अमेरिका को चुनौती देने वाले फिदेल कास्त्रो का निधन
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अमेरिका को चुनौती देने वाले क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति कास्त्रो का 90 साल की उम्र में निधन हो गया। कास्त्रो का क्यूबा क्रांति का जनक माना जाता है। उन्होंने पचास साल से भी अधिक समय तक खुलकर अमेरिकी नीतियों की मुखालफत की। उनके भाई राउल कास्त्रो ने उनके मौत की पुष्टि की है। सूत्रों के मुताबिक इस दु:खद घटना पर क्यूबा ने नौ दिन के शोक का फरमान जारी किया है। पूर्व राष्ट्रपति के निधन के बाद सरकार ने 4 दिसंबर को उनके अंतिम संस्कार की घोषणा की है।
Fidel Castro was one of the most iconic personalities of the 20th century. India mourns the loss of a great friend: PM Narendra Modi
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— ANI (@ANI_news) November 26, 2016
Former Cuban President Fidel Castro dead at 90 - Cuban TV (Reuters)
— ANI (@ANI_news) November 26, 2016
फिदेल कास्त्रो क्यूबा क्रांति के प्रमुख नेता थे। वह साल 1959 से 1976 तक वहां के प्रधानमंत्री रहे। इसके बाद वह राष्ट्रपति बन गए और साल 2008 तक इस पद को संभाला। फिदेल ने 1986 में 7 घंटे 10 मिनट का सबसे लंबा भाषण रिकॉर्ड किया था। वहीं, 29 सितंबर 1960 को यूएन में 4 घंटे 29 मिनट की स्पीच दी थी। ये गिनीज रिकॉर्ड में दर्ज है।
वह क्यूबा की क्रांति के जरिए फुल्गेंकियो बतिस्ता की तानाशाही के खिलाफ उन्होंने संघर्ष किया और सत्ता हासिल की। इसके बाद वह अमेरिका के निशाने पर आ गए। बताते चलें कि एक बड़ा वर्ग फुल्गेंकियो बतिस्ता को अमेरिका समर्थन मिला था।
शीतयुद्ध के समय सोवियत सेना को अमेरिका के खिलाफ अपनी सीमा में मिसाइल तैनात करने की मंजूरी देकर वह पूरी दुनिया में चर्चा में आए थे।