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बांग्लादेश में 30 मतदान केन्द्रों पर आग
Updated Sat, 04 Jan 2014 09:17 PM IST
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बांग्लादेश में रविवार को होने वाले आम चुनावों से पहले शनिवार को हुई हिंसा में कम से कम 30 मतदान केन्द्रों को को आग लगा दी गई।
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प्रमुख विपक्षी दलों ने इन चुनावों का बहिष्कार कर रखा है और उन्होंने इसके ख़िलाफ़ दो दिन की हड़ताल का आह्वान किया है।
पुलिस और चुनाव अधिकारियों ने बताया कि राजधानी ढाका सहित देशभर में क़रीब 30 मतदान केन्द्रों को आग लगा दी गई है। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 60 बताई जा रही है।
देश में चुनावी हिंसा में अब तक कम से कम 100 लोग मारे जा चुके हैं।
विपक्ष चाहता है कि पहले की तरह इस बार भी चुनाव एक कार्यवाहक सरकार की देखरेख में हों लेकिन सरकार ने इससे इन्कार किया है।
देश में अधिकांश मतदान केन्द्र स्कूलों और दूसरी सरकारी इमारतों में बनाए गए हैं।
मतदान केन्द्रों पर आग
दक्षिण पूर्वी शहर चटगांव से एक चुनाव अधिकारी मोहम्मद अब्दुल्ला ने बताया कि मतदान केन्द्रों पर हमले के बावजूद उनके क्षेत्र में चुनाव स्थगित नहीं होंगे।
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अब्दुल्ला ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "प्रदर्शनकारियों ने हमारे इलाक़े में तीन मतदान केन्द्रों को आग लगाई है, हमने उन केन्द्रों को अन्यत्र ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है।"
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देश के प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) की नेता ख़ालिदा ज़िया ने इन चुनावों को स्वांग बताते हुए इसका बहिष्कार करने का आह्वान किया है।
खालिदा ने सरकार पर उन्हें घर में नजरबंद करने का आरोप लगाया है। हालांकि सरकार ने इससे इन्कार किया है।
बीएनपी और उसके सहयोगी दल इन चुनावों के विरोध में देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं। बीएनपी के सहयोगी दलों में कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी करें जमात ए इस्लामी भी शामिल है।
विपक्षी कार्यकर्ता देशभर में सड़कों, रेल और जलमार्गों पर नाकेबंदी कर रहे हैं। दुकानों, स्कूलों और कार्यालयों को बंद किया गया है।
पुलिस की गोलीबारी में कई विपक्षी कार्यकर्ता मारे गए हैं। हड़ताल की परवाह किए बिना सड़कों पर चलने का साहस कर रही बसों पर पेट्रोल बमों से हमले किए गए हैं जिनमें कई यात्री मारे गए हैं।
चुनावी हिंसा
राजधानी ढाका में एक मतदाता ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "मैं वोट देने जाना चाहती हूँ लेकिन मैं इस हिंसा से भयभीत हूँ। अगर स्थिति सामान्य रहती है और मेरे पड़ोसी वोट देने जाते हैं तो मैं भी जा सकती हूँ।"
विश्लेषकों का कहना है कि इन चुनावों का परिणाम पहले से तय है। अधिकांश सीटों पर सत्तारूढ अवामी लीग के प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना तय है।
संवाददाताओं का कहना है कि अमरीका और यूरोपीय संघ (ईयू) ने इन चुनावों में अपना पर्यवेक्षक भेजने से मना कर दिया था जिससे इन चुनावों की वैधता सवालों के घेरे में है।
साल 1991 के बाद से बांग्लादेश में हर चुनाव तटस्थ अंतरिम सरकार की देखरेख में हुए हैं।
लेकिन अवामी लीग ने साल 2010 में इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया था। उसकी दलील थी कि अब इसकी ज़रूरत नहीं रह गई है।