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'सीआईए ने बोरों में दिए करजई को डॉलर'

Tue, 30 Apr 2013 10:51 AM IST
Updated Tue, 30 Apr 2013 10:51 AM IST
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cia give dollars in bags accept hamid karzai

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने ये स्वीकार किया है कि उनके कार्यालय ने अमेरिका से खुफ़िया तौर पर पैसे स्वीकार किए थे।

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हालांकि उन्होंने कहा कि इस रकम बहुत का इस्तेमाल वैध रूप से हुआ था।

दरअसल अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने नियमित रूप से नकद से भरे सूटकेस राष्ट्रपति के कार्यालय को भेजे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक करोड़ों डॉलर की रकम खुफिया रूप से उनके दफ्तर पहुंचाई गई और ये रकम पिछले अनुमानों से ज़्यादा थी।

इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि इन पैसों का इस्तेमाल बीमारों के इलाज के लिए चलाई गई परियोजनाओं में हुआ।

अपनी सफाई में एक वक्तव्य जारी कर उन्होंने कहा, “इस पैसे का इस्तेमाल कई योजनाओं के लिए हुआ, जैसे कि घायलों को सहारा देना, किराए की कीमत और कुछ प्रक्रिया-संबंधी कार्य। ये एक प्रभावशाली मदद थी और हम इसकी प्रशंसा करते हैं।”
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नोटों की गड्डियां
उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका द्वारा दी गई रकम अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा काउंसिल को भी दी गई थी जो कि पिछले 10 सालों से राष्ट्रपति कार्यालय का ही भाग है।
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न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट ने दावा किया था कि "अमेरिकी डॉलरों की गड्डियां सूटकेस और बोरों में भर कर और कभी-कभी तो प्लास्टिक के शॉपिंग बैग अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति के दफ्तर भेजी गईं"।


इस रिपोर्ट में करज़ई के कार्यालय में 2002 से 2005 तक वरिष्ठ अधिकारी रह चुके ख़लील रोमन का बयान छापा गया था जिन्होंने इस रकम को ‘अवैध रकम’ बताया।

रिपोर्ट ने ख़लील के हवाले से कहा कि "ये रकम आई भी खुफिया तरीके से और गई भी खुफिया तरीके से।"

रिपोर्ट में गुमनाम अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि इस बात के बहुत कम सबूत हैं कि इस रकम से वो दबदबा बनाया गया जो सीआईए चाहता था।

रिपोर्ट में कहा गया कि रकम का इस्तेमाल भ्रष्टाचारी गतिविधियों के लिए हुआ और कई राजनीतिज्ञों तथा लड़ाकू हथियार बंद गुटों के नेताओं को भी पैसा दिया गया।

सीआईए ने इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है।

वर्ष 2010 में करज़ई ने स्वीकार किया था कि उन्होंने ईरान से रकम स्वीकार की थी लेकिन उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ये सब पारदर्शी रूप से हुआ।

अफ़ग़ानिस्तान को कई देशों से अरबों डॉलर की सहायता मिलती है, लेकिन फिर भी ये सबसे गरीब देशों में से एक है।

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