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सीरिया का एक खौफनाक मंजर, जो बीत गया
Updated Wed, 22 Jan 2014 02:14 PM IST
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सीरिया में बीते तीन वर्षों में लगभग 11,000 बंदियों को प्रताड़ित करने और मौत की सज़ा दिए जाने का दावा करने वाली रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने 'ख़ौफ़नाक' बताया है।
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अमेरिका का कहना है कि इससे पता चलता है कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को पद के हटाना कितना आवश्यक है।
लेकिन असद शासन के एक प्रवक्ता का कहना है कि इस रिपोर्ट की कोई विश्वसनीयता नहीं है क्योंकि इसे क़तर ने तैयार कराया है जो सीरिया में विद्रोही गुटों की आर्थिक मदद करता है।
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यह रिपोर्ट सीरिया संकट पर स्विटज़रलैंड में आरंभ होने जा रही शांति-वार्ता से महज एक दिन पहले आई है।
स्विटज़रलैंड के शहर मॉन्गट्रेए में होने वाली इस वार्ता के लिए विभिन्न देशों और पक्षों के प्रतिनिधियों का पहुंचना आरंभ हो गया है।
एक दिन की बातचीत मॉन्गट्रेए में होगी और इसके दो दिन बाद इसे जिनीवा में जारी रखा जाएगा।
सीरिया संकट के समाधान के लिए इस सम्मेलन को अब तक का सबसे बड़ा राजनयिक प्रयास माना जा रहा है।
इस रिपोर्ट को तीन पूर्व युद्ध अपराध मामलों से जुड़े वकीलों ने तैयार किया है जो सीरिया की सैन्य पुलिस से अलग हुए एक फ़ोटोग्राफ़र द्वारा मुहैया कराई गई लगभग 55,000 तस्वीरों पर आधारित है जिनमें क़रीब 11,000 मृत बंदियों की तस्वीर हैं।
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अमरीकी विदेश विभाग की एक प्रवक्ता मेरी हर्फ़ का कहना है, ''हम स्वाभाविक तौर पर इस रिपोर्ट की कड़ी से कड़ी भर्त्सना करते हैं। ये तस्वीरें बेहद परेशान करने वाली हैं। ये गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराध का मामला हो सकता है। सीरिया में इन अपराधों के लिए ज़िम्मेदारी तय की जानी चाहिए।''
इससे पहले, ब्रितानी विदेश मंत्री विलियम हेग भी इस रिपोर्ट पर ऐसे ही विचार व्यक्त कर चुके हैं।
वहीं संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लई के प्रवक्ता रुपर्ट कोलविले ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, ''इतने गंभीर आरोपों की अनदेखी नहीं की जा सकती है और इसकी आगे जांच किए जाने की आवश्यकता है।''
लेकिन सीरिया के सूचना मंत्रालय में एक प्रवक्ता बसम अबु अब्दुल्ला ने बीबीसी से कहा कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि जानकारी कहां से आई और जिन तस्वीरों की बात की जा रही है, वो सीरिया के भीतर की हैं या बाहर की।