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मतभेदों के कारण नहीं बना ब्रिक्स बैंक

Thu, 28 Mar 2013 08:01 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Thu, 28 Mar 2013 08:01 AM IST
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due to differences not made brics bank

दुनिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के समूह ब्रिक्स के नेता एक नया विकास बैंक बनाने के मु्ददे पर फिलहाल सहमति बनाने में नाकाम रहे हैं।

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दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन बुधवार को ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका नेताओं ने फैसला किया कि इस बारे में अभी और बातचीत किए जाने की जरूरत है।
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ब्रिक्स के सदस्यों के बीच इस बारे में मतभेद बताए जाते हैं कि बैंक के लिए कितनी रकम जुटाने की जरूरत है और इसका मुख्यालय कहां होगा।

चीन के नए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने डबरन सम्मेलन में कहा कि ब्रिक्स देशों की क्षमताओं का अभी पूरी तरह उपयोग नहीं किया गया है।

'असीमित संभावनाएं'
शी ने कहा, "वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि धीमी है और ब्रिक्स की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार भी धीमी पड़ी है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाएं अब ढलान की तरफ हैं। इसके विपरीत ब्रिक्स की विकास की संभावनाएं असीमित हैं। औद्योगिकरण, शहरीकरण, सूचना प्रोद्योगिकी का फैलाव और अधिक कृषि संबंधी आधुनिकीरण से जबरदस्त ऊर्जा का उत्पादन होगा और बाजार के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे।
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ब्रिक्स देश अपना खुद का बैंक स्थापित करना चाहते हैं ताकि पश्चिमी वित्तीय संस्थानों पर उनकी निर्भरता कम हो। रूस का कहना है कि इस बारे में सकारात्मक प्रगति हो रही है लेकिन बैंक बनाने के बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डरबन सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ब्रिक्स की अहमियत बयान की।

उन्होंने कहा, “हमारे इन देशों में दुनिया की 40 फीसदी आबादी रहती है। ब्रिक्स देशों के पास प्राकृतिक संसाधनों के बड़े भंडार हैं। उनके पास अच्छी तरह तैयार किया गया औद्योगिक आधार है और प्रशिक्षित कर्मचारी भी हैं। विश्व के कुल सकल घरेलू उत्पाद में हमारी हिस्सेदारी 30 प्रतिशत है ”

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ब्रिक्स देश नए बैंक को शुरुआती 50 अरब डॉलर की पूंजी के साथ शुरू करना चाहते हैं लेकिन इस बारे मे मतभेद हैं कि क्या हर एक देश को 10 -10 अरब डॉलर का योगदान करना चाहिए या फिर सदस्य देश अपनी अर्थव्यवस्था के हिसाब से कम या ज्यादा योगदान भी दे सकते हैं।

चीन की अर्थव्यवस्था दक्षिण अफ्रीकी अर्थव्यवस्था के 20 गुनी है तो रूस या भारत की अर्थव्यवस्था के मुकाबले वो चार गुनी बड़ी है।

वैसे इस बैंक का काम उभरते हुए और विकासशील देशों में सड़कों, बंदरगाहों, बिजली परियोजनाओं और रेल सेवाओं के लिए मदद देना होगा।

कोई फैसला नहीं
भारत के वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि ब्रिक्स समूह वित्तीय संकट के बीच भी अहम भूमिका अदा करता रहा है।

शर्मा ने कहा, “बीते पांच साल के दौरान न सिर्फ उतार चढ़ाव आए, बल्कि गिरावट भी दर्ज की गई है। और वित्तीय संकट की वजह से पेश आई घटनाओं के कारण हर देश पर उनका गलत असर पड़ा है। ये सही है कि मुश्किल समय में भी ब्रिक्स देश वापस पटरी पर लौटे हैं और हम वैश्विक अर्थव्यवस्था की आर्थिक वृद्धि के इंजन को चला रहे हैं।”


वैसे इस साल के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य मकसद ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना था, लेकिन इस पर कोई फ़ैसला नहीं हो पाया है।

हालांकि इस बारे में कुछ प्रगति जरूर हुई है लेकिन कुछ सवालों का अभी तक जवाब नहीं मिल पाया है कि बैंक का मुख्यालय कहा होगा और इसमें हर देश कितनी रकम का योगदान करेगा।

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जूमा ने कहा कि वो ब्रिक्स वित्त मंत्रियों की इस रिपोर्ट से संतुष्ट है कि विकास बैंक बनाना उचित रहेगा। इस बैंक में योगदान के बारे में उन्होंने कहा कि इस बैंक के लिए शुरुआती तौर पर इतनी राशि होगी कि वो प्रभावी तरीके से अपनी वित्तीय ढांचागत जरूरतों को पूरा कर पाए।

ब्रिक्स देशों का कहना है कि अब वे बैंक की स्थापना के लिए 'औपचारिक तौर पर बातचीत' शुरू करेंगे।

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