अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के बीच पहले दौर की ऐतिहासिक वार्ता हो चुकी है। करीब 18 महीनों से दोनों नेताओं के बीच का रिश्ता काफी उतार चढ़ाव भरा रहा है। कभी किम ने वार्ता को रद्द करने की धमकी दी तो कभी ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह वार्ता उत्तर कोरिया के लिए आखिरी मौका होगा। लेकिन तमाम परेशानियों के बीच भी ये मुलाकात आज संभव हो गई।
हंसते हुए मिलाया दोनों ने हाथ
लगभग पूरी दुनिया इस बात के इंतजार में थी कि जब दो बड़े दुश्मन रहे किम और ट्रंप आपस में मिलेंगे तो एक दूसरे को देखकर वह कैसी प्रतिक्रिया देंगे। जब दोनों का एक दूसरे से सामना हुआ तो हर कोई हैरान रह गया। किम और ट्रंप ने हंसते हुए एक दूसरे का बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया और हाथ मिलाया।
किम ने कही वो बात जिसकी नहीं थी उम्मीद
इस मुलाकात में जब दोनों के बीच बातचीत हुई तो ट्रंप ने किम से कहा, उम्मीद है हम दोनों के संबंध अच्छे रहेंगे। सबकुछ भुलाकर हम आगे बढ़ेंगे। किम के बगल में बैठकर ट्रंप ने कहा 'आगे हमारे रिश्ते बेहद शानदार होंगे। वास्तव में बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं, इसमें मुझे कोई शक नहीं है।' इसी बीच तानाशाह किम ने एक ऐसी बात कह दी जिसकी उम्मीद शायद ही किसी को हो। उन्होंने कहा- 'सिंगापुर में हो रही इस बैठक की राह में कई रोड़े थे। लेकिन हमने उन बाधाओं को पार किया और आज हम यहां हैं।'
दोनों की हरकतों से विश्व था खतरे में
ये भी सच है कि जब दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुए थे तो केवल अमेरिका और उत्तर कोरिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया इस खतरे को महसूस कर रही थी। एक तरफ जब किम कह रहे थे कि उनके टेबल पर जो न्यूकलिय बम का बटन है वह उसे कभी भी दबा देंगे तो दूसरी तरफ ट्रंप ने कहा था कि किम का बटन काम नहीं करता पर उनका करता है। दोनों की ऐसी ही हरकतों ने दुनिया को खतरे में डाल दिया था।
इस शर्त पर अमेरिका देगा उत्तर कोरिया को पूर्ण सुरक्षा
इस बैठक का शुरु एक ही उद्देश्य रहा है और वह है कोरियाई प्रायद्वीप में पूर्ण निरस्त्रीकरण करना। यह बात ट्रंप ने बैठक से पहले वाइट हाउस में भी कही थी। उन्होंने कहा था कि यदि किम इस शर्त को नहीं मानेंगे तो वह उत्तर कोरिया को तबाह कर देंगे। हालांकि बैठक तो सफल रही लेकिन अगर किम इस बात पर राजी नहीं हुए तो क्या वाकई ट्रंप ये कदम उठा सकते हैं। इसी बीच सिंगापुर में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ये बात दोबारा दोहराई और कहा कि अगर उत्तर कोरिया पूर्ण निरस्त्रीकरण पर राजी हो जाता है तो अमेरिका उसे पूरी सुरक्षा मुहैया कराने की गारंटी देने के लिए तैयार है।