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चीन की इस मिसाइल से भारत, अमेरिका, जापान को बड़ा खतरा
एजेंसी / बीजिंग
Updated Wed, 03 Jan 2018 06:04 AM IST
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मिसाइल
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चीन की नई हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिका के साथ जापान और भारत के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। यह मिसाइल तीनों देशों के सैन्य ठिकानों पर सटीक तरीके से निशाना लगाने में भी सक्षम होगी। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में इसका दावा किया है।
टोक्यो के ‘डिप्लोमैट’ पत्रिका की रिपोर्ट में कहा गया था कि चीनी रॉकेट बलों ने नए ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हिकल’ (एचडीएफ) का पिछले साल परीक्षण किया था। इसे डीएफ-17 नाम दिया गया है। अमेरिका खुफिया सूत्रों के हवाले से डिप्लोमैट ने पिछले महीने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) रॉकेट फोर्स ने पहला परीक्षण 1 नवंबर और दूसरा एक या दो महीनों बाद किया था। सूत्रों ने कहा था कि दोनों परीक्षण सफल रहे थे और डीएफ-17, 2020 तक तैनात किया जा सकता है। डीएफ-17 परीक्षण मिसाइलों को मंगोलिया के जिउकुआन परीक्षण केंद्र से लांच किया गया।
पढ़ें- ट्रंप ने उकसाया तो अमेरिका पर कर देंगे मिसाइलों की बौछार: उत्तर कोरिया
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परीक्षण के दौरान यह यह 1400 किमी की ऊंचाई तक गया। ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने मंगलवार को बीजिंग के सैन्य विश्लेषक झोउ चेनमिंग के हवाले से कहा कि पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में एचजीवी बेहद जटिल है और इसे मार गिराना मुश्किल है। अमेरिका, जापान और भारत को चीन की एचजीवी तकनीक के विकास से चिंतित होना चाहिए। यह जापान में सैन्य अड्डों और भारत में परमाणु रिएक्टरों तक शीघ्रता और ज्यादा सटीकता के साथ पहुंच सकती है।
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टोक्यो के ‘डिप्लोमैट’ पत्रिका की रिपोर्ट में कहा गया था कि चीनी रॉकेट बलों ने नए ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हिकल’ (एचडीएफ) का पिछले साल परीक्षण किया था। इसे डीएफ-17 नाम दिया गया है। अमेरिका खुफिया सूत्रों के हवाले से डिप्लोमैट ने पिछले महीने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) रॉकेट फोर्स ने पहला परीक्षण 1 नवंबर और दूसरा एक या दो महीनों बाद किया था। सूत्रों ने कहा था कि दोनों परीक्षण सफल रहे थे और डीएफ-17, 2020 तक तैनात किया जा सकता है। डीएफ-17 परीक्षण मिसाइलों को मंगोलिया के जिउकुआन परीक्षण केंद्र से लांच किया गया।
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परीक्षण के दौरान यह यह 1400 किमी की ऊंचाई तक गया। ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने मंगलवार को बीजिंग के सैन्य विश्लेषक झोउ चेनमिंग के हवाले से कहा कि पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में एचजीवी बेहद जटिल है और इसे मार गिराना मुश्किल है। अमेरिका, जापान और भारत को चीन की एचजीवी तकनीक के विकास से चिंतित होना चाहिए। यह जापान में सैन्य अड्डों और भारत में परमाणु रिएक्टरों तक शीघ्रता और ज्यादा सटीकता के साथ पहुंच सकती है।
चीन ने साधी चुप्पी
नवाज शरीफ और शी जिनपिंग
पीएलए के पूर्व सदस्य सांग झोंगपिंग ने कहा कि एचजीवी हथियारों को बैलिस्टिक मिसाइल डीएफ-41 के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 12 हजार किमी तक है। यह महज एक घंटे के भीतर अमेरिका के किसी भी स्थान तक मार कर सकती है।
जब इन परीक्षणों के बारे में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग से मंगलवार को पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की जानकारी के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क करना चाहिए।
एचजीवी की यह है खूबी :
- एचजीवी एक मानव रहित और रॉकेट लांच कर सकने वाला विमान है
- पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में एचजीवी की गति तेज है
- यह कम ऊंचाई पर उड़ सकती है
- यह राडार से भी बच निकलने में सक्षम है
जब इन परीक्षणों के बारे में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग से मंगलवार को पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की जानकारी के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क करना चाहिए।
एचजीवी की यह है खूबी :
- एचजीवी एक मानव रहित और रॉकेट लांच कर सकने वाला विमान है
- पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में एचजीवी की गति तेज है
- यह कम ऊंचाई पर उड़ सकती है
- यह राडार से भी बच निकलने में सक्षम है