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'आतंकियों ने मेरे भाई को छोड़ दिया था, लेकिन वह दोस्तों के लिए कुर्बान हो गया'
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 04 Jul 2016 11:55 AM IST
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दोस्तों को बचाने में मारा गया फराज
- फोटो : facebook
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ढाका हमले में तारिषी के दोस्त फराज ने इसलिए जान दे दी क्योंकि वह अपने दोस्तों को मरता नहीं देख सकता था। ढाका में रहने वाले फराज के भाई जरैफ हुसैन ने बताया कि आतंकियों ने रेस्टोरेंट में मौजूद लोगों से मुस्लिम प्रार्थना बोलने को कहा था, फराज को प्रार्थना आती थी तो उसने सुना दी, इस पर आतंकियों ने उसे जाने के लिए कहा, लेकिन वह गया नहीं, वह अपने दोस्तों के लिए वहीं कुर्बान हो गया।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक 20 वर्षीय फराज ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का ग्रेजुएट था। ढाका हमले से कुछ समय पहले ही वह कोलकाता में पेप्सिको कंपनी में इंटर्नशिप के लिए आया था। इससे पहल वह गुड़गांव होकर भी गया था। शुक्रवार को फराज, तारिषी जैन और अबिंता कबीर ने ढाका के आर्टिसन रेस्टोरेंट में मिलना तय किया। उनका चौथा दोस्त मिराज अल हक देर से आया, तब तक आतंकी रेस्टोरेंट पर हमला कर चुके थे, इसलिए वह अंदर नहीं गया और बच गया।
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फराज के भाई के मुताबिक फराज नेकदिल और लोगों की मदद करने वाला लड़का था। उससे किसी का दुख नहीं देखा जाता था। जरैफ के मुताबिक फराज की दोस्त अबिंता कबीर को आतंकियों ने संभवतः इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्योंकि उसने खुद को अमेरिकी नागरिक बताया। वह आतंकियों के कहने पर मुस्लिम प्रार्थना नहीं सुना सकी।
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तारिषी तुम बहुत याद आओगी...
तारिषी का फाइल फोटो
फीरोजाबाद में तारिषी की घरवालों का रो-रो कर बुरा हाल है, वे अपनी लाड़ली को याद करते हुए बताते हैं कि अब तो बस यादें ही बाकी हैं। तारिषी न केवल पढ़ाई में अव्वल थी बल्कि गेम्स में आगे बढ़ कर हिस्सा लेती थी। तारिषी को बैडमिंटन और बास्केटबाल का शौक था। रेस में उसने गोल्ड मेडल जीता था। क्लासिकल डांस वह बहुत अच्छा करती थी। भारतीय व्यंजन बनाने का उन्हें शौक था।
ईनी जैन तारिषी की मौसी भी हैं और ताई भी। उन्होंने बताया कि तारिषी का सपना एक बड़ा वकील बनने का था। इसलिए उसने ला में एडमिशन ले लिया था।
तारिषी की चाची सरिता जैन और भावना जैन ने कहा तारिषी के स्वभाव के बारे क्या कहा जाए इतनी हंसमुख और मिलनसार बच्ची थी कि शब्दों में कह नहीं सकते। वह विदेश में जन्मी और विदेश में पढ़ी लेकिन भारतीय संस्कार उसके अंदर कूट-कूट कर भरे थे। हर पल उसका मन हिंदुस्तान आने के लिए करता था।
ईनी जैन तारिषी की मौसी भी हैं और ताई भी। उन्होंने बताया कि तारिषी का सपना एक बड़ा वकील बनने का था। इसलिए उसने ला में एडमिशन ले लिया था।
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