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क्रिसमस से संस्कृति को बचाने की कोशिश

Tue, 25 Dec 2012 05:48 PM IST
Updated Tue, 25 Dec 2012 05:48 PM IST
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father christmas off air in uzbekistan

उजबेकिस्तान के टीवी दर्शकों के लिए क्रिसमस के जश्न की खु़शी फीकी रह सकती है। इस साल टीवी स्क्रीन पर उजबेकिस्तान के दर्शकों को फादर क्रिसमस का दीदार करने का मौका नहीं मिलेगा। दरअसल यहां के सरकारी प्रसारकों ने ऐसे प्रसारण पर अनाधिकारिक प्रतिबंध लगाया है।

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यह ताजा कदम आधुनिक उजबेक संस्कृति में सोवियत या रूसी विरासत के महत्व को कम करने के तौर पर देखा जा सकता है। जब मुस्लिम बहुल मध्य एशिया, सोवियत संघ का एक बड़ा हिस्सा था उस वक्त क्रिसमस से जुड़े किरदार बेहद मशहूर थे।
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यह आदेश किसने दिया अभी यह स्पष्ट नहीं है लेकिन इस मौके़ पर हमेशा दिखने वाले फादर क्रिसमस (वहां ग्रैंडफादर फ्रॉस्ट के नाम से मशहूर) और उनकी महिला सहयोगी स्नो मेडेन स्पष्ट तौर पर अब ऐसे विदेशी किरदार बन गए हैं जिन्हें पसंद नहीं किया जा रहा है।
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क्या है मामला
ताशकंद में एक उजबेक टीवी पत्रकार का कहना है कि हमें टीवी पर ग्रैंडफादर फ्रॉस्ट और स्नो मेडेन को नहीं दिखाने का आदेश मिला है। हम एक छोटा क्रिसमस ट्री दिखा सकते हैं लेकिन वह भी पृष्ठभूमि में होना चाहिए। नाम न बताने की शर्त पर इस पत्रकार का कहना है कि उन्हें यह पता नहीं है कि यह आदेश सरकार या राष्ट्रपति किसकी ओर से आया है।

लेकिन उजबेकिस्तान में प्रेस पर सख़्त नियंत्रण है और वहां सरकार की इजाजत के बगैर यकीनन ऐसा कुछ नहीं हो सकता है। उजबेक पत्रकार का कहना है कि सभी टीवी कार्यक्रमों में सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि नया साल आ रहा है। हमें क्रिसमस शब्द का जिक्र भी नहीं करना चाहिए। हमारे बॉस के अनुसार हमारे लिए यह अहम है कि हम अपनी उजबेक संस्कृति को विदेशी प्रभाव से बचाएं।

उजबेक टीवी के प्रमुख संपादक इस बात को खारिज करते हैं कि ग्रैंडफादर फ्रॉस्ट या नए साल से जुड़े दूसरे रुसी/सोवियत किरदारों पर प्रतिबंध है या उज़बेकिस्तान में नया साल नहीं मनाया जा रहा है।

कैसा है माहौल
उजबेक शहरों के चौराहे पर क्रिसमस ट्री लगाया गया है और वहां के निवासियों का कहना है कि अब भी बच्चों के लिए नए साल पर मनोरंजन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन अब इन कार्यक्रमों का आयोजन इतने बड़े पैमाने पर नहीं हो रहा है जितना कि सोवियत दौर में हुआ करता था।

मुस्लिम बहुल क्षेत्र में नए साल को एक बड़े पारिवारिक मौके के तौर पर मनाया जाता रहा है और इसे कभी धार्मिक नजरिए से कभी नहीं देखा गया। वहीं सोवियत दौर में इसे एक ऐसे त्यौहार के तौर पर प्रचारित किया गया जो इस साम्यवादी साम्राज्य के बहु-नस्लीय और बहुधर्मी लोगों को एकजुट कर सके।


लेकिन अब ऐसा लगता है कि उजबेक सरकार बड़े शांत तरीके से पुरानी सोवियत परंपरा को खत्म करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा वहां पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव को भी नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। इस साल की शुरुआत में उजबेकिस्तान में वैलेंटाइन डे पर भी प्रतिबंध लगाया गया था।

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