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मुर्सी के समर्थकों पर गोलीबारी, 'तीन की मौत'

Fri, 05 Jul 2013 11:41 PM IST
Updated Fri, 05 Jul 2013 11:41 PM IST
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firing on mursi supporters three killed in egypt

मिस्र की राजधानी काहिरा में मोहम्मद मुर्सी के सर्थमन में हज़ारों समर्थक एक सैन्य अड्डे की ओर गए हैं और वहां से गोलीबारी की आवाजें सुनाई दी हैं। गोलीबारी में तीन लोग मारे गए हैं। लोगों का मानना है कि मुर्सी को सैन्य अड्डे में रखा गया है।

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इस बीच मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से हटाए जाने के बाद अफ़्रीकी संघ ने मिस्र को संगठन की सदस्यता से निलंबित कर दिया है।

एक बयान में अफ़्रीकी संघ ने कहा है कि जब तक संवैधानिक तौर पर सत्ता कायम नहीं की जाती तब तक मिस्र संगठन के काम में हिस्सा नहीं ले सकता।

अफ़्रीकी संघ ने मुर्सी को हटाए जाने को असंवैधानिक करार दिया था और कहा था कि नया प्रशसान सभी राजनीतिक गुटों से बात करे।

मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से हटाए जाने के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड ने समर्थकों से देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। सेना का कहना था कि जब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण है तब तक वो किसी गुट के ख़िलाफ़ कदम नहीं उठाएगी हालांकि ब्रदरहुड के नेताओं को हिरासत में लिया गया है। नमाज़ के बाद हिंसा की आशंका को देखते हुए टैंक और सेना की तैनाती फिर से की गई है।
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'नए शासन से सहयोग नहीं'
इस बीच मिस्र के नए नेता क्लिक करें अदली महमूद मंसूर ने कहा है कि ‘लोगों की इच्छा’ को देखते हुए चुनाव कराए जाएंगे।

जबकि मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रवक्ता गेहाद अल हदाद का कहना है कि संगठन नए शासन के साथ सहयोग नहीं करेगा।

मोहम्मद मुर्सी को पिछले साल राष्ट्रपति चुना गया था लेकिन इस वक्त मुर्सी और उनकी पार्टी मुस्लिम ब्रदरहुड के कई नेता हिरासत में हैं।

राष्ट्रपति पद से मुर्सी को हटाए जाने से पहले कई दिनों तक मिस्र में प्रदर्शन हुए थे।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ज़्यादातर लोगों की इच्छा के ख़िलाफ़ मुर्सी और मुस्लिम ब्रदरहुड इस्लामिक एजेंडे पर काम कर रहे हैं और देश की आर्थिक समस्या सुलझाने में विफल रहे हैं।
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जबकि सेना का कहना है कि वो हरकत में इसलिए आई क्योंकि मुर्सी लोगों की माँगे पूरी नहीं कर पाए।

'जल्द होंगे चुनाव'
उधर विपक्ष के नेता मोहम्मद अल बारादेई ने कहा है कि सेना का हस्तक्षेप एक ‘तकलीफदेह कदम’ रहा है लेकिन ये कदम लोगों के लिए उठाया गया था जिससे गृह युद्ध टल गया। उनका कहना था कि मुर्सी ने अपनी वैधता पर ख़ुद ही सवाल खड़े कर दिए थे।


मोहम्मद अल बारादेई ने कहा कि सेना की मंशा देश पर शासन करने की नहीं है और एक साल के अंदर चुनाव कराए जाएंगे।

इससे पहले शुक्रवार को एक सैनिक उस समय मारा गया जब सिनई में कुछ इस्लामी चरमपंथियों ने सेना चौकी पर हमला कर दिया।

पिछले दो सालों में सिनई में सुरक्षा ठिकानों और तेल पाइपलाइनों पर कई बार चरमपंथी हमले हो चुके हैं। ये स्पष्ट नहीं है कि ताज़ा हमला मिस्र के राजनीतिक उठापटक से जुड़ा हुआ है। इसके बाद मिस्र ने ग़ज़ा के साथ अपनी सीमा बंद कर दी है।

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