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खतना के दौरान मौत के खिलाफ चलेगा मुकदमा

Thu, 15 May 2014 02:12 PM IST
Updated Thu, 15 May 2014 02:12 PM IST
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egypt female death during genital mutilation

मिस्र में पहली बार एक डॉक्टर पर लड़की का खतना करने के लिए मुक़दमा चलाया जाएगा। डॉक्टर के अलावा लड़की के पिता पर भी उसे डॉक्टर के पास ले जाने के लिए क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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13 वर्षीय सुहैर अल बता की जून, 2013 में खतना किए जाने के दौरान मौत हो गई थी। मिस्र में इस मुक़दमे को अपने तरह का ऐतिहासिक मामला माना जा रहा है।

सुहैर की दोस्तों का कहना है कि वो बेहद डरी हुई थीं। उन्होंने अपनी एक बहन से दूसरी बहन का ख्याल रखने को भी कहा था। पढ़ाई में अव्वल आने वाली सुहैर गर्मियों के दौरान परंपरागत तौर पर किए जाने वाले दर्दनाक खतने की प्रक्रिया से गुजर रही थीं और वे इस में बच न पाईं।
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सुहैर नील नदी के तट के एक छोर पर बसे मनसूरा शहर के एक किसान परिवार में पली बढ़ीं थीं और यहीं उन्होंने अपनी आख़िरी सांसे लीं। यहां के हरियाली भरे माहौल में मान्यताओं और परंपराओं की एक पथरीली ज़मीन भी है, जो महिलाओं के खतने के रिवाज़ को जारी रखने के लिए जिम्मेदार हैं।

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धार्मिक जिम्मेदारी

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मिस्र में महिलाओं के खतने पर 2008 से ही रोक लगा दी गई थी लेकिन इसके बावजूद देश में ये रिवाज बदस्तूर जारी है।

दुनिया के इस हिस्से में महिलाओं के खतने के मामले सबसे ज्यादा आते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 50 साल से अधिक उम्र की 90 फीसदी महिलाएं खतने की प्रक्रिया से गुज़र चुकी हैं।

महिलाओं के गुप्तांगों के बाहरी हिस्से को हटाने की इस प्रक्रिया को शुद्धता के नाम पर किया जाता है। मिस्र की प्रमुख धार्मिक संस्थाओं में से एक के सबसे बड़े मुफ्ती की ओर से महिलाओं के खतने पर रोक लगाने के बावजूद कुछ अभिभावक इसे एक धार्मिक जिम्मेदारी के तौर पर देखते हैं।

महिलाओं के खतने का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि ये प्रक्रिया अमूमन तब की जाती है जब उनकी उम्र नौ से 13 साल के बीच होती है लेकिन कुछ एक मामलों में तो ये भी देखा गया है कि पीड़ित लड़की की उम्र छह साल थी। कुछ अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार कुछ नवजात बच्चियों का भी खतना करा दिया जाता है।

ज़ख़्म ज़िंदगी भर

egypt female death during genital mutilation

सुहैर के चाचा का कहना है कि खतने के बगैर लड़कियों का मन भटकता है। सुहैर के साधारण से घर के बाहर उनके रिश्तेदार इस रिवाज की वकालत करते हैं और इस बात पर जोर देते हैं कि उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं था।

सुहैर के दादा मोहम्मद अल बता कहते हैं, "ये खुदा की मर्जी है। हम उस डॉक्टर से नाराज़ नहीं है। वो डॉक्टर किसी की जान नहीं लेना चाहता था। हम सब दुखी हैं और यकीनन हमें इसका अफ़सोस हैं।"

लेकिन जब उनसे ये पूछा गया कि सुहैर के साथ जो किया गया था, क्या वो सही था, सुहैर के चाचा तुरंत जवाब देते हैं, "हां, बेशक। यह हमारे इलाक़े में लंबे समय से किया जाता रहा है। यहां के लोग इसके अभ्यस्त हैं। खतने के बगैर लड़कियों का मन भटकता है।"

सुहैर के पिता और उनके डॉक्टर पर ऐतिहासिक मुक़दमा चलाया जा रहा है लेकिन खतना करने पर रोक लगने के पाँच सालों बाद भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

दस्तूर और मानसिकता

egypt female death during genital mutilation

यूनिसेफ ने इस क़ानून को स्पष्ट तरीके से लागू करने की मांग की है। फिलिप दुआमेले कहते हैं, "यह बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा है। ये ऐसी चीज़ है जिसे आप सुधार नहीं सकते। किसी लड़की के शरीर और मन पर इसकी पीड़ा ज़िंदगी भर के लिए रह जाती है।"

सुहैर के गांव में महिलाओं के खतने के विरोध में केवल एक आवाज़ सुनने को मिली। 13 साल की अमीरा अराफात सुहैर की सबसे करीबी दोस्त हैं स्थानीय लोगों की भीड़ के सामने उन्होंने सार्वजनिक तौर पर महिलाओं के खतने का विरोध किया।

अमीरा कहती हैं, "यह लड़कियों के लिए बहुत बुरी चीज़ हैं। इसकी कोई ज़रूरत नहीं है। ये ग़लत है क्योंकि ये ख़तरनाक है।" लेकिन उन्होंने ये भी बताया कि उनकी ज्यादातर सहेलियों को खतने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। उन्होंने कहा, "ये इस इलाके का दस्तूर है। असल मुश्किल किसानों की मानसिकता को लेकर है।"

सुहैर को उसके घर के पास के ही एक कब्रिस्तान में दफनाया गया जिसकी दीवारें सफेद रंग की हैं। अमीरा बताती हैं कि सुहैर को मज़ाक़ करना अच्छा लगता था और वे पत्रकार बनने का सपना देखा करती थीं।

महिलाओं के खतने का विरोध कर रहे लोग चेतावनी देते हैं कि दूसरी लड़कियों को बचाने के लिए एक से अधिक मुक़दमों की ज़रूरत पड़ेगी।

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