बलोच नेता बुगती और उनके सहयोगियों को मिल सकती है भारतीय नागरिकता
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स्विटजरलैंड में रहकर बलूचिस्तान की आजादी की आवाज बुलंद करने वाले निर्वासित नेता ब्राहमदाग बुगती को भारतीय नागिरकता मिल सकती है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक संभावना जताई जा रही है कि बुगती को भारत में शरण दी जा सकती है। भारतीय अधिकारियों और बलूच नेता के बीच भारतीय पास्पोर्ट के लिए बातचीत जारी है।
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि बुगती स्विटजरलैंड की राजधानी जिनेवाा में भारतीय दूतावास में शरण लेंगे। गैरकानूनी घोषित बलोच रिपब्लिकन पार्टी (बीआरपी) से जिनेवा में शरण देने की प्रक्रिया पर बातचीत करने के लिए एक मीटिंग भी रखी गई है।
बीआरपी के सूत्रों ने पुष्टि की है कि भारत बुगती और उनके करीबी सहयोगियों को शरण देने के लिए सहमत है। बीआरपी के प्रतिनिधियों ने कहा बिल्कुल वैसे ही जिस तरह भारत ने दलाई लामा की मदद की है जो चीन के खिलाफ अभियान चलाने के लिए पूरी दुनिया में भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। इसी तरह बलूच नेता भी पूरी दुनिया में आजादी से घूम सकते हैं और बलूचिस्तान में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं।
बुगती के दादा अकबर बुगती कद्दावर नेता थे
कहा जा रहा है भारत ब्राहमदाग बुगती और उनके प्रमुख सहयोगियों सहित विशवस्त सहयोगी शेर मोहम्मद बुगती और अजीजुल्लाह बुगती को भी नागरिकता देगा। लगभग 15 हजार से ज्यादा बलूचियों ने अफगानिस्तान में शरण की मांग की है, जबकि 2 हजार से अधिक यूरोपीय देशों में रहते हैं। बीपीआर के 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को जिनेवा में 18 और 19 सितंबर को भारत में ब्राहमदाग बुगती को शरण देने के विषय पर बातचीत के लिए बुलाया गया है।
ब्राहमदाग बुगती का जन्मस्थान डेरा बुगतिन बलूचिस्तान है। बुगती के दादा अकबर अहमद बुगती बलूचियों के कद्दावर नेता थे। 2006 में अकबर बुगती की हत्या के बाद ब्राहमदाग बलूचिस्तान से भाग निकले और तब से ही वह अफगानिस्तान और स्विटजरलैंड में रह रहे हैं।