फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   Emergency in Sri Lanka: this is why anti muslim riots happen in srilanka

श्रीलंका में आपातकाल: मुस्लिमों के खिलाफ क्यों उग्र हुए बौद्ध

Tue, 06 Mar 2018 03:33 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Tue, 06 Mar 2018 03:33 PM IST
विज्ञापन
Emergency in Sri Lanka: this is why anti muslim riots happen in srilanka
Srilanka

मस्जिदों और मुसलमानों के बिजनेस पर सिलसिलेवार हमलों के बाद श्रीलंका में आपातकाल लागू कर दिया गया है। कैंडी शहर के कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। कैंडी से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक बौद्ध धर्म को मानने वाले सिंहला लोगों ने मुसलमानों की दुकानों पर हमले किए और उन्हें आग के हवाले कर दिया। एक जली हुई इमारत से एक मुस्लिम व्यक्ति की लाश बरामद होने के बाद श्रीलंका में पुलिस को बदले की कार्रवाई का अंदेशा है। हफ्ते भर पहले ट्रैफिक रेड लाइट पर हुए झगड़े के बाद कुछ मुसलमानों ने एक बौद्ध युवक की पिटाई की थी और तभी से वहां तनाव बना हुआ है।पिछले हफ्ते ही श्रीलंका के पूर्वी शहर अमपारा में मुस्लिम विरोधी हिंसा हुई थी।

विज्ञापन


सांप्रदायिक तनाव का इतिहास

श्रीलंका में साल 2012 से ही सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। कहा जाता है कि एक कट्टरपंथी बौद्ध संगठन (बीबीएस) इस तनाव को हवा देता रहता है। कुछ कट्टरपंथी बौद्ध समूहों ने मुसलमानों पर जबरन धर्म परिवर्तन कराने और बौद्ध मठों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। पिछले दो महीने के भीतर गॉल में मुसलमानों की मिल्कियत वाली कंपनियों और मस्जिदों पर हमले की 20 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं। साल 2014 में कट्टरपंथी बौद्ध गुटों ने तीन मुसलमानों की हत्या कर दी थी जिसके बाद गॉल में दंगे भड़क गए। साल 2013 में कोलंबो में बौद्ध गुरुओं के नेतृत्व में एक भीड़ ने कपड़े के एक स्टोर पर हमला कर दिया था। कपड़े की ये दुकान एक मुस्लिम की थी और हमले में कम से कम सात लोग घायल हो गए थे।
विज्ञापन


श्रीलंका की आबादी दो करोड़ दस लाख के क़रीब है और इसमें 70 फीसदी बौद्ध हैं और 9 फीसदी मुसलमान। साल 2009 में सेना के हाथों तमिल विद्रोहियों की हार के बाद से श्रीलंका का मुस्लिम समुदाय एक तरह से सियासी फलक से दूर रहा है। लेकिन हाल के सालों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ धर्म के नाम पर हिंसा की घटनाएं बढी हैं। इस हिंसा के लिए बौद्ध गुरुओं को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन बौद्धों के निशाने पर मुसलमान क्यों?

बौद्ध धर्म को दुनिया में शांति और अहिंसा के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। अहिंसा के प्रति बौद्ध मान्यताएं उसे अन्य धर्मों से अलग बनाती है। फिर सवाल उठता है कि मुसलमानों के खिलाफ बौद्ध हिंसा का सहारा क्यों ले रहे हैं। श्रीलंका में मुसलमानों का मुस्लिम परंपरा के तहत मांसाहार या पालतू पशुओं को मारना बौद्ध समुदाय के लिए एक विवाद का मुद्दा रहा है। श्रीलंका में कट्टरपंथी बौद्धों ने एक बोडु बला सेना भी बना रखी है जो सिंहली बौद्धों का राष्ट्रवादी संगठन है। ये संगठन मुसलमानों के खिलाफ मार्च निकालता है। उनके खिलाफ सीधी कार्रवाई की बात करता है और मुसलमानों द्वारा चलाए जा रहे कारोबार के बहिष्कार का वकालत करता है। इस संगठन को मुसलमानों की बढ़ती आबादी से भी शिकायत है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed