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मिस्र में अधिकारियों का दावा- हमलावरों के हाथ में थे इस्लामिक स्टेट के झंडे
बीबीसी हिंदी
Updated Mon, 27 Nov 2017 07:19 PM IST
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आईएसआईएस
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मिस्र में शुक्रवार को सिनाई में हुए मस्जिद पर हमले की जांच कर रहे अधिकारियों ने कहा है कि हमलावारों के हाथ में इस्लामिक स्टेट के झंडे थे। शुक्रवार को जुमे की नमाज के वक्त हुए इस हमले में कम से कम 305 लोगों की मौत हुई है। इस हमले की अभी तक किसी भी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है। मिस्र के सरकारी वकील ने हमलावरों की संख्या 30 के करीब बताई है। राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-सीसी ने इस हमले का बदला लेने का संकल्प लिया है।
सेना ने की जवाबी कार्रवाई
मिस्र की सेना ने कहा कि इस हमले की जवाबी कार्रवाई में उसने चरमपंथियों के ठिकानों पर हवाई हमला किया है। इस हमले के बाद मिस्र में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। अल-आरिश के क़रीब अल-रावदा में जिस मस्जिद पर हमला हुआ है, वह सूफी मत मानने वालों के बीच लोकप्रिय थी।
पढ़ें- ‘आईएस आतंकी इलाका खाली करें या मरने को रहें तैयार’
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कैसे किया गया हमला?
शुक्रवार को दर्जनों बंदूकधारी सिनाई स्थित एक मस्जिद के बाहर आए और नमाज़ अदा कर रहे लोगों पर गोलियां बरसाने लगे। जिस किसी ने भी बचकर निकलने की कोशिश की बंदूकधारियों ने उस पर गोली मार दी। ऐसा बताया गया जा रहा है कि हमलावरों ने मस्जिद के बाहर खड़े वाहनों पर आग लगा दी थी, जिससे लोगों को बाहर निकलने से रोका जा सके। उन्होंने पीड़ितों की मदद करने की कोशिश कर रही एम्बुलेंस पर भी गोलियां चलाई। आधुनिक मिस्र के इतिहास में यह अभी तक का सबसे खतरनाक चरमपंथी हमला है।
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सेना ने की जवाबी कार्रवाई
मिस्र की सेना ने कहा कि इस हमले की जवाबी कार्रवाई में उसने चरमपंथियों के ठिकानों पर हवाई हमला किया है। इस हमले के बाद मिस्र में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। अल-आरिश के क़रीब अल-रावदा में जिस मस्जिद पर हमला हुआ है, वह सूफी मत मानने वालों के बीच लोकप्रिय थी।
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कैसे किया गया हमला?
शुक्रवार को दर्जनों बंदूकधारी सिनाई स्थित एक मस्जिद के बाहर आए और नमाज़ अदा कर रहे लोगों पर गोलियां बरसाने लगे। जिस किसी ने भी बचकर निकलने की कोशिश की बंदूकधारियों ने उस पर गोली मार दी। ऐसा बताया गया जा रहा है कि हमलावरों ने मस्जिद के बाहर खड़े वाहनों पर आग लगा दी थी, जिससे लोगों को बाहर निकलने से रोका जा सके। उन्होंने पीड़ितों की मदद करने की कोशिश कर रही एम्बुलेंस पर भी गोलियां चलाई। आधुनिक मिस्र के इतिहास में यह अभी तक का सबसे खतरनाक चरमपंथी हमला है।
किसने किया इतना बड़ा हमला?
मिस्र
अभी इस हमले की ज़िम्मेदारी किसी ने नहीं ली है मगर तहरीर इंस्टिट्यूट ऑफ मिडल ईस्ट पॉलिसी में शोधार्थी टिमोथी कैलदस मानते हैं कि इसके पीछे इस्लामिक स्टेट का हाथ हो सकता है।
थिमोथी कैलदस ने कहा, "इसके पीछे आईएसआईएस हो सकता है। पिछले साल से वो आम लोगों को निशाना बना रहे हैं और खासकर ईसाइयों को।" उन्होंने कहा, "ये एक सूफी मस्जिद थी, जिसे आईएसआईएस अपने धर्म के ख़िलाफ़ मानता है। उत्तरी सिनाई में बहुत से लोग आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई में सरकार की मदद भी कर रहे थे. ऐसे में हमले की एक वजह ये भी हो सकती है।"
माना जा रहा है कि मिस्र अब उत्तरी सिनाई में कड़ी कार्रवाई कर सकता है। पिछले दिनों यहां हुए हमले में 18 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। साथ ही, इस इलाके में रहने वाले बद्दू कबायली अपने ऊपर हुए इस हमले के बाद और खुलकर सरकार की मदद कर सकते हैं।
थिमोथी कैलदस ने कहा, "इसके पीछे आईएसआईएस हो सकता है। पिछले साल से वो आम लोगों को निशाना बना रहे हैं और खासकर ईसाइयों को।" उन्होंने कहा, "ये एक सूफी मस्जिद थी, जिसे आईएसआईएस अपने धर्म के ख़िलाफ़ मानता है। उत्तरी सिनाई में बहुत से लोग आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई में सरकार की मदद भी कर रहे थे. ऐसे में हमले की एक वजह ये भी हो सकती है।"
माना जा रहा है कि मिस्र अब उत्तरी सिनाई में कड़ी कार्रवाई कर सकता है। पिछले दिनों यहां हुए हमले में 18 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। साथ ही, इस इलाके में रहने वाले बद्दू कबायली अपने ऊपर हुए इस हमले के बाद और खुलकर सरकार की मदद कर सकते हैं।
क्या सीसी इस विद्रोह को रोक सकते हैं?
मिस्र
मिस्र की सरकार के सामने यह एक बहुत बड़ी चुनौती है। अगर इस हमले के पीछे आईएस का हाथ है, तो यह बड़े क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि पिछले कुछ वक्त से आईएस ने इराक और सीरिया में अपनी पकड़ गंवाई है। हो सकता है इस तरह के हमले को अंजाम देकर आईएस अपने समर्थकों तक यह संदेश पहुंचाना चाह रहा हो कि वह अभी भी सक्रिय है और अपने दुश्मनों से लड़ रहा है। मिस्र के राष्ट्रपति सीसी ने पहले से ही चरमपंथ के खिलाफ सख्त रुख अपनाया हुआ है।
पिछले कई सालों से सिनाई प्रायद्वीप में ज़बरदस्त सैन्य कार्रवाई जारी है। हालांकि अभी तक इस कार्रवाई का कोई बेहतर नतीजा देखने को नहीं मिला है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि वे इस जिद्दी इस्लामिक विद्रोह से निपटने के लिए कुछ नए क़दमों पर विचार कर रहे हैं या नहीं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अरब लीग के प्रमुख अहमद अबुल घेत ने इस हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा, ''यह भयानक अपराध बताता है कि कट्टर चरमपंथी विचारधारा को मानने वालों के लिए इस्लाम बहुत ही मामूली चीज है'' इसके साथ ही ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, रूस, इसराइल, ईरान, सऊदी अरब सहित कई देशों ने इस नरसंहार की निंदा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया, ''मैं जल्दी ही मिस्र के राष्ट्रपति से बात करूंगा और इस बड़े चरमपंथी हमले पर चर्चा करूंगा, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है. हमें और अधिक सख्त और चालाक होने की जरूरत है, और हम होकर भी रहेंगे।''
पिछले कई सालों से सिनाई प्रायद्वीप में ज़बरदस्त सैन्य कार्रवाई जारी है। हालांकि अभी तक इस कार्रवाई का कोई बेहतर नतीजा देखने को नहीं मिला है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि वे इस जिद्दी इस्लामिक विद्रोह से निपटने के लिए कुछ नए क़दमों पर विचार कर रहे हैं या नहीं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अरब लीग के प्रमुख अहमद अबुल घेत ने इस हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा, ''यह भयानक अपराध बताता है कि कट्टर चरमपंथी विचारधारा को मानने वालों के लिए इस्लाम बहुत ही मामूली चीज है'' इसके साथ ही ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, रूस, इसराइल, ईरान, सऊदी अरब सहित कई देशों ने इस नरसंहार की निंदा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया, ''मैं जल्दी ही मिस्र के राष्ट्रपति से बात करूंगा और इस बड़े चरमपंथी हमले पर चर्चा करूंगा, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है. हमें और अधिक सख्त और चालाक होने की जरूरत है, और हम होकर भी रहेंगे।''