'हत्यारे रोबोट' पर होगी संयुक्त राष्ट्र में बहस
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जिनेवा में हो रही संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की अनौपचारिक बैठक में 'हत्यारे रोबोट' पर चर्चा की जाएगी। रोबोटिक्स के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर रोनाल्ड आर्किन और प्रोफ़ेसर नोएल शार्की इस बैठक में 'हत्यारे रोबोट' की कार्यकुशलता और आवश्यक्ता पर बहस करेंगे।
यह बैठक संयुक्त राष्ट्र की कन्वेंशन ऑन सर्टेन कन्वेंशनल वेपंस (सीसीडब्ल्यू) की सम्मेलन के दौरान ही होगी। 'हत्यारा रोबोट' पूरी तरह स्वाचालित हथियार होता है जो अपने निशाने को किसी मानवीय मदद के बिना चुनकर मार सकता है। अभी तक ऐसे रोबोट बनाए नहीं गए हैं लेकिन तकनीकी क्षेत्र में हो रही प्रगति को देखते हुए ऐसे रोबोट बनने की संभावना हक़ीक़त में बदल सकती है।
इस बैठक में होनी बहस पर आधारित एक रिपोर्ट को सीसीडब्ल्यू की नवंबर में होने वाली बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। यह पहली बार होगा कि 'हत्यारे रोबोट' या घातक स्वचालित हथियार तंत्र के बारे में सीसीडब्ल्यू में चर्चा की जाएगी।
बहस का पक्ष और विपक्ष
'हत्यारे रोबोट' बनाए जाने का समर्थन करने वालों का कहना है कि वर्तमान युद्ध क़ानून उन परिस्थितियों से निपटने में सक्षम हैं जो ऐसे रोबोट के उपयोग से पैदा हो सकती हैं। ऐसे लोगों को कहना है कि अगर कोई दिक्कत होती है तो इनके निर्माण को स्थगित किया जा सकता है इसलिए इनपर पूरी तरह पाबंदी लगाना ठीक नहीं होगा।
हालांकि इन रोबोट का विरोध करने वालों के मानना है कि ये रोबोट मानवता के लिए ख़तरा होंगे और किसी भी तरह के 'स्वाचालित घातक हथियार' पर पाबंदी होनी चाहिए।
प्रोफ़ेसर शार्की ने बीबीसी से कहा, "स्वचालित हथियार तंत्र के अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप काम करने की गांरटी नहीं दी जा सकती।" वे कहते हैं, "विभिन्न देश आपस में इसके बारे में बात करने को तैयार नहीं हैं जबकि यह मानवता के लिए बड़ा ख़तरा है।"
प्रोफ़ेसर शार्की हत्यारे रोबोट के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे कैंपेन के सह-संस्थापक और सदस्य हैं। वे इंटरनेशनल कमिटी फ़ॉर रोबोट आर्म्स कंट्रोल नामक संस्था के अध्यक्ष भी हैं।
हत्यारे रोबोट के निर्माण के ख़िलाफ़ कैंपने चलाने वाले सीसीडब्ल्यू के आयोजन के साथ-साथ ही अपने कार्यक्रम करेंगे।
रोबोट का डर और उम्मीद
वहीं जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी के प्रोफ़ेसर अर्किन ने बीबीसी से कहा, "मुझे उम्मीद है कि इन रोबोट की मदद युद्ध के इतर होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है लेकिन यह डर भी है कि इन्हें इससे पहले कहीं युद्ध में ही न झोंक दिया जाए।"
वे कहते हैं, "जब तक हमारा वांछित उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता तब तक मैं इसके स्थगन के पक्ष में हूँ लेकिन मैं इस समय इस पर पाबंदी लगाने का समर्थन नहीं कर सकता।"
प्रोफ़ेसर आर्किन मानते हैं कि हत्यारे रोबोट किसी को निशाना बनाने के मामले में ज़्यादा सावधानी के साथ काम कर सकते हैं। लेकिन प्रोफ़ेसर शार्की इन्हें लेकर ज़्यादा उत्साहित नहीं है। वो पूरी तरह स्वचालित हथियारों को लेकर थोड़े चिंतित हैं।
इस बैठक में ड्रोन विमानों के प्रयोग पर कोई चर्चा नहीं होगी क्योंकि वो अभी पूरी तरह स्वचालित नहीं हैं। हालांकि निकट भविष्य में ड्रोन के इस्तेमाल पर भी चर्चा होने की संभावना है।
मानवीय भागीदारी ज़रूरी
ब्रिटेन ने इस साल ही टैरेनिस नामक एक मानवरहित अंतरमहाद्वीपीय एयक्राफ्ट का ऑस्ट्रेलिया में परीक्षण किया था। अमरीका के डिफेंस एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी (डीएआरपीए) एक मानवरहित ग्राउंड कॉम्बैट वेहिकल, 'द क्रशर' का निर्माण किया है।
ब्रिटेन का रक्षा मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि वो ऐसा कोई आयुध बनाने का इरादा नहीं रखता जिसमें किसी मानवीय हस्तक्षेप की ज़रूरत न हो।
मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ह्यूमन राइट वॉट के अनुसार अमरीकी रक्षा विभा ने 21 नवंबर, 2012 को एक निर्देश जारी करते हुए कहा था कि किसी भी घातक शक्ति का प्रयोग का निर्णय लेते समय मानवीय भागीदारी आवश्यक है।
13 मई से 16 मई 2014 तक चलने वाली विशेषज्ञों की इस बैठक की अध्यक्षता फ्रांस के राजदूत जॉन-ह्यूगस सिमोन-मिशेल करेंगे।