खून वाली बंदूक से स्याही वाली कलम तक

Sat, 27 Oct 2012 03:44 PM IST
बीबीसी हिन्दी
बीबीसी हिन्दी Updated Sat, 27 Oct 2012 03:44 PM IST
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from gun of blood to ink pen

चार-पाँच साल पहले तक इसराइल के गिलाद शालित नामक युवक अकसर सुर्खियों में

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रहता था, उसके बारे में टीवी चैनल और अखबार वाले ख़बरें छापते थे। आज यही युवक खेल पत्रकार बन दूसरों के बारे में ख़बरें छाप रहा है।

ये वही इसराइली सैनिक है जिसे जून 2006 में फ़लस्तीनी गुट हमास ने अगवा कर लिया था। उस समय गिलाद केवल 19 साल के थे। पिछले 26 सालों में ज़िंदा रिहा किए जाने वाले वे पहले इसराइली सैनिक हैं।

हमास ने पाँच साल तक गिलाद को बंदी बनाकर रखा था। गिलाद जब क़ैद थे तो उन्हें इसराइल समेत कई देश के लोगों की सहानुभूति मिली। लेकिन रिहाई के बाद वे सुर्खियों से गा़यब हो गए।
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आजकल वे एक मशहूर इसराइली अख़बार में बतौर खेल पत्रकार काम करते हैं। वे मियामी जाकर एनबीए बास्किटबॉल फाइनल और यूक्रेन जाकर यूरोपीय फ़ुटबॉल चैंपियनशिप कवर कर चुके हैं।
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रिहा होने के बाद से गिलाद लाइमलाइट से दूर ही रहे। हाल ही में अपने 26वें जन्मदिन पर उन्हें अपने जन्मदिन की पार्टी में मशहूर हस्तियों के साथ देखा गया था।

'अपहरणकर्ताओं के साथ फिल्म देखता था'
दुबले पतले से दिखने वाले गिलाद का वज़न अब थोड़ा बढ़ गया है और वे पहले से सेहतमंद दिखते हैं। अपहरण के समय गिलाद इसराइली सेना में अनिवार्य सेवा पर थे। बाद में वे कॉरपोरल से सार्जेंट-मेजर शालित बन गए थे। अप्रैल में उन्होंने सेना छोड़ दी।

गिलाद को 1027 फलस्तीनी क़ैदियों के बदले में हमास ने रिहा किया था। इसराइल लौटने के बाद उन्हें मनोवैज्ञानिक स्तर पर कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

अब तक गिलाद ने अपहरण के दौरान अपनी ज़िंदगी के बारे में बहुत कम ही बताया है। इसराइल के चैनल 10 पर अब उन पर एक नई डॉक्यूमेंट्री आ रही है।

वृत्तचित्र में उन्होंने बताया कि वे कैसे अपना समय बिताते थे, दबाव कैसे झेलते थे, कैसे अपने शहर का नक्शा बनाते रहते थे।

गिलात ने बताया, "मेरे अपहरणकर्ता मुझे अच्छे से खिलाते थे, मेरे साथ चेस खेलते थे और दुर्व्यवहार नहीं करते थे। मैं टीवी पर अरबी समाचार देख सकता था, कभी-कभी मैं उनके साथ बैठकर फिल्में और खेल प्रतियोगिताएँ भी देखता था।"


अब वे इस सब से दूर पत्रकारिता कर रहे हैं। हालांकि अतीत का साया पीछा नहीं छोड़ता। हाल ही में वे बार्सिलोना और रियाल मैड्रिड फ़ुटबॉल मैच कवर करने गए तो वहाँ फ़लस्तीनी समर्थकों ने विरोध किया।

गिलाद बताते हैं, "हमारे साथ सुरक्षा के लिए एक टीम थी क्योंकि फलस्तीनी गुट प्रदर्शन कर सकते थे। वैसे कुछ हुआ नहीं।"

गिलाद पुरानी ज़िंदगी से काफी आगे निकल आए हैं लेकिन ऐसी घटनाएँ उन्हें अपने अतीत के बारे में याद दिलाती रहती हैं।

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